Friday, December 2, 2011

बेबी बच्चन


16 नवम्बर 2011 को मुम्बई से पी.टी.आई. ने खबर दी कि बालीबुड हसीना एश्वर्य राये एक बेटी की मां बन गई है। बी.बी.सी. के मुताबिक बेबी का जन्म बुधवार सुबह 5.30 बजे आप्रेशन से हुआ। लिहाज़ा अभिषेक बच्चन बाप और अमिताभ बच्चन जी यानि बिग बी. दादा बन गए। खबरों में बताए गये वक्त के मुताबिक बेबी बच्चन की कुण्डली इस तरह बनी:-

जन्म: 16-11-2011
  
पहले साल का वर्षफल


कुण्डली में पापी ग्रह मन्दे हैं जो नेक ग्रहों पर मन्दा असर डाल रहे हैं। बेबी का बाप से तालमेल कम ही होगा। किस्मत का हाल ऊपर नीचे घूमते पंघूड़े की तरह होगा। कभी अच्छा तो कभी बुरा। कभी उजाला तो कभी अन्धेरा। कभी फायदा तो कभी नुक्सान। यानि जमा तफ़रीक होती रहे। अगर शादी होवे तो खराबी भी होवे। ज़िन्दगी की अजब कहानी। किस्मत की माया कभी धूप कभी छाया। हां बेबी की ज्योतिष में दिलचस्पी होगी। अब मन्दे ग्रहों को तो बदला नही जा सकता मगर उनकी चाल दुरूस्त करके फायदा लिया जा सकता हैं ताकि बेबी फिल्मी दुनिया में चांद की तरह चमके।

Saturday, November 5, 2011

खाना नं0 1 और 2 में शुक्र

कुण्डली का खाना नं0 1 शाह सलामत का तख्ते बादशाही जिसका मालिक मंगल है। इस खाने में बैठा हुआ ग्रह हुकमरान कहलाता है। अगर खाना नं0 7 खाली हो तो खाना नं0 1 का ग्रह शक्की ही होगा। कुण्डली का खाना नं0 2 धर्म अस्थान जिसका मालिक शुक्र है। अगर खाना नं0 10 खाली हो तो खाना नं0 2 का ग्रह सोया हुआ होगा।

                    लाल किताब के मुताबिक मर्द की कुण्डली में शुक्र उसकी औरत और औरत की कुण्डली में शुक्र उसका मर्द होगा। गृहस्त आश्रम, बाल बच्चों की बरकत और बड़े परिवार का 25 साला ज़माना शुक्र का अहद है। बुध की मदद के बगैर शुक्र पागल होगा। इसलिए कुण्डली में शुक्र बुध मुश्तरका मुबारक होंगे।
                   शुक्र खाना नं01 तख्त की मालिक रज़िया बेगम रानी मगर एक हबशी गुलाम पर मर मिटी। जिस पर मेहरबान उस पर जान भी कुर्बान और जिसके खिलाफ उसकी मिट्टी भी खराब। शुक्र का पतंग, उठती जवानी के वक्त खूबसूरती की रंगबिरंगी दिल फरेब हुस्न की दिलचस्प और दिलरूबा सिफतों की मीठी मीठी ज़ुबान से तारीफ करते कराते, कामदेव की आग में जलते हुए, मीलों सोये हुए निकल गए। जिसकी वज़ह से दिल और दिमाग पर काबू न रहा और आखिर में ईमान भी बिकने लगा। धर्महीन हो जाये तो बेशक, इश्क में मज़हब का फर्क समझे या न समझे मगर राज दरबार कभी मन्दा न होगा।
                   शुक्र खाना नं0 2 अपनी ही खूबसूरती और तबीयत के आप मालिक। खुद परस्ती, स्कूल मिस्ट्रैस, हर एक की दिलदादा औरत मगर खुद किसी को पसन्द न करे। लक्ष्मी अवतार जिसका रिज़क कभी खराब न होगा बल्कि दिन रात बढ़ता ही होगा। जाती कमाई शुरू करने के दिन से कम अज़ कम 60 साल आमदनी होगी। बैरूनी हालत सूफियाना मगर अन्दरूनी चाल आशिकाना। काम देवी ताकत तो होगी मगर औलाद पैदा करने की ताकत कम ही होगी। चाल चलन का सम्भालना हर नेक नतीजे की बुनियाद होगा। बहरहाल उम्र लम्बी और दुश्मन मगलूब होंगे।
                    मिसाल के तौर पर शुक्र खाना नं0 1 और खाना नं0 2 की कुण्डलियां पेश हैं। समझदार के लिए इशारा ही काफी।




                    एकता  कपूर जी की कुण्डली में शुक्र खाना नं0 1 मगर खाना नं0 7 खाली और बुध खाना नं0 11 में । अब उम्र 36-37 साल हो गई है। कई फिल्मे बना डाली पर अपनी शादी अभी तक न बनी। इन्तज़ार की घड़िया लम्बी हो गईं ।
                        राखी सांवत जी की कुण्डली में शुक्र खाना नं0 2 मगर खाना नं0 10 खाली और बुध खाना नं0 1 में । अब उम्र 29-30 साल हो गई है। टैलीविज़न पर स्वयंबर रचाने के बावजूद शादी की कोई बात न बनी। पता नही कोई पसन्द आयेगा भी या नही ।


Thursday, October 20, 2011

दिमागी बिमारियां

दिमागी बिमारियां भी अजीब होती हैं। शुरू में तो अक्सर पता ही नही चलता। मगर जब पता चलता है तो देर हो चुकी होती है । अगर शुरू में पता चला जाए तो आसानी हो जाती है और दुख भी कम हो जाता है। ऐसी ही तीन कुण्डलियां पेश हैं।



कुण्डली नं0 1, लड़की की मां उसकी शादी के बारे में जानना चाहती थी। मैने पूछ लिया, क्या लड़की की सेहत ठीक है ? वह चुप हो गई । मैने कह दिया कि लड़की दिमागी तौर पर बिमार है । पहले इलाज़ करवा लिया जाए तो बेहतर होगा। मां ने बता दिया कि इलाज़ चल रहा है ।


कुण्डली नं0 2, लड़की ने मनपसन्द शादी 21 साला उम्र के आस पास की। साल भर में ही राहु की कृपा हो गई और लड़की ससुराल में झगड़ा करके मायके चली आई। जिसकी वज़ह से घर में परेशानी आ गई। लड़की के बाप ने मुझसे बात की। मैने कह दिया कि लड़की दिमागी तौर पर बिमार है। मैडीकल चैकअप में यह बात साफ हो गई और इलाज़ शुरू हो गया।


कुण्डली नं0 3, लड़की के बाप ने बताया कि लड़की बहुत तंग करती है। मैने कहा कि लड़की मां बाप पर भारी है। दरअसल वह दिमागी तौर पर बिमार है। इसका इलाज़ होना चाहिए। बाप ने बताया कि इलाज़ चल रहा है।

तीनों कुण्डलियाे में पापी ग्रह मन्दे होकर बैठे हैं। इसलिए बिमारी का इलाज़ ज़रूरी और पापी ग्रहों का उपाये भी कर लेना बेहतर होगा। कहीं ऐसा न हो कि ज़िन्दगी खानापूरी का नाम बनकर रह जाये।

Thursday, September 22, 2011

दो देवियां

जवानी की दहलीज़ पर पांव रखते ही बहारों के सपने आने लगते हैं। ज़िन्दगी खूबसूरत लगने लगती है । दिल भी धड़कने लगता है और हसरतें जवान होने लगती हैं। मगर कई बार खिज़ां के एक ही झोके से सब कुछ बिखर जाता है। शीशा हो या दिल हो आखिर टूट जाता है। कुछ ऐसा ही दो देवियों के साथ हुआ। दोनों बहुत अच्छी हैं मगर ग्रह ने साथ न दिया।

पहली देवी कुण्डली नं0 1 बंगलौर से है और दूसरी देवी कुण्डली नं0 2 इन्दौर से है। दोनो कुण्डलियों में केतु पहले और राहु सातवें खाने में है। खाना नं0 7 का मालिक शुक्र दोनों कुण्डयिों मे कमज़ोर है। इसके अलावा बृहस्पति खाना नं0 1, शनि खाना नं0 4 और चन्द्र खाना नं0 6 में है। दोनों देवियों ने मन पसन्द शादी 21-22 साला उम्र के आस पास की। फिर शादी शुदा ज़िन्दगी में खिज़ां के झोंके आने लगे और रफता रफता आपसी ताल्लुकात बिगड़ गए। आखिर 33-34 साला उम्र तक पहुंचते-पहुंचते अपने अपने पति से जुदा हो गईं यानि तलाक हो गया। कोई औलाद भी नही। दर असल शादी के वक्त राहु का उपाय करना ज़रूरी था जो नही हुआ। लिहाज़ा चोट हो गई।
ज़िन्दगी का सफर तन्हा तय करना भी मुश्किल होता है । अगर दूसरी शादी करनी हो तो उपाय के साथ ही करनी बेहतर होगी।

Wednesday, August 10, 2011

शुक्र

शुक्र सफेद रंग (दही) दुनिया की मिट्टी, ज़माने की लक्ष्मी, गऊ माता, मर्द की औरत ने किसी को नीच न किया। इसलिये हर एक ने पसन्द किया और खुद नीच किया। ''बदी खुफिया तू जिससे दिन रात करता,



वक्त मन्दा तेरे वही सर पर चढ़ता ।''


शुक्र के ग्रह को दुनियावी किस्मत से कोई ताल्लुक नहीं। सिर्फ इश्क व मुहब्बत की फालतू दो से एक ही आंख हो जाने की ताकत शुक्र कहलाती है।


स्त्री ताल्लुक, गृहस्थ आश्रम, बाल बच्चों की बरकत और बड़े परिवार का 25 साला ज़माना शुक्र का अहद है । इस ग्रह में पाप करने कराने की नस्ल का खून और गृहस्थी हालत में मिट्टी और माया का वजूद है । मर्द के टेवे में शुक्र से मुराद स्त्री और औरत के टेवे में उसका खाविन्द मुराद होगी। अकेला बैठा हुआ शुक्र टेवे वाले पर कभी भी बुरा असर न देगा और न ही ऐसे टेवे वाला गृहस्थी ताल्लुक में किसी का बुरा कर सकेगा।


बुध का ताल्लुक
जब दृष्टि के हिसाब से आमने सामने के घरों में बैठे हों तो चमकती हुई चांदनी रात में चकवे चकवी की तरह अकेले अकेले होने का असर मन्दरज़ा जैल होगा।


अगर बुध कुण्डली में शुक्र से पहले घरों में बैठा हो तो इस तरह दोनों के मिले हुए असर में केतु की नेक नीयत का उम्दा असर शामिल होगा। लेकिन अगर शुक्र कुण्डली में बुध से पहले घरों में हो तो इस तरह मिले हुए दोनों के असर में राहु की बुरी नीयत का असर शामिल होगा। दृष्टि वाले घरों में बैठे होने के वक्त शुक्र का असर प्रबल होगा। लेकिन जब बुध पहले घरों में हो और मन्दा होवे तो शुक्र में बुध का मन्दा असर शामिल हो जायेगा। जिसे शुक्र नही रोक सकता व गृहस्थ मन्दे नतीजे हाेंगे।


जब अकेले अकेले बन्द मुट्ठी के खानों से बाहर एक दूसरे से 7वें बैठे हो तो दोनो ही ग्रहों और घरों का फल निकम्मा होगा। मगर शुक्र 12 और बुध 6 में दोनों का उच्च होगा जिसमें केतु का उत्तम फल शामिल होगा। ऐसी हालत में बैठे होने के वक्त दोनों का असर बाहम न मिल सकेगा।


जब दोनो ग्रह जुदा जुदा मगर आपस में दृष्टि के खानों की शर्त से बाहर हों तो जिस घर शुक्र हो वहां बुध अपना असर अपनी खाली नाली के ज़रिए लाकर मिला देगा और शुक्र के फल को कई दफ़ा बुरे से भला कर देगा। लेकिन बुध के साथ अगर दुश्मन ग्रह हों तो ऐसी हालत में शुक्र कभी भी बुध को ऐसी नाली लगाकर अपना असर उसमें मिलाने नही देगा। गोया ऐसी हालत में बुध किसी तरह भी शुक्र को निकम्मा या बरबाद नही कर सकता।

 
दुश्मन ग्रहों से ताल्लुक


सूरज और सनीचर जो बाहम दुश्मन हैं अगर इकट्ठे बैठे हों तो टेवे वाले पर बुरा असर नही होता । जमा और तफरीक बराबर होती रहती है । लेकिन जब सनीचर शुक्र बैठे को कोई भी ग्रह देखे तो सनीचर देखने वाले ग्रह को जड़ से मार देगा। अगर टेवे में सूरज और सनीचर झगड़ा हो तो शुक्र मारा जायेगा। यानि जब सूरज देखे सनीचर को तो सनीचर की बरबादी होने की बजाये शुक्र का फल बरबाद होगा। लेकिन अगर सनीचर देखे सूरज को तो शुक्र आबाद या उसका फल उत्तम होगा। बहरहाल अगर शुक्र के साथ जब दुश्मन ग्रह हो तो शुक्र और दुश्मन ग्रह सब की ही अश्यिा रिश्तेदार या कारोबार मुताल्लका पर हर तरफ से उड़ती हुई मिट्टी पड़ती और किस्मत मन्दी का ज़माना होगा।


राहु का ताल्लुक


शुक्र गाय और राहु हाथी, इन दोनों को बाहमी ताल्लुक कहां तक अच्छा फल दे सकता है ? जब कभी बज़रिया दृष्टि दोनों मिल रहे हों, शुक्र का फल बरबाद होगा। दो बाहम दुश्मन ग्रह साथी दीवार वाले घर में बैठे हुए जुदा जुदा ही रहा करते हैं। लेकिन अगर शुक्र अपने दुश्मन ग्रहों के घर बैठा हो और राहु साथी दीवार वाले घर में आ बैठे तो शुक्र का वही मन्दा हाल होगा जो कि शुक्र के साथ ही इकट्ठा राहु बैठ जाने या दृष्टि से या मिलने पर मन्दा हो सकता है।


जन्म कुण्डली में शुक्र अगर अपने दुश्मन ग्रहों को देख रहा हो तो जब कभी बमुजिब वर्ष फल शुक्र मन्दा हो या मन्दे घरों में जा बैठे, वह दुश्मन ग्रह जिनको कि शुक्र जन्म कुण्डली में देख रहा था, शुक्र के असर को ज़हरीला और मन्दा करेंगे ख्वाह वह शुक्र को अब देख भी न सकते हों । ऐसे टेवे वाला जिससे खुफिया बदी किया करता था अब वही दुश्मनी और बरबादी का सबब होगा।


मिसाल के तौर पर मरहूम इन्दिरा गांधी जी की कुण्डली । समझदार के लिए इशारा ही काफी।




शुक्र खाना नं0 6 यानि शुक्र का पतंग, दूसरे लफजों में मन पसन्द शादी मगर राहु का साथ मन्दा । लिहाज़ा पति का साथ लम्बा न चला और वह वक्त से पहले बेवा हो गई। हाथी ने गाय को न बख्शा।


Monday, July 4, 2011

तख्त

'' घर पहला है तख्त हज़ारी, ग्रह फल राजा कुण्डली का;

जोतिष में इसे लगन भी कहतें, झगड़ा जहां रूह-माया का।''

 
लाल किताब के मुताबिक कुण्डली का खाना नं0 1 शाह सलामत का तख्ते बादशाही और तख्त पर बैठने वाला ग्रह हुक्मरान राजा है। राजा का वज़ीर खाना नं0 7 का ग्रह होगा। खाना नं0 1 मालिक मंगल और उच्च ग्रह सूरज है।


'' हुई राख दुनिया है दिन रात जलती,


सिर्फ धर्म बाकी है एहसान धरती।''


सूरज खाना नं0 1 होने के वक्त कुण्डली वाला मानिन्द राजा हुकमरान, ख्यालात पुराने ज़माना के और धर्म की पालना करने वाला होगा। उसके ज्यादा भाई बहन होने की शर्त न होगी। बाप की आखिरी उम्र तक पूरी सेवा और मदद करे पर अपने बेटे की तरफ से उम्मीद न रखे। बाप से बेशक दौलत मिले न मिले मगर बेटे को दौलत जमा करके ज़रूर दे जायेगा। जो उसे तबाह करने की गर्ज़ से मारेगा, वह खुद ही बर्बाद हो जायेगा। शराबखोरी व गन्दे इश्क से दूर मगर नेकी व गरीब की मदद हमेशा चाहने वाला। दो धारी तलवार की तबीयत का मालिक और जिस्म में सांप का गुस्सा। कुछ भी हो उसका रिज़क कभी बन्द न होगा और वह खुद साख्ता अमीर होगा। उम्र लम्बी और राज दरबार का साथ होगा। सफर के नेक नतीजे या सफर से दौलत पैदा करे। जिस्म के तमाम अंग आखिरी दम तक साथ देंगे। ईमानदारी से धन फलता और बरकत देगा। औलाद चाहे गिनती की हो पर सुख देगी। परोपकार, सेवा साधन और सन्तोष माया तरक्की की बुनियाद होंगे। माया दौलत खुद पैदा करेगा मगर माया का गुलाम न होगा, जब दोस्त ग्रहों की मदद हो ।


जब दोस्त ग्रह मन्दे हो तो सूरज का कोई भरोसा न होगा। वालिद बचपन में गुज़र जाये और औरत की सेहत मन्दी जब शुक्र खाना नं0 7 में हो ।लड़का ज़िन्दा न रहे जब मंगल खाना नं0 5 में हो । औरत ज़िन्दा न रहे जब सनीचर खाना नं0 8 में हो । सोया हुआ सूरज जब खाना नं0 7 खाली हो तो 24 साला उम्र से पहले की शादी मुबारक ।
बतौर उपाय जद्दी मकान में कुदरती पानी कायम होने के 10 साल बाद किस्मत का सूरज चमकता होगा।
मिसाल के तौर पर जीने की कला बताने वाले श्री श्री रवि शंकर जी की कुण्डली । समझदार के लिए इशारा ही काफी।
जन्म: 13.5.1956
सूरज खाना नं0 1 और दोस्त ग्रहों की मदद । नतीजा...... इज्ज़त, दौलत और शोहरत का साथ। किस्मत का सूरज बुलन्द है। मगर खाना नं0 7 खाली और उसका मालिक शुक्र खाना नं0 3 में चन्द्र के साथ। अब उम्र 55 साल हो गई है। क्या शादी नही हुई ?


दूसरी मिसाल राहुल गांधी जी की कुण्डली ।


जन्म : 19.6.1970




सूरज खाना नं0 1 और दोस्त ग्रहों की मदद। नतीजा......... इज्ज़त, दौलत और शोहरत का साथ । मगर खाना नं0 7 खाली और उसका मालिक शुक्र खाना नं0 2 में । अब उम्र 41 साल हो गई है। क्या शादी न होगी ?



Tuesday, June 7, 2011

हीरो राजेश खन्ना


'' मेरे सपनो की रानी कब आएगी तू,
बीती जाये ज़िन्दगानी कब आएगी तू ।''

चली आ तू चली आ मगर रानी ऐसी रूठी कि फिर वापिस न आई और ज़िन्दगी के 68 साल बीत गए। जी हां यह बात है गुज़रे दौर के अभिनेता राजेश खन्ना की जो बालीबुड के पहले सुपरस्टार बने। सन् 1971-1972 में इनका इतना बोलबाला था कि धर्मेन्द्र्र को छोड़कर किसी के पास कोई काम न था। सब फिल्मों में राजेश खन्ना ही हीरो थे। फिर सन् 1972-73 में खुद ही अपनी रिटायरमैन्ट की घोषणा करके सबकों चौंका दिया। आज वही सुपरस्टार पिछले 30-35 सालों से तन्हा गुमनाम ज़िन्दगी बिता रहा है। आखिर इस फिल्मी सितारे के सितारे कैसे अस्त हो गये ?


जन्म: 29-12-1942





बृहस्पति और सूर्य आमने सामने, मामूली तांबा भी सोना बन जाये। सूर्य शुक्र बुध मुश्तर्का, बुध का खाली चक्र सूर्य की मदद लेकर शुक्र को बरबाद करे । सूर्य शुक्र भी आपस में दुश्मन, शादी शुदा ज़िन्दगी खराब। चन्द्र राहु मुश्तर्का, चन्द्र ग्रहण जो बुध को भी बरबाद करे। दूसरे लफज़ों में मन्दा ज़माना और किस्मत साथ छोड़ देवे। एक ज़बरदस्त कैरियर मगर बुध की उम्र 34 सल तक पहुंचते पहुंचते खत्म हो गया और पत्नी ने भी साथ छोड़ दिया। यह सब कुछ इतनी तेज़ी से हुआ कि गुज़रा हुआ सुनहरा दौर सपना बन के रह गया। आज भी ज़िन्दगी पर ग्रहण का साया है।

'' ज़माने ने मारे जवां कैसे कैसे,
ज़मीं खा गई आसमां कैसे कैसे।''






Wednesday, May 4, 2011

वैजयंती माला

बालीवुड हसीना, साठ के दशक की 'मधुमति', सुहाना सफर और यह मौसम हसीं, 'नया दौर' में मांग के साथ तुम्हारा, 'गंगा जमुना' की तरह 'संगम' होगा कि नही, मन में एक 'संघर्ष' जब दिल से दिल टकराता है, जिसकी जुल्फों से 'सूरज' भी गुस्ताखी करे। फिल्मी दुनियां की 'अमरपाली' जिसकी नृत्य कला से मुल्क का 'लीडर' भी मुतासिर था और न जाने क्या क्या। वह भी एक दौर था जब लाखों करोड़ो दिल वैजयंती माला की माला फेरा करते थे। यकीनन उसकी कुण्डली दिलचस्पी का सबब होगी। मुलाहज़ा फरमायें। समझदार के लिए इशारा ही काफी ।


बृहस्पति खाना नं0 2 सब को तारने वाला जगत गुरू और सूरज मंगल मुश्तर्का खाना नं0 10, मामूली तांबा भी सोना बन जाये। नतीजा 16 साला उम्र से ही धन दौलत, इज्ज़त, शोहरत और राज दरबार का साथ शुरू हो जावे। कुण्डली में दो दो सूरज यानि सूरज की तरह नाम चमके।


चन्द्र केतु मुश्तर्का खाना नं0 9, चन्द्र ग्रहण उसपे शनि की मन्दी नज़र खाना नं0 5 से, मां का साथ बचपन से ही छूट जाये। शुक्र बुध मुश्तर्का खाना नं0 11 और राहु खाना नं0 3, शादी में देरी और पति का साथ भी लम्बा न चले। यानि बुध अब शुक्र (पति) की कुर्बानी दे देवे। पति की मौत के बाद ससुराल से मुकद्मे बाज़ी मगर बृहस्पति की कृपा से जीत उसी की हुई। लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव भी जीते।कई सन्मान और फिल्मी एवार्ड हासिल किये। ज़िन्दगी में कभी हार न हुई। अपने वक्त की नम्बर वन एकट्रैस । सलाम गुरू तुझे सलाम।

Tuesday, April 5, 2011

चन्द्र

उम्र की किश्ती का समुंद्र, जगत की धरती माता, दयालु शिव जी भोले नाथ । चन्द्र का सफेद रंग (दूध) समुंद्री व हवाई घोड़ा, अपनी ताकत की ज्यादती के सबब मैदान-ए-जंग(खाना नं. 3) मालिक की मौत (खाना नं. 8) और खुराक में कंकर (खाना नं. 7) आने पर दुनिया में तीन दफा जागा। इसलिए नौ ग्रह बारह राशि की नौ निधि व बारह सिध्दि का मालिक हुआ। इन्सान की पैदायश नौ महीने, घोड़े की पैदायश 12 महीने।


''बढ़े दिल मुहब्बत जो पांव पकड़ती,


उम्र नहर तेरी, चले ज़र उछलती।''


दिल का मालिक चन्द्र है जो सूरज से रोशनी लेता है और दुनिया में उसका नायाब उल सल्तनत है। सूरज ख्वाह कितना ही गर्म होकर हुक्म देवे मगर चन्द्र उसे ठण्डे दिल और शान्ति से बजा लाता है और हमेशा सुरज के पांव में रहना चाहता है। चन्द्र बेशक सूरज से दूर हो मगर सूरज के पांव में बहता रहता है। स्त्री (शुक्र) माई (चन्द्र) साले, बहनोई (मंगल नेक) और अपने भाई (मंगल बद) गुरू और पिता (बृहस्पत) सब के सब इस दिल के दरिया (चन्द्र ) की यात्रा को आते हैं जो सूरज की चमक से दबी हुई आंखों (सनीचर) और दिमाग (बुध) को शान्ति और ठण्डक (चन्द्र का असर) देता है। दूसरे लफज़ों में दरिया दिल के एक किनारे दुनिया के सब रिश्तादार और दूसरी तरफ इन्सान का अपना जिस्म व रूह (सूरज) और चश्म व सिर (सनीचर व बुध) बैठे हैं और दिल दरिया उन दोनों के दरमियान चलता हुआ दोनों तरफ में अपनी शान्ति से उम्र बढ़ा रहा है या जिस्म इन्सानी को बृहस्पत की हवा के सांस से हरकत में रखने वाली चीज़ यही दिल है। इसलिये उसके मालिक चन्द्र की चाल से उम्र के सालों की हदबंदियां मुकर्रर की हैं।


चांदी की तरह चमकती हुई चांदनी भरी रात चन्द्र का राज है। जिसके शुरू में राहु आखिर पर केतु और दरमियान में खुद शनि निगरां हैं। गोया पापी टोला (राहु केतु सनीचर इकट्ठे) अपनी जन्म वाली और जगत माता ही के दरबार में हर एक के आराम और खुद माता के अपने दूध में ज़हर डालने की शरारतों के लिए तैयार हैं। बेशक दूध (चन्द्र) और ज़हर (पापी ग्रह) मिल रहे हैं मगर फिर भी दरिया दिल चन्द्र माता दुनिया के समुंद्र के पानी में सूरज का अक्स ज़रूर होगा। जिसकी शहादत के लिए ज़माने की हवा या इन्सानी सांस का मालिक जगत गुरू बृहस्पत हर जगह मौजूद है।


अपने हाथों माता की सेवा करने का ज़माना 24 साला उम्र यानि चन्द्र । वक्त मुसीबत एक पर ही मन्दा होगा । खानदान ही नष्ट नही होने देगा। टेवे में जब पहले घरों में बृहस्पत और बाद के घरों में केतु हो तो चन्द्र मन्दा ही होगा। लेकिन जब तक बुध उम्दा होवे, चन्द्र का असर दूध की तरह उम्दा ही रहेगा और सोया हुआ चन्द्र भी उत्ताम फल देगा । खुद ऐसा चन्द्र तो जागता हुआ घोड़ा होगा। शुक्र देखे चन्द्र को, औरतों की मुखालिफत होगी। चन्द्र देखे शुक्र को फकीर साहिब कमाल, तमाम नशेबाज़ों का सरदार साहिब कमाल । सूरज का अक्स (जैसा भी टेवे में सूरज की हालत हो) ज़रूर ही चन्द्र के असर में साथ मिलता रहेगा और मंगल बद डरकर कोसो दूर भागता रहेगा। चन्द्र के घर अकेला बैठा हुआ ग्रह ख्वाह कोई भी  हो  , उत्ताम फल देगा । जब चन्द्र का घर नं. 4 खाली हो तो खुद चन्द्र सारी उम्र ही नेक फल देगा ख्वाह कैसी हालत का ही क्यों न हो या हो जावे। माता या किसी बड़े के पांव छूकर उसका आर्शीवाद लेना चन्द्र के उत्ताम फल पैदा करने की सबसे बढ़िया बुनियाद है।
                                           
सानिया  मिर्ज़ा
जन्म 15 - 11 - 1986


कुण्डली में चन्द्र का अपना घर खाना नं. 4 है। चन्द्र खाना नं. 4 में खर्चने पर और बढ़ने वाला माया का दरिया या जिसक कदर खर्च करें दौलत उस कदर ओर बढ़े। माता असली या सौतेली का साथ नेक फल देगा। चन्द्र अब मानिन्द दूध होगा। शुभ काम शुरू करते वक्त दूध से भरा बर्तन बतौर कुंभ रख लेना निहायत मुबारक होगा। पापी ग्रह भी माता के दूध की कसम खाकर बुरा न करेंगे।



Thursday, March 3, 2011

बीमारी

नफ़ा नुक्सान, फतह शिकस्त, सुख दुख, सेहत बीमारी, ज़िन्दगी के हर दो पहलू हैं। वर्षफल के हिसाब से खाना नं. 3, 5, 8 , 11 की मन्दी हालत से मन्दे नतीजे होंगे। अगर यह सब खाने खाली हों तो खाना नं. 4 भेदी होगा।


बीमारी का आगाज़ खाना नं. 8 से शुरू होगा। खाना नं.2-4 बहाना होंगे। खाना नं. 10 इसमें लहरें बढ़ा देगा। खाना नं. 5 रूपए पैसे का खर्च और खाना नं. 3 दुनिया से चले जाने का हुक्म सुना देगा। खाना नं. 3 के ग्रह खाना नं. 8 की मन्दी हालत से बचाने वाले होंगे  बशर्ते कि खाना नं. 11 के दुश्मन ग्रहों से वह मन्दा न हो। आखिरी अपील सुनने का मालिक चन्द्र होगा। अगर चन्द्र खाना नं. 4 में बैठा हो और राहु केतु खाना नं. 2-8 या 6-12 में बैठे हों तो उम्र के ताल्लुक में कोई मन्दा असर न लेंगे।


चूंकि बीमारी का बहाना खानां. 2 से शुरू होता है और उसमें लहरें खाना नं. 10 पैदा करेगा। इसलिए जब खाना नं. 2 बाहम दुश्मन ग्रह बैठे हों या उनका असर खाना नं. 8 में बैठे हुए दुश्मन ग्रहों के सबब से मन्दा हो रहा हो तो ऐसी ज़हर का खाना नं. 2 पर कोई बुरा असर न होगा । मगर उसी वक्त खाना नं. 10 खाली न हो तो खाना नं. 2 में पैदाशुदा ज़हर बीमारी का बहाना और उसमें लहरों की रफ्तार में ज़रूर दखल देगी। लेकिन अगर खाना नं. 10 खाली हो तो नं. 2 के बाहम दुश्मन ग्रहों का बीमारी के ताल्लुक में कोई दखल न होगा।


मन्दे ग्रह जिस दिन खाना नं. 3 या 9 में आवें, बुरा वाक्य होगा। जिसकी बुनियाद पर राहु केतु की शरारत होगी। राहु की बुरी भली तासीर का पता बुध और केतु की नेक व बद नियत का सुराग बृहस्पति बता देगा। जिसकी रोकथाम खाना नं. 8 से और मुकम्मल इलाज खाना नं. 5 करेगा। लेकिन अगर खाना नं. 5 खाली हो तो उम्दा सेहत होगी और अगर बीमार हो भी जाए तो खुद-ब-खुद ही तन्दरूस्त हो जायेगा। खुलास्तन खाना नं. 3 बीमारी के बहाना से अगर बर्बादी देता है तो खाना नं. 5 मुर्दा जिस्म में रूह वापिस डाल देता है। इन दोनों खाना नं. 3 और 5 की बुनियाद खाना नं. 9 होगा। अगर खाना नं. 3 व 5 दोनो ही खाली हों तो नं. 2,6,8,12 का मुश्तर्का फैसला, नतीजा होगा। जिसकी आखिरी अपील चन्द्र पर होगी। बृहस्पति मन्दा हो तो खाना नं. 5 पर मन्दा असर होता है।


खाना नं. 3 , 9 मन्दे हो तो नं. 5 मन्दा होगा। लेकिन अगर खाना नं. 9 में सूरज या चन्द्र हो तो नं. 5 उम्दा होगा। खाना नं. 10 के लिए नं. 5, 6 के ग्रह ज़हरी दुश्मन होंगे । जन्म कुण्डली में जब सूरज या चन्द्र के साथ शुक्र बुध या कोई पापी बैठा हो तो जिस वक्त वह नं. 1, 6, 7, 8, 10 में आवें,सेहत के ताल्लुक में मन्दा वक्त होगा।


ग्रह व बीमारी का ताल्लुक


जब कोई बीमारी तंग करे तो फौरन उसके मुताल्लका (सम्बन्धित) ग्रह का उपाय करें तो मदद हो जायेगी। मुश्तर्का (इकट्ठे) ग्रहों की हालत में उस ग्रह का उपाय करें जिसके असर से दूसरा ग्रह भी बर्बाद हो रहा हो । मसलन् बृहस्पति राहु मन्दे के वक्त राहु का उपाय मददगार होगा।


ग्रह मुताल्ल्का बीमारियां


बृहस्पति
सांस, फेफड़े के अमराज़ (मर्ज़)
सूरज
दिल धड़कना सूरज कमज़ोर जब चन्द्र की मदद न मिले। पागलपन, मुंह से झाग निकलना, अंग की ताकत बेहिस (बेकार) हो जाना। सूरज नं. 6 बुध नं. 12 ब्लड प्रैशर की बीमारी ।
चन्द्र
दिल की बीमारियां, दिल धड़कना, आंख के डेले की बीमारियां।
शुक्र
ज़िल्द के अमराज़ खुजली, चम्बल वगैरह। नाक छेदन से मदद होगी।
मंगल
नासूर, पेट की बीमारियां, हैज़ा, पित्त, मेदा ।
मंगल बद
भगंदर (फोड़ा), नासूर ।
बुध
चेचक, दिमागी ढांचा की बीमारिया, खुशबू या बदबू का पता न लगना, नाड़ों, ज़ुबान या दांत की बीमारियां।
सनीचर
बीनाई (नज़र) की बीमारियां, खांसी , दमा, चश्म की बीमारियां। दरिया में नारियल बहाना मददगार
राहु
बुखार, दीमागी अमराज़, प्लेग, हादसा, अचानक चोट ।
केतु
अज़ू (जोड़), रेह (गैस), दर्द जोड़, आम फोड़े फुंसी, रसौली, सुजाक, आतशक (गर्मी,लू) , पेशाब की बीमारी, बेहद एहतिलाम, कान के अमराज़ रीढ़ की हड्डी, हर्निया, अज़ू का उतर जाना या भारी हो जाना।
{बृहस्पति राहु , बृहस्पति बुध}
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{राहु केतु , चन्द्र राहु}
बवासीर ,पागलपन, निमोनिया
{बृहस्पति राहु , सूर्य शुक्र}
दम, तपेदिक
{ बुध बृहस्पति, मंगल सनीचर }
कोढ़ खून के अमराज़, जिस्म का फट जाना।
शुक्र राहु
नामर्दी (नपुंसक) ।
शुक्र केतु
एहतिलाम (स्वप्न दोष) ।
बृहस्पति मंगल बद
यरकान ।
{चन्द्र बुध या , मंगल का टकाराव}
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अगर घर से बीमारी दूर ही न होती हो या एक बाद दूसरा बीमार हो जावे तो:-


1. घर के तमाम मैम्बरों और आये मेहमानों (औस्तन) की तादाद से चंद एक ज्यादा मीठी रोटियां, चाहे छोटी-छोटी हों पका कर महीनें में एक दफ़ा बाहर जानवरों, कुत्तों, कौवों वगैरह को डाल दिया करें।
2. हलवा कद्दू पका हुआ, ज़र्द रंग और अन्दर से खोखला तीन महीने में एक बार धर्म स्थान में रख दिया करें।
3. अगर कोई मरीज़ शिफ़ा (आराम) ना पावे तो रात को उसके सिरहाने रूपया पैसा रखकर सुबह भंगी को 40-43 दिन देवें। यह पिछले जन्म का लेन देन का टैक्स होता है।
4. जब कभी शमशान या कब्रिस्तान में से गुज़रने का मौका मिले तो रूपया पैसा वहां गिरा दिया करें। निहायत गैबी मदद होगी।
खुदा सब को तन्दरूस्ती बखशे । हां ! अगर कभी ज़रूरत पड़ ही जाये तो मन्दे ग्रह का उपाय (असली) लाल किताब के मुताबिक ही करना बेहतर होगा। मिसाल के तौर पर अमर सिंह जी की कुण्डली जिनको दिसम्बर 2010 में शाम के वक्त अचानक हादसे में सिर में गहरी चोट लगी और कुछ दिन बेहोश रहे। तकरीबन एक महीना अस्पताल में रहे। अब घर में इलाज चल रहा है।


जन्म कुण्डली में खाना नं. 2 और 8 में ग्रह, बुध का कोई एतबार नही। वर्षफल में यह ग्रह खाना नं. 5 और 10 में मन्दे और आपसी टकराव। नतीजा चोट, दुख तकलीफ और नुक्सान। खाना नं. 3 राहे रवानगी यानि दुनिया से चले जाने का रास्ता जो मंगल ने रोक रखा है। जान बच गई। बृहस्पति खाना नं. 2 गैबी मदद। मगर दुख अभी दूर नही हुआ। जन्म का उपाय करवा दिया गया। वर्ष का उपाय बता दिया गया।

Thursday, February 3, 2011

सोनिया गांधी

सोनिया जी पिछले 10-12 सालों से मुल्क की सियासत मे सरगरम हैं और कांग्रेस पार्टी की सदर हैं । सन् 2004 के आम चुनाव के बाद वह मुल्क की प्रधानमन्त्री बनते-बनते रह गईं और अपनी जगह डा0 मनमोहन सिंह जी को प्रधानमन्त्री बनवा दिया, जिसके बारे मे उम्मीद न थी। थोड़े अर्से बाद कुछ ज्योतिषियों ने भविष्यवाणियां करनी शुरू कर दी कि सोनिया जी प्रधानमन्त्री बनेंगी। वह अब बनेंगी, तब बनेगी। मगर कब बनेगी ? वक्त गुज़रता गया मगर ऐसा कुछ न हुआ। सन् 2009 के आम चुनाव आ गए। पार्टी ने डा0 सिंह जी को पहले ही प्रधानमन्त्री के ओहदे के लिए नामज़द कर दिया। लिहाज़ा चुनाव के बाद डा0 सिंह जी बिना चुनाव लड़े दोबारा प्रधानमन्त्री बन गए। खुद सोनिया जी पार्टी की सदर बनी रही। इस तरह सब भविष्यवाणियां गलत साबित हुई। कईयों को यह समझ नही आता कि आखिर वह खुद प्रधानमन्त्री क्यों नहीं बनती? जवाब के लिए सोनिया जी की जानी मानी कुण्डली का जायज़ा ''लाल किताब' के मुताबिक लेना होगा।
जन्म 9-12-1946


शनि खाना नं0 1, खाना नं0 7, 10 खाली और मंगल खाना नं0 6 मच्छ रेखा यानि बेशुमार धन दौलत । बृहस्पति खाना नं0 4, लाखों की गिनती में एक नामावर शख्स जो इज्जत, दौलत, शोहरत और जायदाद का मालिक होवे मगर शुक्र का साथ पति के लिए मन्दा। सूरज बुध खाना नं0 5, राजयोग मगर केतु से ग्रहण जो सूरज की रोशनी को हल्का कर देवे। राहु खाना नं0 11 मन्दा जो नुक्सान करे या कोई न कोई मसला भूत बनके परेशान करे। चन्द्र खाना नं0 12, पानी पर पानी बरसता रहा, बीकानेर बेचारा तरसता रहा। किस्मत की अजब कहानी। सोनिया जी सत्ता के आस पास तो रही मगर सत्ता में नहीं।
खुलासा यह कि पापी ग्रह राहु केतु रास्ते की रूकावट हैं। इसलिए पापी ग्रहों को उपाय कर लेना ही बेहतर। वरना सोनिया जी का प्रधानमन्त्री की कुर्सी पर बैठना शक्की ही होगा।

'लाल किताब है जोतिष निराली, जो किस्मत सोई को जगा देती है
लिखत जब विधाता किसी की हो शक्की, उपाओ मामूली बता देती है।''

Tuesday, January 4, 2011

लाल किताब

''हाथ रेखा को समुद्र गिनते, नजूमे फलक का काम हुआ,

इल्म क्याफा ज्योतिष मिलते, लाल किताब का नाम हुआ ।''

लाल किताब के इस शेयर पर गौर किया जाये तो पता चलता है कि इल्म, क्याफा और ज्योतिष के संगम को लाल किताब कहा गया है। इस किताब के पांच हिस्से सन् 1939 और 1952 के दरमियान उर्दू ज़ुबान में छपे। सन् 1952 वाले आखिरी हिस्से को मुकम्मल लाल किताब कहा जा सकता है। हालांकि किताब पर लेखक का नाम नही है मगर इसमें कोई शक नही कि लाल किताब की रचना आलिम पंडित रूप चन्द जोशी जी ने की थी।


पंडित जी फौज से असिस्टैंट अकाउंट अफसर रिटायर्ड होने के बाद अपने गांव फरवाला, तहसील नूरमहल, ज़िला जालन्धर, पंजाब में रहते थे। मुझे उनसे मेरे ताया जी कर्नल पी.पी.एस. ठाकुर ने मिलवाया था। पहली बार उनसे मैं 1975 में मिला। फिर मुलाकातों का सिलसिला कुछ साल जारी रहा। ताया जी की वजह पंडित जी मुझपर मेहरबान रहे। उनसे कई मुलाकातें हुई और बेशुमार बातें हुई। लाल किताब भी मुझको पंडित जी ने ही दी थी। जिसे मैं उनका आर्शीवाद समझता हूं। किताब को पढ़ने समझने के लिए मुझे बकायदा उर्दू सीखना पड़ा। लाल किताब क्या है ...गागर में सागर है ।


पंडित जी के बारे में ताया जी ने मुझे कई बातें बताई। उनसे कई मुलाकातों से भी काफी जानकारी मिली। उनका कुण्डली देखने का तरीका भी अलग था। पंडित जी लाल कलम से जो लिख देते थे वह अक्सर पूरा हो जाता था। इस इल्म को शायद ही कोई ओर समझा हो। दरअसल पंडित जी एक गैर मामूली इन्सान थे। लाल किताब भी गैबी ताकत से उर्दू ज़ुबान में लिखी गई थी। मेरे पूछने पर पंडित जी ने खुद बताया था, ''पता नही कौन मुझे लिखाता रहा।'' शायद यही वजह रही कि किताब पर लेखक का नाम नही है।


वक्त के साथ-साथ लाल किताब इतनी मकबूल हुई कि आज बाज़ार में नकल या नकली किताबों की बाढ़ सी आ गई है और असली लाल किताब उर्दू वाली कहीं नज़र नही आती। नकली किताब पढ़कर कई सज्जन खुद को लाल किताब का माहिर कहने लगे हैं। हालांकि उनको यह भी नही पता कि इसे लाल किताब क्यों कहा गया। उर्दू आता नही, असली किताब देखी नही और माहिर बन बैठे। बस नकली का बोलबाला है। अफसोस की बात यह है कि लाल किताब के नाम पर लूट शुरू हो गई है। लोग भी वनस्पति घी को असली घी समझ रहे हैं।


लाल किताब के मुताबिक हर ग्रह के दो पहलू हैं, नेक और बद। यानि नेक हालत और मन्दी हालत। लिहाज़ा असली किताब नेक और नकली किताब बद है। अब नकली किताब के नतीजे मन्दे न होंगे तो और क्या होंगे ? वैसे भी जो किताब जिस ज़ुबान में लिखी गई हो, उसको उसी ज़ुबान में पढ़ना बेहतर होता है। नकली किताब में जान प्राण नही होते। वह मुर्दा ही होती है। इसलिए अगर हो सके तो असली किताब को ही पढ़ा समझा जाये। इसी से कुशल मंगल होगा।