Thursday, December 9, 2010

प्रधानमन्त्री

दिल्ली की एक ज्योतिष पत्रिका के मई 2009 के अंक में एक लेख छपा था, 'कौन बनेगा प्रधानमन्त्री ?'' इस में कई कुण्डलियों का खुलासा किया गया। सुषमा स्वराज जी  के बारे में ज्योतिषी जी ने लिखा, '' सुषमा जी पर वर्तमान समय में प्रभावी शनि और बुध की दशा 30-11-2009 तक चलेगी। इस अवधि में उनके प्रधानमन्त्री बनने की प्रबल सम्भावना है।'' आगे चलकर प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह जी के बारे में लिखा,'' दूसरी बार प्रधानमन्त्री बनने में कठिनाई होगी।''

खैर लोकसभा चुनाव हुए। सुषमा जी प्रधानमन्त्री तो दूर, मन्त्री भी न बन सकी। मगर मनमोहन सिंह जी बिना चुनाव लड़े दोबारा प्रधानमन्त्री बन गए। कोई कठिनाई न हुई। अब क्या कहें ? या तो कुण्डलियां ठीक नही या फिर ज्योतिषी जी गलती कर गए। चलिए लाल किताब के हिसाब से कुण्डलियों का जायज़ा लें।



सुषमा जी की कुण्डली के खाना नं0 10 में सुरज को ग्रहण राहु से और खाना नं0 5 में चन्द्र को ग्रहण सनीचर से। किस्मत का घर खाना नं0 9 में बुध, ''चमगादड़ के मेहमान आए, यहां हम लटके वहां तुम लटको।'' काला नंगा सिर भी मन्दा। ऐसी हालत में प्रधानमन्त्री बनने की बात कुछ समझ में न आए।


मनमोहन सिंह जी की कुण्डली के खाना नं0 10 में सुरज बुध मुश्तर्का, राज ताल्लुक और सरकारी मुलाजमत । किस्मत का घर खाना नं0 9 में बृहस्पति, सुनहरी खानदान, जैसे जैसे उम्र बढ़े वैसे वैसे तरक्की करे। मंगल और पापी ग्रह भी नेक। ऐसी हालत में प्रधानमन्त्री बनने की बात समझ में आए। अगर पगड़ी का रंग सफेद या हल्का शर्बती हो तो बेहतर होगा ।


ज्योतिष के नाम पर उल्टी सीधी बातें कहने से न सिर्फ ज्योतिष को धक्का लगता है बल्कि अपनी खुद की मिट्टी भी खराब होती है। इसलिए ऐसी बातों से बचना चाहिए।

Friday, November 19, 2010

मंगल

मंगल नेक, शस्त्रधारी, सुर्ख रंग, नेक होने पर जिस्म में खून रूह की तरह जंगल में मंगल किया और बदी से हिरण की तरह भागा। मंगल बद हुआ तो कोई बदी न छोड़ी और हर एक को तलवार के घाट उतारा मगर मुआफ हरगिज़ न किया। शुतर बेमुहार कीनासाज़, रेगिस्तान का जहाज़ जिसे रेत से मुहब्बत है और पानी की परवाह नही।


अगर जन्म कुण्डली में सूरज बुध इकट्ठे हो तो मंगल नेक, अगर सूरज सनीचर इकट्ठे तो मंगल बद होगा। खाना पीना, भाई बन्दो की सेवा जंग व जदल, जिस्मानी दुख: बिमारी 28 सालां उम्र का ज़माना। तमाम जिस्म की दरमियानी जगह नाभि मंगल की राजधानी और सूरज की सीधी किरणों की जगह मानी गई है। इसलिये कुण्डली की नाभि खाना नं0 4 के ग्रह, मंगल की नेक और बुरी हालत का पता बतायेंगे यानि जैसे नं0 4 मे बैठे होने वाले का असर होगा वही हालत मंगल के खून की होगी। न सिर्फ दान इसका ज़रूरी पहलू और कुल दुनिया के भलाई के काम और भण्डारे खोलने की हिम्मत इसकी नेकी का पता बतायेंगे बल्कि कुल खानदान की लावल्दी दूर करेगा। अकेला बैठा हुआ मंगल मानिंद जंगल का शेर बहादुर होगा। मंगल नेक अपने असर की निशानी हमेशा उस ग्रह की चीज़ों के ज़रिए देगा जोकि कुण्डली में उम्दा हों और उस ग्रह का अपना वक्त असर देने का हो । मंगल बद मन्दे ग्रहों की चीज़ों, इसके मन्दा असर देने के वक्त बुरे असर की हवा का आना पहले बतला देगा। हर हालत में मंगल के असर में यकसां लगातार दरिमयाना रफतार न होगी। ख्वाह मंगल नेक शेर बहादुर के हमला की ताकत का हो। ख्वाह मंगल बद डरपोक हिरण की तरह कोसों ही दूर भागता हो।


बदी का तुख्म, खून का बदला खून से लेना हरदम ज़रूरी जब घी (शुक्र) और शहद (मंगल नेक) बराबर के हों तो ज़हर (मंगल बद) हाेंगा यानि सबसे पहले शुक्र और बाद में सूरज का फल यके बाद दीगरे मन्दा होगा। लेकिन अगर सूरज या चन्द्र की मदद मिल जावे तो मंगल बद न होगा। कोई दो पापी (सनीचर राहु, सनीचर केतु) या कोई दो बाहम दुश्मन (बुध केतु, सूरज शुक्र) मंगल के साथी होवें तो मंगल बद न होगा। जब अपनी मार पे आयेगा, एक का बुरा न करेगा बल्कि अगर हो सके तो कुल खानदान का बेड़ा गर्क करेगा। जब बुध मन्दा हो, मंगल बद ओर भी मन्दा होगा और खूनी शेर बहादुर की बजाये बकरियों में रहने वाला पालतू शेर की तरह अपनी असलियत से बेखबर होगा।


खाना नं0 4 और 8 का मंगल आमतौर पर बद ही होता है। उपाय के लिए हर रोज़ सुबह पानी से दांत सफा करना मददगार होगा। चन्द्र का उपाय या बढ़ के दरखत को दूध में मीठा डालकर गीली की हुई मिट्टी का तिलक पेट की खराबियों को दूर करेगा। आग के वाक्यात पर छत पर खाण्ड की बोरियां, शहद से मिट्टी का बर्तन भरकर बाहर शमशान में (लावल्दी के वक्त या औरत, औलाद की बरबादी), मृगशाला (लम्बी बिमारियों से छुटकारा), चांदी चकौर की मदद या जनूबी दरवाज़ा लोहे से कील देवें । काले, कान,े लावल्द, डेक के दरखत से दूरी पकड़ें। सूरज, चन्द्र, बृहस्पति की अशिया कायम करें। चिड़े चिड़ियों को मीठा देना और हाथी दांत पास रखना मुबारक होगा।


खुलासातन कुण्डली में अगर मंगल नेक तो कुशल मंगल और बद तो मंगल दंगल। मिसाल के तौर पर वरूण गांधी की कुण्डली।



जन्म: 13-3-1980

मंगल बद खाना नं0 4, जो पानी में भी आग लगा दे। जिसने दुनिया की कोई बदी न छोड़ी। बेमुहार ऊँठ की तरह गर्दिश का सैलानी। अपने ही परिवार की औरतों पर भारी। मां जवानी में बेवा हो गई। खुद मियां फज़ीहत औरों को नसीहत। वाह रे ! मंगल बद।

Monday, November 1, 2010

बृहस्पति

अगर बृहस्पति के ज़रद रंग ज़माने के शेर ने इन्सानी गुरू के चरणों में सोने (नींद) से दुनिया को सोना (धात) बख्शा तो केसर ने दुनिया को खुशी की मौत सिखाई । बृहस्पति..... श्री ब्रह्म जी महाराज, दोनो जहां और त्रिलोकी के मालिक ।


इन्सान की मुट्ठी के अन्दर के खाली खलाव में बंद या आकाश में फैले रहने, हर दो जहां में जा आ सकने और तमाम ब्रह्माण्ड व इन्सान के अन्दर बाहर चक्र लगाने वाली हवा को ग्रह मण्डल में बृहस्पति के नाम से याद किया गया है। जो बन्द हालत में कुदरत से साथ लाई हुई किस्मत का भेद और खुल जाने पर अपने जन्म से पहले भेजे हुये खज़ाने का राज और बंद और खुली हर दो हालत की दरमियानी हद इन्सान शरीफ. के शुरू (जन्म लेने) व आखीर (वफ़ात पाने) का बहाना होगी । यह ग्रह तमाम ग्रहों का गुरू और ज़ाहिरा गैबी, दोनों जहां का मालिक माना गया है। इसलिये एक ही घर मे बैठे हुये बृहस्पति का असर बेशक मानिन्द राजा या फकीर, सोना या पीतल, सोने की बनी हुई लंका तक दान कर देने वाला प्राणी या सारे ज़माने का चोर साधु जिसका धर्म ईमान न हो, हर दो हालत में से ख्वाह किसी भी ढंग का हो मगर उसका बुरा असर शुरू होने की निशानी हमेशा सनीचर के मन्दे असर के ज़रिए होगी और नेक असर खुद बृहस्पति के ग्रह के मतल्ल्का अशिया, कारोबार या रिश्तेदार मतल्लका बृहस्पति के ज़रिए ज़ाहिर होगा।

नर ग्रहों (सूरज,मंगल) के साथ या दृष्टि वगैरह से मिलने पर मामूली तांबा भी सोने का काम देगा। स्त्री ग्रह (शुक्र या चन्द्र) के साथ या दृष्टि के ताल्लुक से मिट्टी से भरा हुआ पानी भी उत्ताम दूध का काम देगा। बृहस्पति के बगैर तमाम ग्रहों में मिलने जुलने की या दृष्टि की ताकत पैदा न होगी। पापी ग्रह (राहु, केतु, शनीचर) मन्दे होने पर बृहस्पति सोने की जगह पीतल, मिट्टी, हवा की जगह ज़हरीली गैस का मन्दा असर देगा। बृहस्पति और राहु दोनों खाना नं0 12 (आसमान) में इकट्ठे ही माने गये हैं।

बृहस्पति दोनों जहां (गैबी व ज़ाहिरा) का मालिक है जिसमें आने और जाने के लिए नीले रंग में राहु का आसमानी दरवाज़ा है। इसलिए जैसा यह दरवाज़ा होगा वैसा ही हवा के आने जाने का हाल होगा। अगर राहु टेडा चलने वाला हाथी , सांस को रोकने वाला कड़वा धुआं या ज़मीन को पताल से भूंचाल बनकर हिलाता रहे तो बृहस्पति भला नही हो सकता। लेकिन अगर राहु उत्ताम और मददगार दरवाज़ा हो तो बृहस्पति कभी बुरा न होगा।

हर तरफ से अकेला बृहस्पति ख्वाह वह दृष्टि वगैरह से कितना भी मन्दा होवे पर टेवे वाले पर कभी मन्दा असर न देगा। बरबाद हो चुका बृहस्पति आम असर के लिए खाली बुध गिना जायेगा। जिसका फैसला बुध के जाति सुभाव के असूल पर होगा। दुश्मन ग्रहों (बुध, शुक्र, राहु या सनीचर बहैसियत पापी ग्रह यानि जब सनीचर को राहु या केतु किसी तरह भी बरूये दृष्टि या साथ वगैरह से आ मिलते हों ) के वक्त मन्दा हो जाने की हालत में बृहस्पति अमूमन बुध का असर देगा और बृहस्पति का मन्दा असर काबिले उपाय होगा । जिसके लिये साथी दुश्मन ग्रह का उपाय मदद देगा।

ग्रह मण्डल में सब ग्रहों में छेड़छाड़ करने कराने वाले दुनियावी पाप (सिर्फ दो ग्रह राहु केतु का दूसरा नाम) को चलाने वाला बृहस्पति है। गोया राहु केतु के पाप करने की शरारत से पहले बृहस्पति खुद अपनी अशिया या कारोबार या रिश्तेदार मतल्लका बृहस्पति के ज़रिए खबर दे देगा। जिसके लिए ख्याल रहे कि


''असर जलता दो जहां का, ग्रहण शत्रु साथी जो ।
चोर बना 6 ता 11, मंगल टेवे ज़हरी जो ॥''
मिसाल के तौर पर मुरार जी देसाई जी की कुण्डली ।


                                                                     जन्म: 29-2-1896


वह नेहरू जी और इन्दिरा जी की बज़ारत में वज़ीर रहे। पर इन्दिरा जी ने उनको निकाल बाहर फैंका। कुण्डली में केन्द्र खाली, सुरज और चन्द्र ग्रहण । पापी ग्रह सनीचर, राहु, केतु भी मन्दे। मगर पापी ग्रहों का भी बृहस्पति खाना नं0 2 को सलाम , जिसने आखिर देसाई जी को वज़ीर-ए-आज़म की कुर्सी पर बिठा दिया। सलाम ! गुरू तुझे सलाम!

Monday, August 30, 2010

किस्मत

''घर चलकर जो आवे दूजे, ग्रह किस्मत बन जाता है।

खाली पड़ा घर 10 जब टेवे, सोया हुआ कहलाता है। ''

किस्मत लक्ष्मी के नाम से मशहूर है जो बृहस्पति का दूसरा नाम है। 12 साल तक बच्चे और 70 साल के बाद किस्मत का एतबार नही। किस्मत एक ऐसी चीज़ है जो दुनियावी कारोबार में न हाथ की मदद ढूंढे और न ही उसमें आंख को काम करना पड़े। हर काम का नतीजा खुद-ब-खुद नेक हो जावे। धन्ना भगत, बृहस्पति नं0 2 की गायें राम चरावे। मगर सुदामा भगत, बृहस्पति नं0 9 अपने सखा कृष्ण के लिये तोहफा लेकर जावे।


खाना नं0 2 व खाना नं0 6 का फैसला खाना नं0 8 को साथ लेकर होगा। कुण्डली के बाद के घरों के ग्रहों के जागने के दिन से किस्मत का जागना, मुराद होगी। बन्द मुठ्ठी के अन्दर के खानाें (1,7,4,10) के ग्रह ख्वाह भले हों ख्वाह बुरे कुण्डली वाले की किस्मत के बुनियादी पत्थर होंगे। किस्मत के ग्रह का जागने का वक्त किस्मत के असर का वक्त होगा। किस्मत के ग्रह कई एक हों  सब बाहम पूरे मददगार होंगे। सब से अच्छी किस्मत, बृहस्पति का किस्मत का ग्रह होता है। ''बृहस्पति नं0 2 कायम और खाना नं0 9 में दुश्मन (बुध, शुक्र, राहु) न हों और न ही नं0 9 मन्दा हो रहा हो।''


किस्मत का ग्रह


सबसे उत्ताम दर्जा पर वह ग्रह होगा जो राशि का ऊँच फल देने का मुकर्रर है, जो हर तरफ से कायम, साफ और दुरूस्त हो और उसमें किसी तरह से किसी साथी ग्रह का बुरा असर न मिला हुआ होवे। उसके बाद पक्के घर का ग्रह, घर का मालिक दोस्त ग्रहों का बना हुआ दोस्त ग्रह किस्मत का मालिक ग्रह होगा।


किस्मत के ग्रह की तलाश


सबसे पहले 12 राशियों के उच्च फल देने वाले ग्रहों की तलाश करें। फिर 9 ग्रहों से जो उम्दा हो वो लें और बाद में बन्द मुठ्ठी के खानों (1,7,4,10) के ग्रहों से जो उम्दा हा,े लें । उच्च फल देने वालों में से जो सबसे तसल्ली बख्श और उच्च हो, लें । घर के मालिक ग्रहों से सबसे ज्यादा ताकतवर वाले को लें। अगर मुठ्ठी के चारों खाने खाली हों तो खाना नं0 9 के ग्रहों लेंगे। वह भी खाली हो तो, खाना नं0 3 के ग्रहों को लें। अगर वह भी खाली हो तो खाना नं0 11 के ग्रहों को लेंगे। अगर वह भी खाली हों तो खाना नं0 6 देखेंगे। अगर वह भी खाली हों तो खाना नं0 12 में तलाश करेंगे। अगर वह भी खाली हो तो खाना नं0 8 में बैठकर देखेंगे कि आया किस्मत का ग्रह, जिसमें ऊपर की तमाम शर्तें न हों, नष्ट ही तो नही हो गया ? यह तलाश जन्म और चन्द्र कुण्डली दोनों से होगी। किस्मत का ग्रह बातरतीब बृहस्पति के बाद सूरज के बाद चन्द्र के बाद शुक्र के बाद मंगल के बाद बुध के बाद सनीचर के बाद राहु के बाद केतु का असर देता है।







                             कुण्डली नं0 1 जन्म 28.12.1937      कुण्डली नं0 2 जन्म 28.9.1982
मिसाल के तौर पर कुण्डली नं0 1 रतन टाटा जी की है और कुण्डली नं0 2 रणबीर कपूर की है। दोनो ही कुण्डिलयों में किस्मत का ग्रह बृहस्पति और साथ में सूरज है। रतन टाटा जी ने अपने परिवार के कारोबार को बहुत आगे बढ़ाया है। ऐसी ही उम्मीद फिल्मी दुनियां में, रणबीर कपूर से की जा सकती है। समझदार के लिए इशारा ही काफी है।

Monday, July 19, 2010

सूरज

आकाश में रौशनी, ज़मीन के अन्दर गर्मी, राजा फकीर में सच्चाई, ज़माने में परर्विश और उन्नति की ताकत को सूरज के नाम से पुकारा गया है। जिसकी मौजूदगी का नाम दिन और गैरहाज़िरी का वक्त अंधेरी रात का दौर दौरा होगा। इन्सानी वजूद में रूह की हरकत और अपने जिस्म से दूसरे की मदद की हिम्मत इसका करिश्मा है। चलते चले जाना मगर अपना आखीर न बताना बल्कि पीछे हटे या रास्ता बदले बगैर फिर उसी जगह ही आकर हर रोज़ सुबह शाम करते जाना, इसका एक अजूबा है।


उत्तम सूरज वाला कुल दुनिया को रौशन करता और हर एक दौलत बख्शता है। लम्बी उम्र का मालिक होगा। तबीयत में अन्दर बाहर दोनों ही तरफ से सच्चा होगा। मन्दे वक्त पर बुरा असर रात के ख्वाब की तरह निहायत छुपे ढंग पर ज़ाहिर करेगा। किसी का सवाली न होगा बल्कि अगर हो सके तो किसी का सवाल पूरा कर देगा। खैरात न देवे तो बेशक मगर उल्टा फकीर की झोली से माल हरगिज़ न निकालेगा। खुद चोट खायेगा और बढ़ेगा मगर किसी को चोट न मारेगा । गो मौत को किसी ने भला नही गिना मगर सूरज उत्तम के वक्त मौत भी भली होगी ।


राज दरबार से खुद अपने हाथों धन-दौलत कमाने का और बालिग होने का 22 साला उम्र का अहद जवानी का जोश हर तरफ नई रौशनी देगा। सूरज की रौशनी और धूप में गर्मी का दर्जा हरारत राहु केतु की हालत से पता चलेगा। उत्तम सूरज के वक्त चन्द,्र शुक्र और बुध का फल अमूमन भला ही होगा। केतु खाना नं0 1 या मंगल नं0 6 में हो तो सूरज का असर नेक बल्कि ऊँच हालत का होगा ख्वाह सूरज किसी भी घर में और कैसा भी बैठा हो। जन्म कुण्डली के खाना नं0 1, 5, 11 में सूरज होने के वक्त टेवा बालिग ग्रहों का होगा जो बच्चे के माता के पेट में आने के वक्त ही से अपना असर शुरू कर देगा।


मन्दे असर का उपाय


अगर सूरज का खुद अपना ही असर दूसरे ग्रहों पर बुरा हो रहा हो तो सूरज के दोस्त ग्रह चन्द्र, मंगल, बृहस्पति को नेक कर लेना मददगार होगा। खाना नं0 6,7 में बैठा होने के वक्त आम मन्दी हालत में बुध का किसी उपाय से नेक कर लेना मददगार होगा। जब कोई ग्रह सूरज से नष्ट या बर्बाद हो रहा हो तो खुद सूरज का उपाय करें। जब सूरज का खुद अपना असर नष्ट या बर्बाद हो रहा हो तो दुश्मन ग्रह को, जो उसके असर को बर्बाद कर रहा हो, नेक करें।


जन्म 14-11-1889



मिसाल के तौर पर मरहूम जवाहर लाल नेहरू जी की कुण्डली में सूरज अपने घर अपने खाना नं0 5 में । शुक्र बुध मुश्तरका भी मसनुई सूरज । लिहाज़ा सूरज काफी ताकतवर । राहु केतु की वजह से सूरज का असर होने में ज़रा देर हुई। नेहरू जी सन् 1947 में आज़ाद मुलक के पहले वज़ीर-ए-आज़म बने और मरते दम सन् 1964 तक इसी ओहदे पर बने रहे। इस दौरान कोई भी दूसरा नेता उनका सामना न कर सका। यह उत्तम सूरज की एक बढ़िया मिसाल है।


Tuesday, June 22, 2010

शुक्र की दो रंगी मिट्टी

खाना नं01
काग रेखा या मच्छ रेखा, यक तरफा ख्याल का मालिक, तख्त का मालिक, रज़िया बेगम रानी मगर एक हब्शी गुलाम पर मर मिटी।


खाना नं02
उम्दा ग्रहस्थ हर तरफ से सिवाये बच्चे बनाने के, अपनी ही खूबसूरती और तबीयत के आप मालिक, खुद परस्ती, स्कूल मिस्टरैस, हर एक की दिलदादा औरत मगर वह खुद किसी को पसंद न करे।

खाना नं03
मर्द की हिम्मत-हैसियत,गाय की जगह बैल का काम देवे, ऐसी कशिश कि ऐसे टेवे वाले पर कोई न कोई औरत फरेफता (मोहित) हो ही जाया करती है।

खाना नं0 4
एक जगह दो औरत या दो मर्द मगर मर्द औरत दोनों ही ऐसी दो गाय या दो बैल कि बच्चा दोनो ही से न बने ।


खाना नं0 5
बच्चों भरा परिवार या ऐसे बच्चों का पैदा करने वाला जो उसे बाप न कहे या न कह सके।

खाना नं0 6
न औरत न मर्द, लक्ष्मी भी ऐसी जिसकी कोई कीमत न देवे या खुसरा मर्द या बांझ औरत ।


शुक्र खाना नं0 1 से 6 तक उठती जवानी में ऐश व इश्क की लहरों से मिटट्ी की पूजना में अन्धा होगा।

खाना नं0 7
सिर्फ साथी का असर, जो और जैसे तुम वह और वैसे ही हम ।


खाना नं0 8
जलती मिटट्ी और हर सुख में नाशुकरा, उत्तम तो भवसागर से पार कर दे।

खाना नं0 9
खुद शुक्र की अपनी बिमारी के ज़रिए धन हानि मगर घर में ऐश व आराम के सामान या धन की कमी न होगी।


खाना नं0 10
खुद सनीचर मगर औरत तो ऐसी जो मर्द को निकाल कर ले जावे, अगर मर्द तो ऐसा कि वह किसी न किसी दूसरी औरत जात को अपनी मन्जूरे नज़र रखा ही करता है।

खाना नं0 11
लट्टू की तरह घूम जाने वाली हालत मगर बचपन की मोह माया की भोली भाली तबीयत की मूरत और रिज़क के चश्मा का निकास।


खाना नं0 12
भवसागर से पार करने वाली गाय, औरत,लक्ष्मी जिसकी खुद अपनी सेहत के ताल्लुक में या सारी ही उम्र रोते निकल गई ।

शुक्र खाना नं0 7 से 12 तक बुढ़ापे में नसीहतें करे।

हेमा मालिनी




यह कुण्डली बालीवुड सुन्दरी हेमा मालिनी जी की है। शुक्र खाना नं0 2, अपनी ही खूबसूरती और तबीयत की आप मालिक, हर एक की दिलदादा औरत मगर वह खुद किसी को पसन्द न करे। अपने वक्त की ड्रीम गर्ल यानि सपनों की रानी जो आज भी लाखों दिलों की धड़कन है।

Tuesday, June 8, 2010

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी जी मुल्क की एक महान शख्सियत थे जिनको आदर से बापू भी कहा जाता था। आज़ादी के बाद उनको बाबा-ए-कौम भी माना गया। यकीनन उनकी जन्म कुण्डली भी खास होनी चाहिए जो इस तरह हैं ।





कुण्डली में 9 में से 7 ग्रह केन्द्र के चारों खानों में । एक मज़बूत कुण्डली किसी गैर मामूली हस्ती की। बृहस्पति खाना न0 7, पिछले जन्म का साधु जो तपस्या के लिए जंगल में नही गया पर अपनी 45 साला उम्र तक कुछ खास नही। मंगल बुध शुक्र खाना नं0 1, पानी मे तैरने वाला पत्थर, राजा की हैसियत का मालिक और शुक्र, शुक्र का पतंग। खाना 10 में चन्द्र ग्रहण, धन दौलत से दूर। सूर्य खाना नं0 12, पराई आग में जल मरने वाला। शनि खाना नं0 2 से सन्यास और केतु खाना नं0 4 से सबर।


गांधी जी ने अपनी 45 साला उम्र के बाद ही अन्दोलन शुरू किये और मुल्क की सियासत को एक नई विचारधारा दी। बृहस्पति की वजह से घर परिवार की बजाय आश्रम में रहने लगे और धर्मी हो गये। शुक्र की वजह से अक्सर औरतों से घिरे रहते थे, जैसे सरला देवी, मीरा बेन, सुशीला नैयर, आभा, मनी गांधी वगैरह - वगैरह । कहा जाता है कि सरला देवी पर तो गांधी जी कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गये थे और उनको भी गांधी जी में गहरी दिलचस्पी हो गई थी। दरअसल इस महान आदमी की ज़िन्दगी के कई पहलू थे जैसा कि कुण्डली में नज़र आता है।


जब गांधी जी की मौत हुई तो उनको 79वां साल चल रहा था। वर्षफल में चन्द्र ग्रहण के इलावा सूरज ग्रहण भी लग गया और राहु के हाथी ने मंगल के महावत को ज़मीन पर पटक दिया। लिहाज़ा पिस्तौल की गोली (राहु) का निशान बन गये। मरते वक्त बापू ने कहा राम ! राम ! राम ।

Tuesday, June 1, 2010

वरूण गांधी

यह कुण्डली गांधी परिवार के दूसरे नौजवान वरूण गांधी की है। उम्र 30 साल हो चुकी है । पहला सवाल, क्या शादी होगी ? दूसरा सवाल, सियासत में क्या मुकाम होगा? दोनों सवालों का जवाब कुण्डली क ग्रहों से मिलेगा।



जन्म: 13-3-1980
खाना नं0 1 और 7 खाली , कुण्डली में न राजा न वज़ीर । किस्मत की बुनियाद का मैदान खाना नं0 10 में सूरज ग्रहण और खाना नं0 2 खाली । बृहस्पति मंगल राहु खाना नं0 4, अब बृहस्पति का सोना भी पीतल। मंगल बद जो पानी में भी आग लगा दे, जिसने कोई बदी न छोड़ी, अपने ही परिवार की औरतों पर मंदा और शनि खाना नं0 5 की बुरी नज़र चन्द्र खाना नं0 9 पर । माता जवानी में बेवा हो गई फिर बेवा दादी मारी गई। बाद में ताई भी बेवा हो गई ।
जहां तक पहला सवाल है, शादी के लिए मंगल बद का उपाय ज़रूरी । जहां तक दूसरा सवाल है, सियासत में तरक्की के लिए ग्रहण का उपाय करना होगा। वर्ना नतीजे कुछ खास न होंगे।

Tuesday, May 25, 2010

वासदेव

वासदेव जी पेशे से इन्जीनियर, एक कम्पनी में आला ओहदे पर काम करते थे। कम्पनी ने उनको विदेश भेजा, जहां उन्होने काफी धन कमाया । जब वापिस वतन लौटे तो दौलत और तजुर्बा दोनो उनके पास थे। उनके मन में अपना कारोबार करने की बात आई। लिहाज़ा सन् 1973 के आस पास नौकरी छोड़कर ऊना में अपनी रबड़ प्लास्टिक की फैक्टरी लगाने में जुट गये। बैंक से कर्ज़ा भी लेना पड़ा । फैक्टरी लग गई और काम शुरू हो गया। खर्चा बहुत हो गया मगर कामयाबी न मिली । बल्कि नुक्सान होने लगा। आखिर फैक्टरी बन्द करनी पड़ी। लाखों रूपए के कर्ज़े की वापसी भी मुश्किल हो गई। अपना भी सब कुछ लगा दिया था। इस तरह अर्श से फर्श पर आ गए।


सन् 1996 में उन्होने अपनी कुण्डली मेरे आगे रख दी। मैने कहा कि आप तो खुद ज्योतिष जानते हैं। लाल किताब आपके पास है। आप पण्डित जी के भी करीब थे। उन्होने कुछ तो बताया होगा । वासदेव जी बोले कि पण्डित जी ने कहा था कि बुध को ठीक कर लो। बुध के उपाय दो-दो तीन-तीन बार कर लिए मगर कोई फायदा न हुआ। मैने कहा कि मंगल से काम लिया होता ।

खैर वासदेव जी ने मंगल के उपाय कर लिये पर कोई फायदा न हुआ। कुछ महीने बाद मैने ऊना जाकर उनकी बन्द फैक्टरी देखी। एक जगह छत में से रोशनी आ रही थी। मैने उनको रोशनी बन्द करवाके दोबारा मंगल के उपाय करने की सलाह दी। दोबारा उपाय करने के कुछ देर बाद फायदा शुरू हो गया। रफता रफता उनके हालात बदलने लगे। बेटी का रिश्ता कैनेडा में हो गया। जिसकी वजह से बेटे भी कैनेडा चले गये। कुछ सालों में सारे कर्ज़े उतर गये। खुद भी दो बार कैनेडा घूम आए । यानि फिर से कुशल मंगल हो गया।

कुण्डली पर गौर करें तो बुध की 34 साला उम्र से मन्दा ज़माना शुरू हुआ जो तकरीबन ग्रहण की मियाद तक जारी रहा । बुध शुक्र शनि, छत से रोशनी मन्दी जिसको हटाया गया। बुध को मंगल से ठीक किया गया। ग्रहण का उपाय भी किया। ग्रहचाल दुरूस्त होने से सब फिर ठीक हो गया।

वासदेव जी सन् 2006 में बा-इज्ज़त दुनिया से कूच कर गए।

Monday, May 17, 2010

राहुल गांधी

                                                                       
राहुल गांधी जी की उम्र 40 साल के आस पास है। पहला सवाल, क्या शादी होगी ? क्योंकि शादी में कुछ देर हो गई है । दूसरा सवाल, क्या मुल्क के प्रधानमन्त्री बनेंगे ? या वहां भी देर हो जायेगी । इन सवालो के जवाब के लिए ग्रहों का जायज़ा लेना पड़ेगा।

सूरज मंगल खाना नं0 1 राजयोग मगर खाना नं0 7 और 10 खाली । खाना नं0 7 का मालिक शुक्र खाना नं0 2 में स्कूल मिस्टरैस हर एक की दिलदादा औरत मगर खुद किसी को पसंद न करे। शनि खाना नं0 11 शराब न पिए तो बेहतर । राहु का हाथी खाना नं0 9 में धर्म की ढोलक अपनी सूंड से बजा रहा है मगर कब तक ? बृहस्पति खाना नं0 5 में खामोश । बुध खाना नं0 12 में ज़हर से भरा हुआ जिसका ज़हरीला असर चन्द्र खाना नं0 6 पर । यह असर 17 या 21 साला उम्र में ज़ाहिर होना था। हां ! 21 साला उम्र के आस पास माता बेवा हो गई । कुण्डली में बुध और राहु दोनों मन्दे।

जहां तक पहला सवाल है, 39 साला उम्र तक शादी में रूकावट। शुक्र की पालना मददगार। जहां तक दूसरा सवाल है बुध का कोई एतबार नही। लिहाज़ा बुध का उपाय ज़रूरी। वर्ना कुछ कहना ठीक न होगा।

Thursday, May 6, 2010

पूर्णिमा

पिछले हफते 12-13 साल बाद पूर्णिमा मिलने आई । मैंने सोचा ग्रहों के बारे कुछ पूछना होगा। मगर उसने ऐसा कुछ न पूछा बल्कि इधर उधर की बातें करने लगी। आखिर मैंने ही पूछ लिया, ज़िन्दगी कैसे चल रही है ? उसने बताया, '' पति का कारोबार बढ़ गया है। दो बेटे हैं जो अब स्कूल जाते हैं। कुल मिलाकर सब ठीक ठाक हैं। आप ने जो उपाय बताया था, कर लेती हूं।'' उसके मन में विश्वास और इज्ज़त की भावना थी। शायद इसलिए मिलने आई।
जब मैनें उसकी कुण्डली देखी थी तो उसका एक ही सवाल था, शादी के बारे में। क्योंकि उम्र 29 साल के करीब हो चुकी थी। 2 साल के फर्क पर छोटी बहन थी। इसलिए मां-बाप को भी चिन्ता थी। पूर्णिमा की कुण्डली इस तरह है।



बृहस्पति, मंगल, केतु खाना नं0 4, क्या भाई लंगड़ा है ? हां । चाचा, बाप का भाई भी लंगड़ा है। शुक्र खाना नं0 6 नीच और मंगल खाना नं0 4 बद, शादी में रूकावट या देरी। पहला उपाय चीनी से भरा बर्तन 6 दिन लगातार धर्म स्थान में रखना। दूसरा उपाय पेशाबगाह को दहीं से धोना।


कुछ दिनो बाद पूर्णिमा ने फोन पर बताया कि उसने पहला उपाय कर लिया और दूसरा शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उसका बाप मुझे उसकी शादी का कार्ड देने आया। मेरा शुक्रिया करने के बाद उसने पूछा, '' अब और कोई उपाय तो नही करना ? '' मैने बताया कि शादी के वक्त उसके सिर पर सोने का जेवर होना चाहिए। यह सब उपाय हो गए थे। अब नतीजा सामने है। लाल किताब की कृपा से पूर्णिमा अब सुखी जीवन बिता रही है।

Tuesday, April 27, 2010

सानिया मिर्ज़ा

खेल जगत में सानिया मिर्ज़ा को कौन नहीं जानता । हाल ही में जब उसकी पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी शोएब मल्लिक से शादी की खबर आई तो वह चर्चा में आ गई । जैसे ही शोएब शादी के लिए हैदराबाद आया तो हैदराबाद की ही एक औरत आयशा ने उसकी पहली बीवी होने का अपना दावा पेश कर दिया। जब शाोएब ने इस बात से इन्कार किया तो आयशा ने पुलिस में शिकायत कर दी। पुलिस भी फौरन हरकत में आ गई और पड़ताल शुरू हो गई । शोएब से उसका पासपोर्ट ले लिया गया। आए तो थे शादी करने, फंस गए हालात की गर्दिश में। खैर मौके की नज़ाकत को देखते हुए शोएब ने आयशा का दावा कबूल कर लिया। समझौते के तहत शोएब को आयशा से तलाक लेना/देना पड़ा। तब कहीं जाकर उसकी शादी सानिया से हो सकी। यह सब बड़ी तेज़ी से हुआ। आखिर ऐसा कियूं  हुआ ? इसके लिए ग्रहों पर नज़र डालनी होगी।


सानिया की कुण्डली में ज्यादतर ग्रह अच्छी हालत के हैं। जिसकी वजह से उसे छोटी उम्र में शोहरत और दौलत हासिल हो गई । जहां तक शादी विवाह की बात है तो शुक्र खाना नं0 10 में सूरज और बुध के साथ बैठा है। अब बुध का खाली चक्र सूरज की मदद लेकर शुक्र को  बर्बाद करेगा। शुक्र और सुरज आपस में दुश्मन हैं। लिहाज़ा 22 साला सूरज की उम्र ता 25 साला शुक्र की उम्र की शादी का कोई एतबार नही होगा। इस साल (24) का वर्षफल बनाया गया। वर्षफल में शुक्र, बुध, सूरज खाना नं0 9 में हैं। केतू खाना नं0 3 से शुक्र बुध को मदद दे रहा है मगर सूरज के खिलाफ है। शनि भी खाना नं0 5 से शुक्र बुध को मदद दे रहा है मगर सूरज के घर में बैठा हुआ सूरज के खिलाफ है। अब सूरज का फल (राज दरबार वगैरह) मन्दा ही होगा। केतु और शनि खाना नं0 11 के चन्द्र के खिलाफ हैं। राहु गृहस्थ के घर खाना नं0 7 में रूकावट डाल रहा है। (पुलिस का महकमा भी राहु से ताल्लुक रखता है) सानिया की शादी तो हो गई मगर मन्दे ग्रहों का उपाय भी लाल किताब के मुताबिक कर लेना चाहिए ताकि यह शादी खुशी की बजाए कहीं गम का बहाना न बन जाए।

Thursday, April 15, 2010

शनि दुश्मन नही दोस्त भी

शनि का ज्रिक्र आते ही दिल में खौफ की लहर सी दौड़ जाती है। ज़िन्दगी के हर मंदे नतीजे को अकसर शनि ग्रह से जोड़ दिया जाता है। पहले तो शनि की साढ़सती की बात होती थी, अब शनि के काल सर्प योग का चर्चा भी आम है। ऐसा लगता है कि जैसे सब बुरे कामों का ठेका शनि ने लिया हो । गोया सब परेशानियां, शनि की मिहरबानियां । तो क्या शनि हमारा दुश्मन है ? इसका जवाब गौरो खोज से मिलेगा।
ज्योतिष में शनि को सांप भी माना गया हैं । सांप का नाम आते ही दिल में डर सा पैदा होने लगता है। हालांकि हर सांप ज़हरीला नही होता। शनि का सांप खज़ाने का रखवाला भी होता है। चन्द्र नगद रूपया तो शनि खजांची है। शनि के सांप के बिना गरीबी का कुत्ताा भौंकता होगा। अगर खाना नं0 3 में शनि कंगाल है तो खाना नं0 9 में मकान जायदाद का मालिक भी है। अगर खाना नं0 6 में शनि खतरनाक ज़हरीला सांप है तो खाना नं0 12 मे साया करने वाला शेषनाग भी है। दूसरे लफज़ों में, दोस्ती और दुश्मनी शनि के दोनों पहलू हैं। दरअसल शनि बद कम बदनाम ज्यादा है।

लाल किताब के फरमान नं0 15 के मुताबिक:-

'' पाप नैया न हर दम चलती, न ही माला ग्रह कुल की,

शनि होता न मुंसिफ दुनिया, बेड़ी गर्क थी सब की'' ।

अगर शनि दुनिया का मुंसिफ न होता तो सब की बेड़ी गर्क हो जाती। मतलब यह कि दुनियावी काम काज़ चलाने के लिये शनि की ज़रूरत है। सन्यास या मकान-जायदाद, चालाकी से धन दौलत कमाने का ज़माना, 36 साला उम्र, शनि की पहचान है।

तमाम मकानों, इन्सान की बिनाई और हरेक की नेकी और बदी का हिसाब किताब लिखने वाले एजेन्टों का मालिक, हाकिम शनि देवता ज़ाहिरा पीर है। इसी लिये कई मन्दिरों में शनि की पूजा होती है। नेक हालत में जब अपने जाती स्वभाव के असूल के मुताबिक नेक असर का हो तो बृहस्पति के घरों (खाना नं0 2,5,9,12) में कभी बुरा असर नही देता। शनि का ऐजण्ट केतु, उम्र की किश्ती का मल्लाह है। बुध के दायरे मे राहु केतु की तरफ से जिस कार्रवाई की लिखत लिखाई हो, शनि उस पर धर्म से फैसला करता है। नेक असर के वक्त शनि इन्सानी उम्र के 10,19, 37 साल में उत्ताम फल देता है। अगर कुंडली में एक दो तीन की तरकीब और दृष्टि के असूल पर पहले घरों में केतु हो और शनि के बाद में तो शनि एक इच्छाधारी तारने वाला सांप होगा। शनि को अगर सांप माना जाये तो उसकी दुम केतु बैठा होने वाले घर में होगी और सर उसका राहु बैठा होने वाले घर में गिना जायेगा। बृहस्पति कायम हो तो शनि एक ठंडा सर सब्ज पहाड़ होगा, खासकर जब चन्द्र भी दुरूस्त हो। बृहस्पति के घराें में शनि का असर वैद धन्वतरि की हैसियत का उम्दा होगा। हामला औरत, इकलौते या खानदान में अकेले लड़के के सामने शनि का सांप खुद अन्धा होगा और डंक न मारेगा।

मंदी हालत के वक्त मौत का फन्दा फैलाये दिन दिहाड़े सब के सामने सरे बाज़ार कत्ल करने की तरह मंदा ज़माना खड़ा कर देगा। फकीर को खैरात देने की बजाये उल्ट उसकी झोली में माल निकाल लेगा। सब से धन की चोरी करता कराता फिर भी निर्धन ही होगा। हरेक के आगे सवाली फिर उसी पर चोट मार देना इसका काम होगा। मंदी हालत में शनि का एजेंट राहु होगा जो ज़हर का भण्डारी है।

दो या दो से ज्याद नर ग्रहों (बृहस्पति,सूरज, मंगल) के साथ शनि काबू में हो जाता है और ज़हर नही उगल सकता। जिस कदर मुकाबले पर दुश्मन ग्रहों (सूरज, चन्द्र, मंगल) का साथ बढ़ता जाये शनि और भी मन्दा हो जाता है। मंदी हालत में शनि की चीज़ों का दान मददगार होगा।

बृहस्पति के घराें में शनि बुरा फल नही देता मगर बृहस्पति खुद शनि के घर खाना नं.0 10 में नीच हो जाता है। मंगल अकेला शनि के घर खाना नं0 10 में राजा है मगर मंगल के घर खाना नं0 3 में शनि नगद माया से दूर कंगाल हो जाता है। सूरज के घर खाना नं0 5 में शनि बच्चे खाने वाला सांप है मगर शनि के घर खाना नं0 11 में सूरज उत्ताम, धर्मी हो जाता है। चन्द्र के घर खाना नं0 4 में शनि पानी में डूबा हुआ सांप जो अधरंग से मरे हुये को शफ़ा (सेहत) दे मगर शनि के हैडक्वाटर खाना नं0 8 में, जो मंगल की मौतों का घर है, चन्द्र नीच हो जाता है। शुक्र ने शनि से आंख उधार ली है इसलिये शुक्र घर खाना नं0 7 में शनि उच्च है। राहु बदी का एजेण्ट है मगर राहु के घर खाना नं0 12 में शनि हरेक का भला ही करता है। केतु नेकी का फरिशता है मगर केतु के घर खाना नं0 6 में शनि मन्दे लड़के और खोटे पैसे की तरह कभी न कभी काम काम आ ही जाने वाला मगर मन्दा ज़हरीला सांप होता है। इस तरह कुण्डली के जुदा जुदा खानों मे शनि का जुदा जुदा अच्छा या बुरा फल होता है।

शनि की अदालत

लाल किताब के मुताबिक राहु अगर मुल्ज़िम का चालान पेश करने का शहादती हो तो केतु उसके बचाने के लिये मददगार वकील होगा। दोनों के दरमियान बात का धर्मी फैसला करने के लिये शनि हाकिम, वक्त की कचहरी का सब से बड़ा जज होगा। पापी ग्रहों (राहु, केतु, शनि ) ने दुनियावी पापियों गुनाहगारों को सीधे रास्ते पर लाने और गृहस्थी निज़ाम को कायम रखने के लिये अपनी ही पंचायत बना रखी है। इस बात के मद्दे नज़र रखते हुये ज़माने के गुरू और तमाम ग्रहों को पेशवा बृहस्पति ने शनि के घर खाना नं0 11 में अपनी धर्म अदालत मुकर्रर की है। जहां शनि अपनी माता के दूध को याद करके, बृहस्पति का हल्फ उठाने के बाद राहु और केतु की की शहादत के मुताबिक फैसला करता है।

शनि खुद बुराई नही करता बल्कि उसके एजेण्ट राहु केतु बुराई वाले काम उसके पास फैसले के लिये लाते हैं। लिहाज़ा बुरो कामों के (बुरे) फैंसले करते करते शनि खुद बदनाम हो गया। लोग बदनाम को ही बुरा कहते हैं । अगर दुनिया में पाप न हो तो राहु कोई चालान पेश न करेगा। कर भी दे तो केतु की मदद से शनि का फैसला हक में होगा। फिर शनि को कोई बुरा भी न कहेगा।

आखिर नतीजा यही निकलता है कि शनि दुश्मन नही दोस्त भी है।

Sunday, April 4, 2010

राहु-केतु

लाल किताब के मुताबिक राहु केतु दोनों पापी ग्रह हैं । राहु खुफिया पाप तो केतु ज़ाहिरा पाप है। सूरज डूबने के बाद शाम मगर शनि की रात शुरू होने से पहले का वक्त राहु और रात खत्म होने के बाद सुबह मगर सूरज निकलने से पहले का वक्त केतु है। राहु सिर का साया तो केतु सिर के बिना धड़ (जिस्म) का साया है। लेकिन इन्सानी जिस्म में नाभि के ऊपर सिर की तरफ का हिस्सा राहु का राज्य और नाभि के नीचे पांव की तरफ के हिस्से पर केतु का राज होगा। राहु कुंडली के खाना नं0 12 में आसमानी हद बृहस्पाति के साथ मुकर्र हुआ तो केतु खाना नं0 6 पाताल के बुध का साथी हुआ। दोनों की मुश्तरका बैठक कुंडली का खाना नं0 2 है। दोनों के बाहम मिलने की जगह शारा आम यानि जिस जगह दो तरफ से आकर रास्ता बन्द हो जाता हो, वहां दोनों ग्रहों का ज़रूर मंदा असर या दोनों मन्दे या पाप की वारदातें या नाहक तोहमत और बदनामी के वाक्यात या ग्रहस्थी के बेगुनाह धक्के लग रहे होंगे। लाल किताब के मुताबिक:-

'' केतु कुत्ता हो पापी घड़ी का, चाबी राहु जा बनता हो।

चन्द्र सूरज से भेद हो खुलता, ज़ेर शनि दो होता हो ॥''

राहु केतु हमेशा बुध (घड़ी) के दायरे में घूमते हैं। अगर यह देखना हो कि राहु कैसा है तो चन्द्र का उपाय करें यानि खालिस चांदी का टुकड़ा अपने पास रखें और केतु की नीयत का पता लगाने के लिये सूरज का उपायें करें यानि सुर्ख तांबा अपने पास रखें । इस तरह दोनों ग्रहों का दिली पाप खुद व खुद पकड़ा जायेगा। यानि उस ग्रह के ताल्लुक के वाक्यात होने लगेगें। राहु और केतु में से अगर कोई भी खाना नं0 8 में हो तो शनि भी उस वक्त खाना नं0 8 में गिना जायेगा। यानि जैसा शनि वैसा ही फैसला समझा जायेगा। अगर राहु केतु दोनों खराब असर करना शुरू कर दें तो राहु 42 साल और केतु 48 साल तक और दोनो मुश्तरका 45 साल का मन्दा असर कर सकतें हैं। कुंडली में सूरज राहु मुश्तरका से सूरज ग्रहण और चन्द्र केतु मुश्तरका से चन्द्र ग्रहण होगा। लिहाज़ा ग्रहण से राहु केतु के मन्दे असर का ज़माना लम्बा हो सकता है। जिसके लिये ग्रहण के वक्त और वैसे भी पापी ग्रहों की चीज़ें (नारियल वगैरह) चलते पानी (दरिया या नदी) में बहाते रहना मददगार होगा।

राहु:- रहनुमाए गरीबां मुसाफिरां ।

मस्त हाथी ज़िन्दा (नीच) कीमत एक लाख, मुर्दा (उच्च) सवा लाख ।

दुनियां के फर्ज़ी अन्देशे की सोच विचार और जागते हुये ही इन्सानी दिमाग में ख्वाबी लहर और क्यासी ख्यालात की नकल व हरकत का 42 साला उम्र का ज़माना राहु का अहद है। सब कुछ होते हुये कुछ भी न होना राहु शरीफ़ की असलियत है। दिमागी लहर का मालिक सब दुश्मनों से बचाव और उनका नाश करने वाला माना गया है। उत्ताम असर के वक्त चोट लगने से नीला रंग हो चुके जिस्म को फूंक से ही तन्दरूस्त करने वाला मानिंद हाथी मगर सफेद रंग का । राहु जिसकी मदद पर हो जाये कुल दुनिया का सिर उसके सामने झुक जाये। कुंडली में अगर मंगल शनि मुश्तरका या राहु अकेला खाना नं0 4 में या चन्द्र उत्ताम हो या मंगल खाना नं0 12 में हो तो राहु मन्दा असर न देगा। अगर राहु कुण्डली में शनि के बाद के घरों में बैठा हो तो शनि से हुकम लेकर काम करेगा। लेकिन जब शनि से पहले घरों में हो तो खुद हाकिम होगा और शनि को हुक्म देगा।

राहु मन्दे के वक्त इसका मन्दा असर राहु की कुल मियाद 42 साला उम्र के पूरा होने पर दूर होगा। फालतू धन दौलत, दुनियावी आराम व बरकत 42 के बाद फौरन बहाल हाेंगे। कड़कती हुई बिजली, भूचाल, आतिशी खेज़ मादा पाप की एजेन्सी में बदी का मालिक हर मन्दे काम में मौत का बहाना घड़ने वाली ताकत, ठगी, चोरी और अयारी का सरगना चोट मारके नीला रंग कर देने वाली गैबी लहर का नामी फ़रिशता कभी छिपा नही रहता। कुंडली में सूरज शुक्र मुश्तरका होंतो राहु अमूमन मन्दा असर देगा। अगर सूरज शनि मुश्तरका और मन्दे हों तो राहु नीच फल बल्कि मंगल भी मंगल बद ही होगा। अगर केतु पहले घरों में और राहु बाद के घरों में हो तो राहु का असर मन्दा और केतु सिफर होगा। अगर राहु अपने दुश्मन ग्रहों (सूरज, शुक्र, मंगल) को साथ लेकर केतु को देखे तो नर औलाद, केतु की चीज़ें, कारोबार या रिश्तेदार मतल्का केतु बर्बाद होंगे। सूरज की दृष्टि या साथ से राहु का असर न सिर्फ बैठा होने वाले घर पर मन्दा होगा बल्कि साथ लगता हुआ घर भी बर्बाद होगा। मन्दे राहु के वक्त दक्षिण के दरवाज़े का साथ न सिफ माली नुक्सान देगा बल्कि इसका ताकतवार हाथी भी मामली चींटी से मर जायेगा। मन्दे राहु के वक्त यानि जब बुखार, दुनियावी दुश्मन या अचानक उलझन पर उलझन खड़ी होती जाये तो:-

1. चांदी का उपाये मददगार जब दिल की शांति बरबाद हो रही हो।

2. मसूर की दाल सुर्ख रंग दली हुई, भंगी को सुबह देवें या वैसे ही भंगी को पैसे की खैरात करते रहें।

3. मरीज के वज़न के बराबर जौं (अनाज, कनक) चलते पानी में बहा देवें।

4. जौं रात को सिरहाने रखकर सुबह जानवरों या गरीबों में तकसीम करदें।

5. राज दरबार या व्यापार के आये दिन झगड़े और नुकसानों के वक्त अपने जिस्म के वज़न के बराबर कच्चे कोयले दरिया में बहाना मदद देगा।

केतु:- दरवेश आकबत अन्देश

दुनिया की आवाज़ दरगाह में पहुंचाने वाला दरवेश कुत्ता,

मौत के यम की आमद पहले बताये।

दुनियावी कारोबार के हल करने के लिये इधर उधर सलाह मशवरे के लिये दौड़ धूप का 48 साला उम्र का ज़माना केतु का दौर दौरा है। ज़र्द बृहस्पति, सुर्ख मंगल, अण्डे का रंग बुध तीनों ग्रहों का मजमुआ केतु तीनो ही ज़मानों का मालिक होगा। जान से मारने की बजाये आखिर कब्र तक (चारपाई, तख्ता) मदद होगा। केतु नेकी का फरिशता, सफर का मलिक और आखीर तक मदद देने वाला ग्रह है। केतु से मुराद सफेद व काला दो रंगा कुत्ता है। कुत्तिया का नर बच्चा जो एक ही पैदा हुआ हो, खानदानी नस्ल कायम कर जायेगा।

1. मन्दे केतु के वक्त अपनी कमज़ोरी दूसरों को बताना, दूसरों के आगे रोना और भी मन्दी मुसीबत देगा। बृहस्पति का उपाय मददगार होगा।

2. मन्दी सेहत के वक्त चन्द्र का उपाय मददगार मगर लड़का मन्दा हो तो धर्म स्थान में काला व सफेद कम्बल देना मुबारक होगा।

3. पांव या पेशाब की तकलीफ के वक्त पांवों के दोनों अगूंठों में खालिस रेशम का सफेद धागा बांधना या चांदी छल्ला डालना मददगार साबित होगा।

4. केतु की चारपाई भी मानी गई है। मगर ग्रहचाल में चूंकि केतु को शुक्र का फल माना है इसलिये चारपाई दरअसल वह जो शादी के वक्त दहेज में मामा या माता पिता की तरफ से लड़की को बतौर दान दी गई हो। ऐसी चारपाई को औलाद की पैदायश के लिये इस्तेमाल करना उत्ताम फल देगा चाहे केतु कुंडली में कितना भी नीच मन्दा या बर्बाद ही क्यों न हो। जब तक वह चारपाई घर में मौजूद और इस्तेमाल में रहे, केतु का फल कभी मन्दा ना होगा।

5. मन्दी हालत में केतु दुनिया का धोखेबाज छलावा होगा। जब तक बुध अच्छा, केतु बर्बाद ही होगा। केतु का मकान, बच्चे व औरत जात की हालत मन्दी ही रखेगा। बृहस्पति या सूरज जब दुश्मन ग्रहों से खुद ही मर रहे हों तो केतु बर्बाद होगा। केतु मन्दे के वक्त खासकर जब कुंडली में चन्द्र और शुक्र इकट्ठे हो रहे हों तो बच्चे का जिस्म सूखने लग जाता है। ऐसे वक्त में बच्चे के जिस्म पर दरिया, नदी, नाले की मिट्टी, मुलतानी मिट्टी या गाचनी मलकर खुश्क होने दें। जब कुछ अर्सा हो जाये तो बच्चे को मौसम के मुताबिक सर्द या गर्म पानी से नहलाकर साफ कर देवें। ऐसा 40-43 दिन लगातार करने से जिस्म का सूखना ठीक हो जायेगा।

Friday, March 26, 2010

ऋण पितरी

ऋण पितरी से मुराद कुण्डली वाले पर उसके अपने बज़ुर्गों के पाप का खुफिया असर होता है । यानि गुनाह तो कोई करे मगर सज़ा उसकी कोई और भुगते मगर भुगतेगा उस गुनाह करने वाले का असल करीबी ताल्लुकदार ही ।
'' घर 9वें हो ग्रह कोई बैठा, बुध बैठा जड़ साथी जो।
ऋण पितरी उस घर से होगा, असर ग्रह सब निष्फल हो।

साथी ग्रह जब जड़ कोई काटे, दृष्टि मगर वह छुपता हो।

5 ,12, 2, 9, कोई मन्दे, ऋण पितरी बन जाता हो ॥''

जन्म कुण्डली में जिस ग्रह की जड़ (उसकी अपनी राशि) में उसका दुश्मन ग्रह बैठकर उसका फल रद्दी कर रहा हो और साथ ही वह ग्रह खुद भी मन्दा हो रहा हो तो ऋण पितरी होगा । जिसकी आम निशानी यह होगी कि बाबे, बाप, बेटे, भाई वगैरह सब के सब या कई एक की जन्म कुण्डलियों में मन्दा ग्रह एक ही या ऐसे किसी दूसरे घर में जहां कि वह ग्रह पूरा मन्दा गिना जा रहा हो, ज़ाहिर होता चला आ रहा होगा। मसलन् राहु नम्बर 11 या सनीचर 4, 6 या बुध 2 , 3, 8, 11, 12 उस खानदान में कई एक ही जन्म कुण्डलियों में ज़ाहिर होता चला आ रहा होगा।


दर असल यह हालत खाना नम्बर 9 के ग्रहों से मुराद होती है । यानि जब उस घर के मालिक ग्रह यानि बृहस्पति के किसी दूसरे घर में कोई और ग्रह एक या एक से ज्यादा बैठे हुये बाहम दुश्मनी पर हों या वह बाहम या हर एक बृहस्पति की ताकत को खराब करते या बृहस्पति के असर में ज़हर मिलाते हों तो पितरी ऋण होगा। राहु को बृहस्पति चुप कराने वाला गिना है । वह अगर बृहस्पति का मुंह बन्द करके खुद मन्दी हालत का असर बृहस्पति के ताल्लुक से यानि या तो बृहस्पति के घरों में या बृहस्पति के पक्के घर में देवे तो भी पितरी ऋण का बोझ होगा। इसी तरह ही और ग्रह भी यानि चन्द्र की खराबी में माता तरफ के मातरी ऋण वगैरह का बहाना हो सकते है, ऐसे शख्स के (कुण्डली वाले के) अपने ग्रह चाहे लाख राजयोग ही क्यों न हों । बुरा असर दो ग्रहों का ही होगा और उपाये भी दो ही ग्रहों का करना होगा । जैसे कुण्डली वाले के बाप ने बिना वजह कुत्तो मारे या मरवाये तो उस पर बृहस्पति और केतु दो ही ग्रहों का पितरी ऋण होगा। जो कुण्डली वाले पर उसकी 16 से 24 साल उम्र तक या बालिग होने की उम्र से 16 से 24 साल तक रह सकता है ।


इसी तरह ही बाकी सब ग्रहों का उपाये होगा। यानि एक तो उस ग्रह का उपाये करेंगे जो खुद निकम्मा हो गया हो और दूसरा उस ग्रह का उपाय करेंगे जो उसकी जड़ की राशि (जो उसके लिए बाहैसियत मालकियत ग्रह मुकर्र हो) में बैठकर उसको निकम्मा कर रहा हो ।


मसलन् बृहस्पति खाना नम्बर 9 में बैठा हो और राहु नम्बर 11 में बैठ जावे तो एक उपाये राहु नम्बर 11 की मन्दी हालत का करेंगे और दूसरा बृहस्पति नम्बर 9 के बरबाद का मददगार होगा। मियाद उपाये अब 40-43 दिन की बजाये 40-43 हफते लगातार होगी जो तमाम खानदान की बेहतरी के लिए होगा। एक वक्त में दो उपाये करने ठीक न होंगे। इसलिए पहले एक उपाये करें फिर कुछ हफते छोड़कर दूसरा उपाये करें । ऋण पितरी के वक्त खुद उस ग्रह का जो मन्दा हो गया हो और जिस ग्रह ने जड़ राशि से बरबाद किया हो, दोनो का ही उपाये और दोनो ही की मियाद तक करना मददगार होगा।


ऋणों की किस्में


जैसी करनी वैसी भरनी । नहीं की तूने तो करके देख ।


1. बृहस्पति: पितरी ऋण : खाना नम्बर 2, 5, 9, 12 में शुक्र, बुध, राहु।

पाप की वजह: बज़ुर्गों का पाप । खानदानी कुल पुरोहित से बदल गया होगा। चाहे बावजह लावल्दी खानदान कुल पुरोहित ।

आम निशानी: हमसाया धर्म मन्दिर या बृहस्पति की अशिया पीपल वगैरह को तबाह बरबाद ही कर चुके या करते होंगे ।


2 सूरज: जाती (अपना) ऋण : खाना नम्बर 5 में शुक्र या पापी ।
पाप की वजह : अन्त खराब । नास्तिकपन, पुरानी रस्मों पर पेशाब की धार मारने के कौल का आदमी होना । आम निशानी: उस घर में ज़मीन के नीचे अग्नि कुण्ड आम होंगे या आसमान की तरफ से छत में से रोशनी के रास्ते आम होंगे।
 3 चन्द्र : मातरी ऋण : खाना नम्बर 4 में केतु।

पाप की वजह: माता नीयत बद। अपनी औलाद पैदा होने के बाद अपनी माता को दर बदर जुदा या दुखी करना या उसके दुखी हो जाने पर लापरवाही करना ।

आम निशानी: हमसाया कुंआ, नदी, नाला पूजने की बजाये घर की गन्दगी बहाने या

जमा करने का ज़रिया बनाया जा रहा होगा।
4 शुक्र: स्त्री ऋण : खाना नम्बर 2, 7 में सूरज, चन्द्र, राहु ।

पाप की वजह : कुटुम्बी पेट मार । औरत को बच्चा जनने की हालत में किसी लालच की वजह से जान से खत्म कर देना ।

आम निशानी: उस घर में गाय को पालना या अपने घर में रखने से खानदानी नफरत का असूल चलता होगा।


5 मंगल : रिश्तेदारी का ऋण : खाना नम्बर 1, 8 में बुध केतु ।
पाप की वजह : मित्र मार । ज़हर के वाक्यात करना या किसी की पकी पकाई खेती को आग लगा देना या किसी की भैंस आखीर बच्चा देने को आई, उसको मरवा दिया या मार देना । मकान बनाने पर आग लगा देना वगैरह ।आम निशानी : रिश्तेदारों के मिलने बरतने के असूल से नफरत या बच्चों की पैदायश और गृहस्थिी दिन त्यौहार के वक्त खुशी मनाने से गुरेज़ (दूर रहना या नफरत करना) होगा।


6 बुध: बेटी बहन का ऋण : खाना नम्बर 3, 6 में चन्द्र ।
पाप की वजह : ज़ुबानी धोखा । किसी की बेटी बहन की हत्या (हद से ज्यादा ज़ुल्म करना)।

आम निशानी : मासूम कम उम्र या गुमराह बच्चों  को फरोखत करना या उनका लालच में तबादला कर जायज़ कर लेना ऐसे ढंग पर जिसका आम दुनियादारों को भेद न खुल सके।



7 सनीचर (शनि) : ज़ालिमाना ऋण : खाना नम्बर 10, 11 में सूरज चन्द्र मंगल ।

पाप की वजह : जीव हत्या । मकान (शनि के मतल्लका अशिया) धोखे से ले लेना मगर उसकी कीमत किसी तरह भी अदा न करना ।

आम निशानी: घर के मकानों का बड़ा रास्ता अमूमन दक्षिण में होगा या लावल्दो से जगह लेकर मकान बनाया होगा या रास्ता व कुआं छतकर मकान बनायें होंगे।



8 राहु: अनजन्मे का ऋण : खाना नम्बर 12 में सूरज शुक्र मंगल ।

पाप की वजह : ससुराल या बाहमी दुनियावी ताल्लुकदारोें से धोखा फरेब या दगा के वाक्यात ऐसे ढंग पर किए हों कि दूसरे की कुल गर्क हो जावे ।

आम निशानी : घर से बाहर निकलते हुए दरवाज़े की दहलीज़ के नीचे से घर का गन्दा पानी बाहर निकलने के लिए नाली चलती होगी या दक्षिण की दीवार के साथ उजाड़, वीरान कब्रिस्तान या भड़भूंजे की भट्ठी होगी।

9 केतु: दरगाही (कुदरती)ऋण खाना नम्बर 6 में चन्द्र मंगल ।पाप की वजह: कुत्ता फकीर बदचलनी, बदफैली मगर ऐसे ढंग पर कि दूसरे की गरीब कुत्तो की तरह हद से ज्यादा दुर्दशा या तबाही हो जावे और ऐसी कारवाई में नीयत बद की बुनियाद होवे ।

आम निशानी: दूसरों की नर औलाद किसी न किसी खुफिया, गुमनाम बहाने से जाया (खत्म) करवाना । कुत्तों  को बिना वजह गोली से मरवाना या केतु की दूसरी मतल्लका अशिया या रिश्तेदारों की अपनी लालच की वजह से कुल नष्ट करवाना या करना, हर हालत में नीयत बद बुनियाद गिनते हैं ।


ऋण पितरी की पहली हालत:
जब बुध जड़ में बैठा हो :-बृहस्पति हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 12 में ।

सूरज हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 5 में ।

चन्द्र हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 4 में ।

शुक्र हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 2, 7 में ।

मंगल हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 1, 8 में ।

सनीचार हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 10,11 में ।

राहु हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 12 में ।
केतु हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 6 में ।

ऋण पितरी की दूसरी हालत :
जब ग्रह मतल्लका की जड़ में उसका दुश्मन बैठा हो:-बृहस्पति खाना नम्बर 2, 3, 5, 6, 9, 12 से बाहर कहीं भी हो और नम्बर 2 में सनीचर बाहैसियत पापी ग्रह या नम्बर 5 में शुक्र या नम्बर 9 में बुध या नम्बर 12 में राहु या नम्बर 3, 6 बुध शुक्र या सनीचर बाहैसियत पापी ।

सूरज खाना नम्बर 1, 11 से बाहर और नम्बर 5 में शुक्र या पापी ।

चन्द्र खाना नम्बर 4 से बाहर और नम्बर 4 में शुक्र बुध सनीचर ।

शुक्र खाना नम्बर 1, 8 से बाहर और नम्बर 2, 7 में सूरज चन्द्र राहु ।

मंगल खाना नम्बर 7 से बाहर और नम्बर 1, 8 में बुध केतु ।

बुध खाना नम्बर 2, 12 से बाहर और नम्बर 3, 6 में चन्द्र ।

शनि खाना नम्बर 3, 4 से बाहर और नम्बर 10, 11 में सूरज चन्द्र मंगल ।राहु खाना नम्बर 6 से बाहर और नम्बर 12 में सूरज शुक्र मंगल । केतु खाना नम्बर 2 से बाहर और नम्बर 6 में चन्द्र मंगल ।


जन्म कुण्डली के मुताबिक ऊपर ज़िक्र की गई हर हालत में खाना नम्बर 2 ,5, 9, 12 की मन्दी हालत भी साथ हो तो ऋण पितरी होगा। ऋण पितरी हमेशा जन्म कुण्डली से देखा जायेगा।

ऋण पितरी के उपाये:


ऐसा पाप जो किया तो था बज़ुर्गों ने इसका हर्जाना भरना पड़ा मौजूदा पुश्त को । इसलिए ऐसे उपाये के वक्त तमाम का तमाम खानदान यहां तक खून का ताल्लुक हो, सबको इस उपाये में हिस्सा डालना मददगार बल्कि ज़रूरी होगा। अगर किसी वजह से कोई रिश्तेदार उपाये में शामिल न हो सके तो उसका हिस्सा दस गुणा डाल देना होगा।


बृहस्पति: कुल खानदान के हर एक सदस्य, जहां तक खून का असर हो, सबसे एक रूपया पैसा लेकर धर्म मन्दिर में एक ही दिन देना ।


सूरज: कुल खानदान के हर सदस्य से बराबर हिस्सा लेकर यज्ञ करना ।


चन्द्र: कुल खानादान के हर सदस्य से बराबर हिस्से की चांदी लेकर दरिया में एक ही दिन बहा दी जाये।


शुक्र: सौ गाय को जो अंगहीन न हो, कुल खानदान के सदस्यों के बराबर बराबर खर्च पर एक ही दिन भोजन वगैरह खिलाया जाये।


मंगल: कुल खानदान के हर सदस्य से रूपया पैसा लेकर अपने गांव में या घर के पास शनि के मुतल्लका काम करने वाले को देना ।


बुध: कुल खानदान के हर सदस्य से एक एक ज़र्द कोड़ी लेकर एक ही जगह इकट्ठी करके जलाकर उसकी राख को उसी दिन दरिया बहा दें ।


शनि: सौ अलग-अलग जगह की मछलियों को एक ही दिन में कुल खानदान के सदस्यों के खर्च से खाना देवें ।


राहु: कुल खानदान के सदस्यों से एक एक नारियल लेकर एक जगह इकट्ठे करके एक ही दिन दरिया में बहा दें ।


केतु: सौ कुतों  को एक ही दिन में कुल खानदान के सदस्यों के खर्च से खाना खिलायें । जन्म कुण्डली में ऋण पितरी देखने की ज़रूरत बहुत कम पड़ेगी । क्योंकि ऐसा प्राणी जो सालों साल लगातार मन्दा ज़माना देखता आ रहो हो भलां कब तक अपनी ज़िन्दगी कायम रख सकता है ।

Friday, March 19, 2010

ग्रहों के उपाये

ज्योतिष में जब ग्रहों के उपायों की बात होगी तो लाल किताब का नाम सबसे पहले आयेगा। कुंडली में ग्रहों की नेक या मन्दी हालत के मुताबक ही आदमी पर अच्छा या बुरा असर होता है। ग्रहों के बुरे असर से बचने और अच्छे असर को बरकरार रखने के लिये लाल किताब में उपायों का तफसील से ज़िक्र किया गया है।

लेकिन सवाल यह है, ''क्या उपाये से कोई फायदा हो सकता है?'' रात को बिजली से रोशनी करना, बिमारी को दूर करने के लिये दवा लेना, मौसम के मुताबक सर्द गर्म कपड़े पहनना..............यह सब उपाये नही तो क्या है ? दरअसल ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिये इन्सान लगातार उपाये कर रहा है । कुंडली की ग्रहचाल को दरूस्त करने के लिये लाल किताब के उपाये लाजवाब है। इन उपायों की चार किस्मों में रखा जा सकता है।

पहली किस्म के आम उपाये हैं जो मदद के लिये सभी कर सकते हैं । जैसे दुनियावी सुख के लिये गऊ ग्रास देना, परेशानी से बचने के लिये नारियल दरिया में बहाना, बिमारी से बचने के लिये हलवा कद्दू धर्मस्थान में देना । अचानक चोट या नुकसान से बचने के लिये सिगरेट से परहेज करना वगैरह।

दूसरी किस्म के उपाये कुंडली में मन्दे ग्रह की हालत के मुताबिक हैं। यानि कुंडली में देखना होगा कौन सा ग्रह किस खाने में बुरा असर दे रहा है। उसका उपाये लाल किताब के मुताबिक ही होगा। जैसे राहु खाना नं. 8 के लिए सिक्का दरिया में बहाने से, मंगल खाना नं. 8 के लिये बेवा की दुआ से, बुध खाना नं. 8 के लिये नाक छेदन से, शनि खाना नं. 6 के लिये तेल की कुन्जी पानी के नीचे तह ज़मीन में दबाने से, शनि खाना नं.1 के लिये सुर्मा ज़मीन में दबाने से फायदा होगा।

तीसरी किस्म में आते हैं फौरन उपाये। जब किसी मन्दे ग्रह का कोई उपाये काम न करे तो कुछ घण्टों के अन्दर अन्दर फैसले के लिये उसका फौरन उपाये करना होगा। जैसे सूरज के लिये गुड़, मंगल के लिये रेवड़ियां, बुध के लिये तांबे का पैसा, राहू के लिये कोयला दरिया में बहाना मददगार होगा।

चौथी किस्म में ऋण पित्री के उपाये आते हैं । इनकी ज़रूरत बहुत कम पड़ेगी । ऋण पित्री से मुराद कुण्डली वाले पर अपने बज़ुर्गों के पाप का खुफिया असर होता है। यानि गुनाह तो कोई करे मगर उसकी सज़ा कोई और भुगते। मगर भुगतेगा उस गुनाह को करने वाले का असल करीबी ताल्लुकदार ही। जैसी करनी वैसी भरनी। कुंडली में जो ग्रह खाना नं. 9 में बैठा हो, उसकी जड़ में बुध बैठ जाये या किसी ग्रह की जड़ में दुश्मन ग्रह बैठ जाये और साथ में वो खुद भी किसी दूसरे खाने में मन्दा हो जाये तो कुंडली पर बज़ुर्गों के पाप का बोझ होगा। जिसका उपाये जुदा जुदा हालत में जुदा जुदा होगा। जो खानदान के सब मैंम्बरों को साथ लेकर करना पड़ेगा।
आम तौर पर उपाये की मियाद कम से कम 40 दिन और ज्यादा 43 दिन लगातार होगी। मगर खानदान की बेहतरी के उपाये की मियाद लगातार की बजाये हफतावार होगी।

लाल किताब उर्दू ज़बान में गैबी ताकत से लिखी गई थी। जिसको समझने के लिये सोच भी गैबी चाहिये। यह किताब गागर में सागर समेटे हुये हैं। फरमान नं. 6 के मुताबिक शक्की हालत के ग्रह के बुरे असर से बचने के लिये शक्क का फायदा उठाया जा सकता है। मगर पक्की हालत के ग्रह का असर हमेशा के लिये मुकर्रर हो चुका है और उसके बुरे असर को तबदील करना इन्सानी ताकत से बाहर होगा। सिर्फ खास खास खुदा रसीदा और महदूद हस्तियां ही रेख में मेख लगा सकती हैं। लेकिन इसका भी कोई न कोई तबादला दिया गया । मन्दी ग्रह चाल को दरूस्त करके फायदा लिया जा सकता है। मगर यह दरूस्ती सबके बस की बात न होगी।

काबलियत और कोशिश के बावजूद अगर नतीजा हक में न आये या बिना वजह जहमत गले लगी रहे तो मदद के लिये कुंडली में किस्मत के ग्रह की तलाश करनी होगी। जो ग्रह रूकावट डाले उसका उपाये करना होगा तांकि ज़िन्दगी को बेहतर बनाया जा सके।

Friday, March 12, 2010

सफर का हुक्मनामा

कोई ज़माना था जब हिन्दुस्तान को सोने की चिड़िया कहा जाता था। 11वीं सदी में दूसरे मुल्कों के लोग सोने की खातिर यहां आने लगे। पहले मुसलमान, मुगल, पठान फिर अंग्रेज़ आए जिन्होने मुल्क पर सालों तक हुकुमत (राज) भी की। इसी दौरान कुछ लुटेरे जैसे महमूद गज़नवी, मुहम्मद गौरी, नादिर शाह, अहमदशाह अब्दाली वगैरह भी आए जिन्हों ने   इस मुल्क खूब लूटा और बेशुमार धन दौलत ले गए। मुल्क की आज़ादी के बाद बीसवीं सदी में हिन्दुस्तानी धन दौलत कमाने के लिए दूसरे मुल्कों में जाने लगे। आज अमरीका, कैनेडा, आस्ट्रेलिया जाने के लिए नौजवानों में बहुत जोश है। इसी बीच नौजवानों को दूसरे मूल्कों को भेजने के नाम पर ऐजण्टों ने ठग्गी भी शुरू कर दी है । इसलिए ग्रहों को देख लेना ज़रूरी होगा कि क्या किस्मत में दूसरे मुल्क का सफर है भी या नही?
दरियाई सफर का मालिक चन्द्र, हवाई सफर का मालिक बृहस्पति और खुश्की के सफर का निगरां (देखने वाला) शुक्र मगर सब ही सफरों का हुक्मनामा जारी करने वाला ग्रह केतु होगा। इसलिए हर एक किस्म के जुदा-जुदा सफर के लिए ग्रह मतल्लका (सम्बन्धित ) का भी ख्याल रखना होगा।



चन्द्र से सफर
1 चन्द्र को सफेद रंग घोड़ा तसव्वुर (ख्याल) किया है जो दर असल दरियाई या समुन्द्री कहलाता है और समुन्द्र पर चांद का चांदनी की तरह दम के दम में फिर आता है । मगर खुश्की या शुक्र के घर से दुश्मनी करता है और ठोकरें मारता है।
2 जब चन्द्र से शुक्र का ताल्लुक (सम्बन्ध) हो जावे तो खुश्की या शुक्र के ताल्लुक के सफर अमूमन हाेंगे या चन्द्र को खुश्की का चक्र लगा रहेगा। चन्द्र खुद हमेशा सफर में रहता है और शुक्र तो दुश्मनी नही करता मगर चन्द्र ही दुश्मनी करता है। इसलिए चन्द्र का सफर खुद अपने लिए कभी नुक्सान वाला न होगा मगर सफर ज़रूर दरपेश रहेगा यानि करना पड़ेगा और अमूमन खुश्की का होगा।

3  ज़रूरी सफर, जब चन्द्र का सूरज या बृहस्पति से ताल्लुक होवे तो ऐसा सफर समुन्द्र पार,राज दरबार के काम से होगा। अगर बुध से ताल्लुक हो जावे तो तिजारती (व्यापारक) या कारोबारी सफर होगा।

सौ दिन तक की मियाद का सफर कोई सफर नही गिना जाता। नीचे दी गई हालतों में किया गया सफर मन्दे नतीजे देगा :-



वर्षफल के हिसाब से जब चन्द्र या केतु अच्छे घरों में हो या केतु पहले घरों में हो और चन्द्र होवे केतु के बाद वाले (साथी दीवार) घर में तो सफर कभी अपनी मर्ज़ी के बरखिलाफ (उल्ट ) न होगा और न ही कोई मन्दा नतीजा देगा। शर्त यह है कि चन्द्र खुद रद्दी न हो रहा हो । सफर का फैसला अमूमन केतु के बैठा होने वाले घर (वर्षफल के हिसाब से) के मुताबिक (अनुसार) होगा यानि जब केतु बैठा हो :-

घर  न.1
                   अपने आप को सफर के लिए तैयार रखो और बिस्तरा तक बांध लो। हुक्मनामा बेशक हो चुके मगर आखिर पर सफर न होगा। अगर हो भी जाये तो दोबारा वापिस आना पड़ेगा। सौ दिन के अन्दर तक आरज़ी (अस्थाई) तौर पर बाहर रहने का सफर हो सकता है । खासकर जब खाना नं0 7 खाली हो ।

घर न.2
तरक्की पाकर आसूधा (अच्छा ) हाल में सफर होगा। होंगी तो दोनों बाते होंगी (तरक्की और सफर)। वर्ना एक न होगी, जब तक खाना नम्बर 8 का मन्दा असर शामिल न हो।यानि खाना नं0 8 में केतु का दुश्मन ग्रह न हो ।

घर न.3
भाई बन्धुओं से दूर परदेस की ज़िन्दगी होगी जब खाना नं0 3 सोया हुआ हो यानि केतु पर किसी ग्रह की दृष्टि या साथ वगैरह न हो ।

घर न.4
अव्वल तो सफर न होगा और अगर होगा तो माता बैठी होने वाले शहर या माता के चरणों तक होगा। फिर भी होगा तो न ही मुकाम (जगह) की तबदीली और न ही सफर कभी मन्दा होगा जब तक खाना नं0 10 मन्दा न हो यानि खाना नं0 10 को कोई ग्रह मन्दा न कर रहा हो ।

घर न.5
मुकाम या शहर की तबदीली तो कभी देखी नही गई मगर महकमें के अन्दर या शहर, घर या कमरे की तबदीली हो जाये तो बेशक । हर हाल नतीजा मन्दा न होगा जब तक बृहस्पति नेक हो ।

घर न.6
सफर का हुक्मनामा हो हुआकर तबदीली शहर का हुक्म एक दफा तो ज़रूर मन्सूख (रद्द) होगा। जब तक केतु जागता हो यानि सफर होने की उम्मीद नहीं ।

घर न.7
जद्दी घरबार का सफर (तबदीली ज़रूरी तरक्की की शर्त नही) ज़रूर होगा। अगर वह (टेवे वाला) खुद-ब-खुद (अपने आप) खुशी से न जावे तो बीमार वगैरह होकर या बतौर लाश वहां जावे । किस्सा कोताह (आखिरकार) तबदीली शहर या सफर ज़रूर होगा और नतीजा नेक होगा जब तक खाना नं0 1 मन्दा न हो और केतु जागता हो।

घर न. 8
कोई खास खुशी का सफर न होगा। बल्कि अपनी मर्ज़ी के बरखिलाफ या मन्दा ही सफर होगा, जब तक खाना न.11में केतु के दुश्मन (चन्द्र या मंगल) न हो । केतु की इस मन्दी हवा का असर केतु के मतल्लका अशिया ( यानि कान, रीढ़ की हड्डी, टांगों की बिमारियां, जोड़ो का दर्द, गठिया वगैरह) या खुद केतु (जानवर या तीन दुनियावी कुत्तो) पर भी हो सकता है । चन्द्र का उपाय यानि धर्म मन्दिर में और कुत्तो को (एक ही रोज़ दोनों को) लगातार 15 रोज़ (दिन) तक हर रोज़ दूध देना या खाना नं0 2 को नेक कर लेना या नं0 2 का किसी ओर ग्रह से नेक होना मददगार होगा।

घर न.9
मुबारक (शुभ) हालत खुशी खुशी अपने जद्दी इलाकों (घर बार) की तरफ का और अपनी दिली मर्ज़ी पर सफर होगा। नतीजा हमेशा नेक व उत्ताम होगा जब तक खाना नं0 3 का मन्दा असर शामिल न हो।

घर न.10
शक्की हालत, सनीचर उम्दा तो दुगुना उम्दा । लेकिन अगर सनीचर मन्दा तो दुगना मन्दा, नुकसान वाला और बे-मौका (बिना समय का) सफर होगा। अगर खाना नं0 8 मन्दा हो तो मन्दी हवा के मायूस (दुख भरे )झौंके ज़रूर साथ होंगे। खाना नं0 2 मददगार होगा। चन्द्र का उपाय बजरिया खाना नं0 5 (औलाद या खुद सूरज को चन्द्र की अशिया यानि दूध पानी का अर्घ ) सूरज की तरफ मुंह करके पानी गिरा देना वगैरह मुबारक फल देगा।

घर न.11
सफर का हुक्मनामा ऊपर से बड़े अफसरों से चलकर नीचे तक पहुंच ही न सकेगा। सफर का मालिक केतु दुनियावी दरवेश कुत्ताा रास्ते में ही लेटा होगा। यानि असली मुकाम से वह पहले ही तबदील होकर किसी दूसरी जगह सफर के रास्ते में ही बैठा होगा। यहां से आगे सफर का सवाल दरपेश (सामने) होगा। फर्ज़ी हिलजुल होगी। अगर सफर हो ही जावे तो ग्यारह गुना उम्दा होगा जब तक खाना नं0 3 से मन्दा असर शामिल न होवे।

घर न.12
अपने बाल बच्चों के पास रहने और ऐश व आराम करने का ज़माना होगा। तरक्की ज़रूर होगी मगर तबदीली की शर्त न होगी। अगर सफर हो तो नफ़ा (लाभ) ही होगा। केतु अपना उच्च फल देगा और नतीजा मुबारक होगा जब खाना नं0 6 उम्दा और नं0 2 नेक हो और नं0 12 को ज़हर न देवे । यानि खाना नं0 6 और 2 के ग्रह खाना नं0 12 पर मन्दा असर न कर रहें हों ।
चन्द मिसाले

जब केतु सफर का हुक्मनामा जारी करता है तो कुण्डली वाला एक बार तो ज़रूर सफर पर रवाना हो जाता है। चन्द कुण्डलियां बतौर मिसाल पेश हैं । समझदार के लिए इशारा ही काफी होगा।



कुण्डली नं0 1 पंजाब के जाने माने ज्योतिषी गौतम ऋषि पराशर जी की है। सूरज के पक्के घर खाना नं0 1 में चन्द्र बृहस्पति और केतु खाना नं0 3 परदेस की ज़िन्दगी। सन् 1994 में केतु ने सफर का हुक्मनामा जारी कर दिया और सफर का सिलसिला आज भी जारी है। वह अब तक 18-19 बार कैनेडा, अमरीका और दूसरे मूल्कों का दौरा कर चुके हैं।


कुण्डली नं0 2 एक सिविल इंजनियर की है। चन्द्र के घर खाना नं0 4 में सूरज बृहस्पति और सूरज के पक्के घर खाना नं0 1 में चन्द्र। लिहाज़ा सफर ज़रूरी। सन् 1977 से 1986 तक सल्तनते ओमान में एक कंस्ट्रक्शन कम्पनी में नौकरी कीं। इसी दौरान 4-5 बार अपने मुल्क में भी आए।


कुण्डली नं0 3 एक मकैनिकल इंजनियर की है । चन्द्र अपने घर खाना नं0 4 में और सूरज का साथ । शुक्र खाना नं 3, कोई लड़की समुन्द्र पार से बुला रही है। लिहाज़ा अमरीका से एक पंजाबी लड़की से शादी हुई और सन् 1987 से वहीं बस गए। अब तक कई मुल्कों का सफर कर चुके हैं।


कुण्डली नं04 में चन्द्र का सूरज और बृहस्पति से दृष्टि द्वारा ताल्लुक और केतु ने सफर करा दिया । कुण्डली वाला सन् 2000 से इटली में काम कर रहा है । इस दौरान तीन बार अपने मुल्क भी आया।


Friday, March 5, 2010

साहबे औलाद

आज के दौर में वही वालदैन (माता पिता) पूरी तरह कामयाब हैं जिनकी औलाद भी कामयाब हो जावे। यही वजह है कि औलाद को कायम करने के लिए दौड़ लगी हुई है। मगर ग्रह क्या कहते हैं, यह भी देख लें तो बेहतर होगा।

ग्रहों से औलाद का ताल्लुक:-

बृहस्पति:- मसनुई (बनावटी) हालत सूरज शुक्र मुश्तर्का (इकट्ठे) । जिस्म में रूह के आने जाने का ताल्लुक (सम्बन्ध) या पैदायश औलाद मगर औलाद की ज़िन्दगी कायम रखने या मौत हो जाने का कोई बन्धन नहीं ।

सूरज:- मसनुई हालत शुक्र बुध मुश्तर्का । माता के पेट के अन्धेरे में रोशनी दे देना या पैदा होने के बाद दुनिया में उनकी या उनसे वालदैन की किस्मत को रौशन करना। खुलासा बज़रिया नर औलाद, अन्धेरे घरों में चिराग रौशन करने की ताकत, सेहत का मालिक।

चन्द्र:- मसनुई हालत सूरज बृहस्पति मुश्तर्का। उम्र, धन-दौलत और वालदैनी नेक ताल्लुक, वालदैनी खून नुतफ़ा का ताल्लुक (नर मादा हर दो औलाद का) ।

शुक्र:- मसनुई हालत राहु केतु मुश्तर्का । जिस्म या बुत की मिट्टी, गृहस्थी सुख, औलाद की पैदायश में मदद या खराबी, दुनियावी सुख ।

मंगल:- मसनुई हालत सूरज बुध मुश्तर्का मंगल नेक, सूरज सनीचर (शनि) मुश्तर्का मंगल बद। जिस्म में खून कायम रहने तक ज़िन्दगी का नाम और दुनिया में औलाद और उनके आगे औलाद दर औलाद कायम रखकर बेलों (पौधे) की तरह बढ़ाना और उनका नाम या उनके नाम से सब का नाम बढ़ाना या दुनिया में नाम बाकी या पैदा कर देना, कुंडली वाले में कुवते बाह से अलैहदा (अलग) बच्चा पैदा करने की ताकत, जिस्म में ज़ोर, रूह बुत को इकट्ठा पकड़े रखने की हिम्मत, बेल सब्ज़ी की तरह औलाद ज़िन्दा रखने का मालिक ।

बुध:- मसनुई हालत बृहस्पति राहु मुश्तर्का । औलाद का रिश्तेदारों से ताल्लुक लड़कियां, लड़कियों की नस्लों का बढ़ाना, खुद कुण्डली वाले में कुवते बाह खाली विषय की ताकत, कुण्डली वाले और औलाद के लिए दूसरों से मिलने मिलाने का मैदान खुला करना या खाली आकाश की तरह उन सब के लिए हर तरफ जगह खाली करके मैदान बढ़ा देना, इज्ज़त शोहरत।

सनीचर:- मसनुई हालत बृहस्पति शुक्र मुश्तर्का (केतु स्वभाव), मंगल बुध मुश्तर्का (राहु स्वभाव) । औलाद की पैदायश के शुरू होने का वक्त, जायदादी ताल्लुक, मौत के बहाने, ज़हमत बिमारी ।

राहु:- मसनुई हालत मंगल सनीचर मुश्तर्का (उच्च राहु) , सूरज सनीचर मुश्तर्का (नीच राहु)। बृहस्पति के असर के खिलाफ़ होना या बृहस्पति को चुप कराना । रूह का आना जाना बन्द कराना या मौतें या बहुत देर तक पैदायश औलाद को रोक देना या दीगर गैबी और छुपी छुपाई खराबियां या पांव तले भूचाल पैदा करने मगर लड़कियाें की मदद करता है, झगड़े फ़साद ।

केतु:- मसनुई हालत शुक्र सनीचर मुश्तर्का (उच्च केतु), चन्द्र सनीचर मुश्तर्का (नीच केतु) । औलाद की खुशहाली, फलना फूलना मगर औलाद की तायदाद (गिनती) में कमी का हिन्दसा रखना, मौते करके औलाद घटाने से मुराद नही वैसे ही औलाद गिनती ही की होगी या बहुत देर बाद होगी । लेकिन जो होगी या जब होगी उम्दा और मुकम्मल होगी। बशर्ते कि इसके दुश्मन ग्रह की दृष्टि न हो केतु पर । खुद कुण्डली वाले में बुध में कुवते बाह (सम्भोग शक्ति) और मंगल के खून से बच्चा पैदा करने की ताकत और बृहस्पति की औलाद की पैदायश, तीनों को इकट्ठा रखने वाली ताकत नुतफ़ा या वीर्य या नुतफ़ा की बुनियाद को नर मादा में मिलाने वाली तुफानी हवा या खाली नाली होगी। यही तीन ग्रह केतु की तीन टांगे हैं, जिनकी वजह से शुक्र का बीज कहलाता है । अगर कुण्डली वाले का जो ग्रह रद्दी या उम्दा हालत में होगा वही रद्दी या उम्दा हालत होगी। ऐश का

बृ0 म0 बु0
मालिक । केतु को लड़का भी माना जो अपने उच्च घरों में उम्दा फल

केतु

देता है लेकिन अगर बृहस्पति या मंगल खाना नम्बर 6,12 में हो जावें तो केतु ख्वाह (चाहे) उच्च उम्दा या नेक घरों में ही क्यों न बैठा हो, मन्दा फल देगा ।

पैदायश औलाद:-फरमान नम्बर 17 के मुताबिक

'' शुक्र मंगल बुध केतु राजा, शनि भी शामिल होता हो ।

पहले पांचवें नर ग्रह चन्द्र, मंगल दूजे केतु ग्यारा हो ।

जन्म वक्त औलाद का होगा, ज़िन्दा पैदा जो होती हो ।

बुध लड़की नर केतु लड़का देता, गिनती भले पर होती हो ।

केतु बैठा घर 11 टेवे, गुरू, चन्द्र

शनि

औलाद मन्दी या देरी होवे, लाश पैदा या मुर्दा हो ।

केतु, शनि, बुध

रवि, शुक्र, राहु

वक्त पैदायश लड़का/लड़की होवे, लेख उम्र उस लम्बा हो ।

केतु कायम तो लड़के कायम, लड़की कायम राहु करता हो।

छटे चन्द्र दे कन्या ज्यादा, चौथे केतु नर देता हो ॥ ''

यानि वर्षफल के हिसाब से, चन्द्र नष्ट तो औलाद नष्ट, बुध और केतु में से जो भी उम्दा हालत में हो लड़के या लड़की का फैसला उसी से, खाना नम्बर 5 में उम्दा ग्रह तो लड़का, केतु उम्दा तो औलाद उम्दा, राहु मन्दा तो औलाद मन्दी ।

वक्त औलाद:-

1 खाना नम्बर 5 मंदे ग्रहो से अगर रद्दी न हो रहा हो तो औलाद की पैदायश उम्दा वरना औलाद में अड़चन होगी।

2 केतु खाना नम्बर 2, 5, 7, 1, सनीचर नम्बर 1, 11 जब बहैसियत पापी ग्रह न बैठा हो, बगैर शर्त औलाद का योग देंगे।

3 बुध जब जब शुक्र का दोस्त मददगार हो तो लड़का वर्ना लड़की देगा।

वर्षफल के हिसाब से जब मंगल या शुक्र या केतु या बुध में से कोई खाना नम्बर 1 में आ जावे या अकेला केतु खाना नम्बर 11 में हो जावे या मंगल का वक्त और खाना नम्बर 2 में मंगल, शुक्र, केतु, बुध के मददगार ग्रहों की हालत हो तो औलाद होगी। बुध और केतु की अपनी अपनी हालत या दोनों में से जो उम्दा होवे नर या मादा का फैसला करेगा। उम्दा केतु लड़का, उम्दा बुध लड़की देगा। जब वर्षफल में औलाद का वक्त हो:-

(क) लड़के देगें शुक्र के दोस्त ग्रह यानि सनीचर, केतु, बुध मगर शुद शुक्र नही । जब वो उम्दा हों या 3 , 5, 11 में हों जावें ।

(ख) लड़कियां देगें बुध या बुध के दोस्त सूरज, शुक्र, राहु जब वो उम्दा हों या 3, 5, 11 में हों  जावें ।

बृहस्पति कायम तो सब औलाद कायम । राहु कायम तो सब लड़कियां कायम बशर्ते कि ग्रहों पर उनके दुश्मन ग्रहों की दृष्टि न पड़ रही हो । चन्द्र नम्बर 6 तो सब लड़कियां हों। केतु नम्बर 4 तो सब लड़के हों मगर आपस में वह साथी ग्रह न बन रहे हों । चन्द्र केतु इकट्ठे लड़के लड़कियां मसावी (बराबर) ।

बृहस्पति शुक्र मुश्तर्का, केतु स्वभाव सनीचर मसनुई तो औलाद ज्यादा और कायम होगी। लेकिन जब मंगल बुध मुश्तर्का, मसनुई सनीचर राहु के मन्दे स्वभाव का होवे तो औलाद माता के पेट में ही बर्बाद होती जावे। ऐसी हालत में अगर बृहस्पति, चन्द्र या सूरज नेक या उम्दा हो तो सनीचर की 36 साला उम्र में औलाद कायम होगी। लेकिन अगर ऐसी मदद न मिले तो केतु का जाती (अपना) फैसला (जन्म कुण्डली में बैठा होने के हिसाब से ) बहाल होगा। चन्द्र केतु नम्बर 5 लड़के कायम। राहु नम्बर 11 लड़कियां कायम बशर्ते सनीचर नीच, मन्दा या नम्बर 6 में न हो । राहु नम्बर 9 में, 21 साला उम्र से 42 तक सिर्फ एक लड़का कायम, बाद में और हो सकता है । राहु नम्बर 5 निहायत मन्दा ग्रह वास्ते औलाद । अगर चन्द्र या सूरज साथ साथी या मुश्तर्का दीवार के खाना नम्बर 4, 6 में न हों । सनीचर खाना नम्बर 7 में लड़के बशर्ते राहु नम्बर 11 में न हो या नर ग्रह मन्दे न हों ।

वालदैन व औलाद का बाहमी (आपसी) ताल्लुक:-सनीचर नम्बर 3 सूरज नम्बर 5 औलाद से दुखिया होगा। जन्म कुण्डली में अगर सूरज के साथ उसके दोस्त ग्रह बैठें हो तो वह शख्स अपने बाप से उम्दा हालत का होगा। लेकिन अगर सूरज के साथ उसके दुश्मन ग्रह बैठें हो तो ऐसे शख्स की औलाद उससे मन्दी हालत की होगी।

औलाद का वालदैन को सुख:-बृहस्पति और चन्द्र अकेले अकेले बैठें होने के वक्त अगर कुण्डली में चन्द्र पहले हो तो माता की उम्र लम्बी होगी वर्ना पिता लम्बी उम्र भोगेगा। जन्म कुण्डली के हिसाब से सूरज खाना नम्बर 6 और सनीचर हो खाना नम्बर 12 में तो औरत पर औरत मरती जावे या मां बच्चों का ताल्लुक ही न देखे या सुख से पहले चलती जावे। बुध मारता होवे बृहस्पति को या बुध बृहस्पति के घरों में या बृहस्पति के साथ ही तो बच्चे पिता पर भारी (दुख या मौत का सबब) होंगे।

साहबे औलाद दर औलाद होगा:-

'' गुरू, शुक्र, बुध, शनि, रवि से, ऊँच कायम कोई उम्दा हो ।

पूत बढ़ते पुश्तों बढ़ते, उम्र लम्बी सब सुखिया हो ।

पांच पहले 3 ग्रह जब उम्दा, औलाद सुखी सुख पाता हो ।

सेहत, दौलत, धन, आयु, सबका, नेक भला और उम्दा हो।

गुरू केतु जब शनि को देखे, असर तीनों का उम्दा हो ।

धन, आयु, औलाद इकट्ठे, सुख औरत का पूरा हो ॥''

यानि ऐसी हालत में औलाद, सेहत, धन दौलत, औरत और उम्र, हर तरह का सुख होगा। बेटे के आगे बेटा होता जावे और पुश्त आगे बढ़ती जावे । जब तक बृहस्पति उम्दा औलाद सुखिया होगी।

लावल्द (बे-औलाद) कभी न होगा:-

'' दूजे छटे जब शुक्र जागे, मदद गुरू रवि पाता हो ।

मच्छ रेखा परिवार कबीले, औलाद दौलत सब उम्दा हो ।

छटे रवि घर 12 होते, साथी मंगल बुध बनता हो ।

तीन राहु, घर दोस्त बदले लावल्द कभी न होता हो ॥''

लावल्द ही होगा :-

''बुध, मंगल

शुक्र, केतु

गुरू शुक्र घर 7वें बैठें , माता चन्द्र 8 बैठी हो ।

चन्द्र शुक्र हों मुकाबिल बैठे, शत्रु साथ या पापी हो ।

छते कुएं घर कायम होते, टेवा शक्की लावल्दी हो ।

शुक्र राहु घर 5वां पाते, कन्या कायम एक होती हो ।

चन्द्र केतु हो 11 बैठे, निशानी लावल्दी होती हो ॥''

ऊपर के जबाड़े के सामने के तीन दांत खत्म हो गये हों तो बुध नष्ट हो चुका हुआ लेंगे। कुआं छतकर या बन्द करके ऊपर मकान बनाना लावल्दी का सबब होगा।

हिजड़ा मर्द:-

'' सात शनि चन्द्र पहले, पांच शुक्र रवि चौथे हो।

चार ग्रह औलाद न फलते, हिजड़े मर्द न होते जो ॥''

जब चन्द्र हो खाना नम्बर 1, सनीचर नम्बर 7, सूरज नम्बर 4 और शुक्र नम्बर 5 में तो नामर्द होगा।

बांझ औरत

''शुक्र दूसरे 6वें बैठा, बुध मंगल न साथी हो।

शनि मिले न साथ गुरू का, आठ दृष्टि खाली हो ।

बांझ औरत वह खुसरा होगी, औलाद नरीना कतई हो ।

बाकी सिफत कुल उम्दा उसकी, उत्ताम लक्ष्मी होती हो ॥''

यानि खाना नम्बर 2, 6 का शुक्र हर तरह से अकेला हो तो औरत बांझ या नाकाबिले औलाद होगी चाहे उसमें बाकी सिफतें हों ।

कुण्डली में मन्दे ग्रहों को बदलना तो इन्सानी ताकत से बाहर है लेकिन उसकी ग्रह चाल को लाल किताब के उपायों से दुरूस्त करके फायदा लिया जा सकता है ।





Friday, February 26, 2010

माया दौलत

दौलत आज के दौर में ज़िन्दगी की पहली और आखिरी ज़रूरत बन गई है।

फरमान नंबर 17 के मुताबिक :-

''फालतू धन सातवें1 होगा, चश्मा धन2 चौथे में हो ।
11 भरता धन से चौथा, तीसरे बह3 जाता हो ।
खाली घर चन्द्र का अपना, माया ज़र चन्द्र से हो ।
शनि होगा धन का राखा,बैठा जैसा टेवे हो ।
बन्द मुट्ठी4 साथ लाया, नौ बज़ुर्गों पाता हो ।
तीसरे घर परसु बनता, 11 परसा होता हो ।
5 पहले नौवें अपना, परसरामा बनता हो ।
तीजे दूजे झगड़े दुनियां, बे-आरामी करता हो।''

1   जब खाना नंबर 7 में कोई भी उम्दा ग्रह हो ।
2   चश्मे के शुरू, खत्म व पानी की उम्दगी व पायदारी चन्द्र की हालत पर होगी जैसा कि वह टेवे में हो। सूरज, बृहस्पति इस चश्मे की मुरम्मत में मदद देंगे। ग्रह नम्बर 11 हालत पर सफाई व आमदन व ग्रह नंबर 3 पर खर्चा व गन्दगी चश्मा होगी।
3     मंगल की हालत पर ।
4     खाना नम्बर 1, 7, 4 10 बन्द मुट्ठी की किस्मत रेलवे मुसाफिर का रखा सामान होगा। खाना नम्बर 9 ब्रेक रेलवे में रखवाया हुआ बज़ुर्गो के पास जन्म से पहले ही अमानत होगी। खाना नम्बर 10 बगैर मुसाफिर रेलवे पार्सल बज़ुर्गों की कमाई से हिस्सा लेते जाना और अलैहदगी (अलग होने) में अपनी किस्मत की हदबन्दी का मैदान होगा।

कुदरत के साथ लाई किस्मत का खज़ाना मुट्ठी के अन्दर बन्द किए हुए खानों या कुण्डली के 1, 7, 4, 10 घरों में होगा और जो हकीकी रिश्तेदारों से मिलेगा। वह खाना नम्बर 3 (भाई-बन्द, ताए-चाचे,), खाना नम्बर 5 (औलाद), खाना नम्बर 9 (वालदैन, बज़ुर्ग, खानदानी) और नम्बर 11 (जाती कमाई) में होगा। इसके अलावा जो बाकी रिश्तेदारों से ले सकेगा वह खाना नम्बर 2 (ससुराल), खाना नम्बर 6 (जानदार साथियों की ज़ाहिरा या गैबी मदद), लड़के-लड़कियों के रिश्तेदार या पैदाइश से पहले वालदैन के अपने रिश्तेदार (मसलन मामू नाना) और नम्बर 3 बेजान दुनियावी, आसमानी मदद से मिलेगा।

बचत

बृहस्पति-सूरज बज़रिया (द्वारा) रियाया (प्रजा)

बृहस्पति-शनि : आम दुनिया

सुरज - बुध्द : राज दरबार

          आमदन बढ़ती जाय
ग्रह खाना नम्बर 2 : खुद-ब-खुद हर तरफ
खाना नम्बर 11 में नर ग्रह या उत्तम ग्रह

खर्च

बृहस्पति-शुक्र, वृहस्पति-बुध्द खाना नम्बर 11 में मन्दे ग्रह,
खाना नम्बर 11, 12 दोनों खाली

सूरज-शनि बेशक गुरू या गुरू घर का ताल्लुक न होवे या दोनों से कोई उम्दा तो उम्दा बचत वर्ना मन्दा खर्च । खर्च घटावे तो आमदन घटे।



औसत ज़िन्दगी

1  टेवे में कोई भी उच्च ग्रह होवे ।
2 खाना नम्बर 4 या 5 या 6 खाली या वहां अकेला ग्रह ।
3 खाना नम्बर 1, 7, 8,10, 11 सब के सब पांचों में से हरेक में कोई भी ग्रह ।
- जन्म की हालत में अज़ाफा (वृध्दि) करके जायेगा।

दौलत की हैसियत

कुण्डली का खाना नम्बर 4 धन दौलत निकलने की जगह माना गया है यानि दौलत का निकास उन ग्रहों से होगा जो खाना नम्बर 4 में हो या खाना नम्बर 4 के दोस्त, ताल्लुकदार, साथी या मददगार हो । अगर खाना नम्बर 4 खाली ही हो तो चन्द्र को खाना नम्बर 4 में माना जायेगा।

दौलत के नाम
1 चन्द्र-मंगल मुश्तरका (इकट्ठे) श्रेष्ट धन होगा (खास करके खाना नम्बर 3 का) और दान कल्याण से बढ़ने वाला धन होगा। अगर यह दोनों ग्रह खाना नम्बर 10 या 11 में या शनि के ताल्लुक में हो जावें तो लालची होगा।

2 चन्द्र-बृहस्पति : दबा हुआ धन जो फिर चल पड़े और काम आवे । सोना चांदी छत्रधारी बढ के दरखत का साया का दूसरों को भी बड़ा भारी सहारा ।

3 चन्द-शनि : बृहस्पति के घरों में और बृहस्पति के साथ से उम्दा वर्ना स्याह मुंह माया, खुद स्याह मुंह बन्दर की तरह छलांग लगा कर चली जाने वाली और मुंह काला सुनाने वाली ।
4 मंगल - शुक्र : स्त्री धन जो माया कि स्त्री की तरफ (ससुराल) और स्त्री की किस्मत पर चले।
5 शनि-बृहस्पति : फकीरी व तालीमी (विद्या का ) ताल्लुक की माया। सन्यासी का धन शादी के दिन से बढ़ेगा।
6 मंगल- बृहस्पति : श्रेष्ट गृहस्थि धन, अपने मर्द के कबीले से ताल्लुक (सम्बन्ध)।
7 मंगल-शनि : डाक्टर का धन दौलत ।
8 मंगल-सूरज : जागीरदारी हकूमत का धन, तालीमी, रूहानी, ताल्लुक ।
9 शुक्र- बृहस्पति : बूर के लडडू , झाग के बताशे (दिखावे का धन) ।
10 सूरज- बृहस्पति : सब से ऊपर शाही धन ।

खाना नम्बर 2 के ग्रह दुश्मन ग्रहों के तख्त की मलकीयत का ज़माना धन हानि, चोरी बिना वजह, फालतू खर्चा और नुक्सान का सबब (बहाना) होता है । धन दौलत खाना नम्बर 11 के रास्ते आती और खाना नम्बर 3 के रास्ते चली जाती है या तीसरी पुश्त पर धन रेखा का रास्ता बदला हुआ होता है ।

माया तेरे तीन नाम, परसू, परसा, परस राम ।
खाना नम्बर 3 का ग्रह होगा - परसू
खाना नम्बर 11 का ग्रह होगा - परसा
खाना नम्बर 1,5,9 का ग्रह होगा - परस राम

जो ग्रह इन घरों में होवे वही रिश्तेदार इस हैसियत का होगा । खुलासा यह कि बन्द मुठ्ठी के अन्दर के घरों में कोई ग्रह न हो तो अपने साथ कुछ न लाया । सब ही ग्रह बन्द मुठ्ठी के अन्दर ही होवे तो मर्द की माया दरखत का साया उसके साथ ही उठ गया ।

खर्च-बचत
चन्द्र धन शनि खज़ानची होता है । दोनों की हालत जेब की हालत बतायेगी। मंगल और शनि जायदाद के मालिक हैं । चन्द्र बृहस्पति सोने चांदी की दौलत के मालिक हैं । आमदन का हाल देखा जायेगा खाना नम्बर 11 से और खर्च का हाल देखा जायेगा खाना नम्बर 12 से । बचत का हाल देखा जायेगा खाना नम्बर 9 से (बज़ुर्गों की तरफ का ताल्लुक) बचत जाती (अपनी) कमाई खाना नम्बर 2 से और बचत औलाद खाना नम्बर 5 से ।
खर्च पर काबू

1 बृहस्पति-सूरज मुश्तरका नेक घर के या दोनो
साथी ग्रह या दोनो जुदा जुदा कायम या दोनो
जुदा जुदा अपने दोस्तों के साथ हों ।
2 ऐसे ही सूरज-बुध
3 ऐसे ही शनि-बृहस्पति
4 ऐसे ही बुध-शनि
बुध-बृहस्पति, शुक्र-बृहस्पति, शनि-सूरज मुश्तरका हो मगर साथी वगैरह न हों , खर्च खामख्वाह (बिना वजह) होता जाये आमदन ख्वाह हो या न हो । अगर बृहस्पति का साथ सूरज या शनि में से किसी को भी न मिले यानि सूरज या शनि दोनों मे से कोई एक भी बृहस्पति की राशि या दोस्ती वगैरह के ताल्लुक में न होंवे, खर्च व आमदन महदूद (सीमित) होगी । अगर खर्च घटावे तो आमदन खुद-ब-खुद घटे । यानि बचत वही है जो मुकरर (लिखी हुई) है ।

बन्द मुठ्ठी के अन्दर के खाने के ग्रहों वाला या खाना नम्बर 11 में कोई भी नर ग्रह वाला अपनी जाती कमाई से सब कुछ आमदन, खर्च व बचत करेगा। बाकियों के लिए यह शर्त न होगी। औसत ज़िन्दगी खाना नम्बर 11 व खाना नम्बर 12 की तफरीक (घटाव) का नतीजा होगा। कुण्डली में 9 ग्रहों में से जितने ग्रह उम्दा (कायम या दुरूस्त वगैरह) हों उतना हिस्सा नेक और जितने ग्रह मन्दे उतना हिस्सा बुरा होगा। दोनों की तफरीक व आखिरी औसत का नतीजा, फैसला होगा।
खाना नम्बर 9 के ग्रह ''तोहफा'' जो दूसरों के लिए जन्म पर साथ लायेगा और खाना नम्बर 2 के ग्रह ''तोशा'' (खज़ाना, कमाई) जो आखिरी दम अपने साथ जायेगा।

मिसाल के तौर पर मशहूर सन्नतकार धीरू भाई अम्बानी जी की कुण्डली पेश है। समझदार के लिए इशारा ही काफी है।




सूरज चन्द्र खाना नं. 1 मिसल राजा । बृहस्पति खाना नं. 10 और शनि खाना नं. 2 मेहनत से तरक्की । मंगल केतु खाना नं. 9 किस्मत से धन दौलत । शुक्र बुध खाना नं. 12 नेक नतीजे । राहु खाना नं. 3 रईस और साहिबे जायदाद। कुण्डली में दो-दो सूरज।

अम्बानी जी को कौन नही जानता ? एक मामूली आदमी से तरक्की करके अरबपति सन्नतकार बन गए। खाना नं. 7 खाली होने की वजह से शुरू में मेहनत करनी पड़ी। मगर बुध की उम्र के बाद तो छलांगे मारकर तरक्की की और कई खानदानी सन्नतकारों को पछाड़ दिया। उनका रिलायन्स कम्पनियों का ग्रुप मुल्क में नम्बर एक माना जाने लगा। वह कारोबार के राजा बन गए और उनकी गिनती दुनियां के अमीर आदमियों में होने लगी। दरअसल धन और दौलत का दूसरा नाम आज रिलायन्स है। जिसने भी शुरू में रिलायन्स के सौ शेयर भी लिये थे आज वह भी लखपति बन गया। अम्बानी जी मुल्क के अकेले ऐसे आदमी हुये जिन्होने कम समय में बहुत ज्यादा तरक्की की। मरने के बाद बेटों के लिए अरबों का कारोबार छोड़ गये। (सूरज खाना नं. 1) वह अपनी मिसाल आप थे।