Saturday, February 2, 2013

प्यार का बुखार

ग्रहों का भी अजीब खेल है। जिससे कभी दिल मिलने को बेकरार था आज उसी से बिछुड़ने के लिए बेचैन है। जिस पर कभी जान कुर्बान करते थे आज उसी से पल्ला झाड़ रहे हैं। यह बात एक ऐसे जोड़े की है जो प्यार की खूबसूरत दुनिया से निकल कर कानून के दरवाज़े तक जा पहुंचा। इन दोनों की कुण्डलियां इस तरह हैं ।


लड़का एक बड़ी दुकान में नौकरी करता था जहां लड़की एक दिन खरीदारी करने आई। वहीं पर दोनों पहली बार मिले। फिर बाहर मिलने लगे। रफता रफता मुलाकातों का सिलसिला प्यार में बदल गया। लड़की फिर लड़के के घर तक पहुंच गई। लड़के ने भी अपने घरवालों से कह दिया कि वह उससे शादी करना चाहता है। लड़के का बाप और भाई  इस शादी के हक में न थे । पर लड़का अपनी जि़दद पर अड़ा रहा। लिहाज़ा अप्रैल 2009 में दोनों ने लव मैरिज कर ली और लड़की लड़के के घर आ गई चाहे लड़के का परिवार शादी में शामिल न हुआ।    

शादी के 2-3 महीने बाद प्यार का बुखार उतरने लगा। ताल्लुकात में तल्खी आने लगी। घर का माहौल भी खराब होने लगा। लड़की ने गुस्से में आकर घर छोड़ने की धमकी दे डाली। फिर दोनों घर छोड़कर परिवार से जुदा रहने लगे। हालात इतने खराब हुये कि मां बाप ने दिसम्बर 2011 में लड़के को बेदखल कर दिया।

फिर लड़के लड़की का आपस में झगड़ा होने लगा और अप्रैल 2012 में दोनो जुदा जुदा रहने लगे। फिर भी झगड़ा खत्म न हुआ और बात पुलिस थाने तक पहुंची। वहां समझौता भी हुआ लेकिन बात न बनी। आखीर लड़की ने सितम्बर 2012 में लड़के पर तलाक का मुकददमा दायर कर दिया। अब सवाल यह है कि ऐसा क्यों हुआ ? जिसके लिए दोनो के ग्रहों का जायज़ा लेना होगा। समझदार के लिए इशारा ही काफी।

लड़के की कुण्डली में राहु पापी खाना नं0 7, शुक्र बुध खाना नं. 10 और मंगल बद खाना नं. 12 मे है। र्मिज़ा हल्का सारंगी भारी। लड़का गोरी चिटटी लड़की की काली ज़ुल्फों में फंस गया और घरवालों की मरज़ी के खिलाफ उससे शादी कर ली। मगर शादी का सुख कहां ? क्योंकि कुण्डली में लड़ाई झगड़ा और जुदाई या तलाक का पूरा योग है।

लड़की की कुण्डली में शुक्र चन्द्र के साथ खाना नं. 5 में रददी, बुध खाना नं. 3 में मन्दा और मंगल खाना नं. 6 में बद है। बुध का असर खाना नं. 4 धन दौलत, खाना नं. 5 औलाद, खाना नं. 9 किस्मत और खानां नं. 11 आमदन पर मन्दा । ऐसे में शादी का नतीजा भी मन्दा ही निकला। राहु खाना नं. 9 में मन्दा और खाना नं. 5 को भी मन्दा कर रहा है। लिहाज़ा शादी से कोई औलाद पैदा न हुई। अब जुदाई तो हो ही चुकी है कल को तलाक भी हो जायेगा। मिलते हैं दिल यहां मिलके बिछुड़ने को, खिलते हैं गुल यहां खिलके बिखरने को ।

Wednesday, January 2, 2013

मकान


"टेवे बैठे ग्रह 1 ता 9वें, दाएं दाखिला बोलते हैं,
चलते 12 से घर 9 आवें, असर बाएं देते हैं।"

जन्म कुण्डली के मुताबिक जो ग्रह खाना नं. 1 से 9 तक बैठे हों वह अपना असर मकान के दाखिल होते हुए दाएं हाथ की तरफ ज़ाहिर किया करते हैं और खाना नं. 12 से 10 तक बैठे हुए ग्रह मकान के बाएं तरफ अपना असर ज़ाहिर करते हैं। मकान की बुनियाद डालने के दिन से 3 या 18 साल की मियाद के बाद हर मकान अपना असर ज़रूर देगा। जन्म कुण्डली में बैठे हुए सनीचर का मकान पर खानावार असर इस तरह होगा ।
  1. टेवे वाला अगर मकान बनावे तो काग रेखा । जब सनीचर मन्दा हो तो कौवे की खुराक तक तरसता होवे । निर्धन सब तरफ बर्बादी होगी। लेकिन जब सनीचर उम्दा  नंबर 7, 10 खाली हो तो उम्दा फल होगा। 
  2. मकान जब और जैसा बने, बनने देवें, मुबारक होगा। 
  3. केतु पालन 3 कुत्ते रखे तो मकान बनेगा । वर्ना गरीबी का कुत्ता भौंकता रहे।
  4. अपने बनाये मकान खाना नं. 4 के मुताल्का रिश्तेदार माता खानदान को ज़हर देंगे या माता खानदान बर्बाद होने लग जायेगा।
  5. खुद बनाये हुये मकान औलाद की कुर्बानी लेंगे। मगर औलाद के बनाये हुये मकान टेवे वाले के लिए मुबारक होंगें।  अगर खुद ही बनाने हो तो सनीचर की जानदार अशिया (भैंस-भैंसा) बतौर दान देने या बतौर कुर्बानी जि़न्दा छोड़ देने के बाद मकान की बुनियाद रखें तो सनीचर का औलाद पर मन्दा असर न होगा। फिर भी अगर हो सके तो 48 साला उम्र के बाद ही मकान बनावे तो बेहतर होगा। 
  6. सनीचर के मियाद 36-39 साला उम्र के बाद मकान बनाना मुबारक होगा। वर्ना अपनी लड़कियों के रिश्तेदारों को तबाह करेगा। 
  7. अव्वल तो बने बनाये मकान ही बहुत मिलेंगे जो मुबारक होंगे। अगर उल्टा बिकने ही लगे तो सबसे पुराने मकान की दहलीज़ कायम रखना सब कुछ वापिस दिलवा देगा। 
  8. मकान बनना शुरू हो तो मौतें गूंजने लगे। सनीचर अब राहु केतु की हालत पर अच्छा या बुरा असर देगा। 
  9. टेवे वाले की औरत के पेट में बच्चे के वक्त अपनी कमाई से बनाया हुआ मकान पिता को आसूदा हाल या जि़न्दा न छोड़ेगा और जब टेवे वाले के पास 3 जुदा-जुदा रिहायशी मकान कायम हो जायेंगे तो उसका आखिरी वक्त (मौत) पहंुच चुका गिनेंगे। 
  10. जब तक मकान न बनावे सनीचर मकान बनाने के लिए सामान जमा करने की कीमत नगद रूपया देता जायेगा। लेकिन जब मकान बन जावे सनीचर बिस्तर तक भी उठाकर ले भागे बल्कि ढूंढने पर भी निशान न मिलेगा और आमदन खत्म होगी। 
  11. मकान अमूमन देरी से 55 साला उम्र के बाद बनेगा । दक्कन के दरवाज़े वाले मकान के साथ (रिहायश) से लम्बा अर्सा लेटना (गल सढ़कर मरना) पड़ेगा। 
  12. सांप (सनीचर) और बन्दर (सूरज) जो कभी अपना बिल या घर नही बनाते अब मकान बनाना सीख लेंगे। यानि अब मकान खुद ब खुद बनेंगे जो मुबारक होंगे। ख्वाह अब सनीचर के साथ सूरज भी नम्बर 12 में ही होवे। टेवे वाले को चाहिए कि बनते मकान को न रोके  जैसा बने, बन ही लेने देवें। 

वर्षफल के हिसाब से जिस साल सनीचर, राहु केतु से ताल्लुक वाले असूल से जाति सुभाओ में नेक असर का साबित हो रहा हो या राहु केतु के साथ ही बैठा हो तो मकानात बनेगें। लेकिन जब राहु केतु का साथ तो हो मगर सुभाओ के हिसाब से बुरे असर का साबित होवे तो बने बनाये मकान बिकवा या गिरवा देगा और उसका मन्दा असर होगा। खाना नं. 2 मकानात की हालत बतायेगा और खाना नं. 7 मकानों का सुख दुख बताता होगा।

मकान बनाने से पहले तमाम और कुल तह ज़मीन को एक ही गिनकर उसके गोशे या कोने देखे जावें। 4 गोशे वाला रकबा सबसे उत्तम होगा, जिसका हर एक कोना 900 का हो। तीन, पांच या ज्यादा कोने वाला रकबा मन्दा ही होगा। मकान की बुनियादें रखने से पहले तह ज़मीन पर चन्द्र के उपाय से खानदानी  नेक व बुरे नतीजे देख लेना भी ज़रूरी होगा। क्योंकि मकान की तह ज़मीन का मालिक चन्द्र होता है। मकान में आने जाने का सबसे बड़ा दरवाज़ा बतरफ मशरिक हो तो सबसे उत्तम मगर जनूब का दरवाज़ा मनहूस ही होगा। बन्द गली का आखिरी मकान भी मन्दा ही होगा। जन्म कुण्डली में दूसरें ग्रहों का जायज़ा ले लेना भी बेहतर होगा।

मिसाल के तौर पर एक सिविल इंजीनियर की जन्म कुण्डली जिसने सल्तनत-ए-ओमान में मकानात/इमारत बनाने वाली कम्पनी में कई साल काम किया। उसने अपना मकान  भी कई बार तोड़ा और कई बार बनाया। समझदार के लिए इशारा ही काफी।

चन्द्र सनीचर मुश्तर्का, चन्द्र ग्रहण खाना नं. 1 और खाना नं. 7,10 खाली। मकान में कई बार तोड़ फोड़ की । मकान को लेकर परिवार में झगड़ा हुआ जो अदालत तक गया। तह ज़मीन का बटवारा हुआ और मकान तोड़कर फिरसे बनाना पड़ा। इस तरह चन्द्र सनीचर के झगड़े में धन (चन्द्र) और मकान (सनीचर) दोनो का नुक्सान हुआ।

Sunday, December 2, 2012

आरती


दिसम्बर 2009 को जालन्धर में ज्योतिष सम्मेलन हो रहा था। वहीं किसी के ज़रिए आरती से बात हुर्इ। एक खूबसूरत लड़की जो टेलिविज़न पर ए ंकर थी। उसने अपनी कुण्डली मुझे दिखार्इ। उसका सवाल था कि जि़न्दगी में तरक्की कहां तक होगी ? उसने गले में और हाथ में माला पहन रखी थी। मैने कहा कि बुध आपकी तरक्की में कहीं रू कावट न बन जाये। शायद उसको मेरी बात अच्छी न लगी।

जुलार्इ 2011 को धर्मशाला में ज्योतिष सम्मेलन हो रहा था । सम्मेलन में 200 के करीब ज्योतिषी मौजूद थे। उनको दिए हुये विषय पर बोलने के लिए कहा गया। गिनती के आदमी ही बोलने के लिए मंच पर आये। दूसरों को सवाल पूछने के लिए भी कहा गया। मैने भी विषय पर बात की (देखें तख् ते बादशाही) जिसमें दो मिसालें थी। तीसरी मिसाल मैने आरती की जोड़ दी और कहा कि वह आप में मौजूद है। जब मैं बोल चुका तो मुझे भी रोक लिया गया तांकि दूसरे मुझसे सवाल पूछ सकें। मैने कहा कि मेरी बात लाल किताब के मुताबिक है इसलिए वही मुझसे सवाल पूछे जिसने असली लाल किताब पढ़ी हो। एक बार तो खामोशी छा गर्इ। खैर मुझसे किसी ने सवाल न पूछा।

बाद में आरती ने मुझसे बात की । पिछले एक साल से उसके पास नौकरी न थी मगर उसने फिर वही पुराना वाला तरक्की वाला पूछ लिया। मैने जवाब दिया, जो मैं कहना चाहता हूं, आप वह सुनना नही चाहती। जो आप सुनना चाहती हैं, मैं वो कहना नही चाहता। इसके साथ ही बात खतम हो गर्इ।

अक्तूबर 2012 में लुधियाना में ज्योतिष सम्मेलन हुआ। आरती से फिर मुलाकात हो गर्इ। अब उसमें कुछ फर्क आ गया था। उसके पास कोर्इ नौकरी न थी । उसने बताया कि उसने माला उतार दी है। मैने हंसी में पूछ लिया कि अब क्या पहना है । उसने जवाब दिया कि सेहत के लिए ताबीज़ पहन रखा है। मैं चुप रहा क्याेंकि बुध अब भी शरारत कर रहा था। आरती की कुण्डली इस तरह है। समझ दार के लिए इशारा ही काफी।




बृहस्पत सूर्य मुश्तर्का खाना नं. 1 मगर खाना नं. 7 खाली । तख्त पर राजे 2 पर वजीर कोर्इ नही। छोटी उम्र 22-24 साल तक शादी हो जाती तो ठीक था बाद में कोर्इ भरोसा न होगा। राहु खाना नं. 4 और केतु खाना नं. 10 नेकदिल। शुक्र, मंगल, शनि मुश्तर्का खाना नं. 3, लम्बी उम्र, दुश्मनों के मुकाबिल दोस्त भी खुद बा खुद मदद पर आ जावें। चन्द्र, बुध मुश्तर्का खाना नं. 2, पानी में रेत। क्या घर में मनिदर या पूजा स्थान बना रखा है ?

पढ़ी लिखी खूबसूरत लड़की, अच्छी नौकरी और अच्छे घर की मगर अब तक शादी न हुर्इ। बाप का साथ भी लम्बा न चला । दूसरे लफ्ज़ों में मां वक्त से पहले बेवा हो गर्इ। कुछ सालों से नौकरी भी नही है। अब बुध की उम्र निकल गर्इ है। अगर दुरूस्ती कर ली जाये तो मसला हल हो सकता है।

Sunday, October 28, 2012

लाल किताब का हस्त रेखा से ताल्लुक


लाल किताब उदर्ू ज़ुबान में लिखी गर्इ थी। हालांकि किताब पर लेखक का नाम नही है पर इसकी रचना आलिम पंडित रू प चन्द जोशी जी ने की थी। पहली किताब सन 1939 में छपी थी, जिस पर लिखा है, हथेली की लकीरों से जन्म कुण्डली बनाने और जि़न्दगी के पूरे हालात देखने के लिए सामुदि्रक की लाल किताब। इस किताब में हथेली की लकीरों, बुजऱ्ों और दूसरे निशानात का जि़क्र किया गया है। वैसे तो यह हस्त रेखा की किताब है मगर इसमें ग्रहों का जि़क्र भी आता है।

आखिरी किताब सन 1952 में छपी थी, जिस पर लिखा है, ।ेजतवसवहल इेंमक वद च्ंसउपेजतल  इल्मे सामुदि्रक्र की बुनियाद पर चलने वाली ज्योतिष की मदद से हाथ रेखा के  ज़रिए दुरूस्त की हुर्इ जन्म कुण्डली से जि़न्दगी के हालात देखने के लिए लाल किताब। इस किताब में कुण्डली के 12 खानों, 9 ग्रहों और ज्योतिष दूसरे उसूलों का जि़क्र तफ़सील में किया गया है। ग्रहों के अलावा रेखा का भी जि़क्र आता है। मसलन सनीचर खाना नं. 1 हो तो काग रेखा (गरीबी) की बात आती है। इसी तरह, केतु तीजे मंगल बारां , मच्छ मुआविन दोनों तारां।यानि केतु कुण्डली में खाना नं. 3 और मंगल खानां नं. 12 हो तो,मच्छ रेखा , गरीब को धन और अमीर को वालिए तख्त, हरदम बड़े परिवार, लोह लंगर सवाया। मुआविन, उम्र रेखा, कब्र से जि़न्दा वापिस आवे या फांसी लटके के पांव के तले तख् ता देना तांकि गला न घुट जावे। बिन बुलाए मददगार आ हाजि़र हों । ज़मीन और आसमान के दरमियान सब दुश्मन छुपकर गारों में गुज़ारा करेंगे, मंगल की मदद पर होंगे ख् वाह कैसे ही बैठे हों।

लाल किताब में हथेली से कुण्डली बनाने की बात की गर्इ है । मसलन सूरज के बुर्ज पर चौकोर का निशान हो तो मंगल कुण्डली में खाना नं. 1 हुआ । चन्द्र के बुर्ज से रेखा सीधी वृहस्पत के बुर्ज पर जाये तो चन्द्र खाना नं. 2 हुआ। मंगल नेक के बुर्ज पर केतु का निशान हो तो केतु खाना नं. 3 हुआ। शुक्र के बुर्ज पर राहु का निशान हो तो राहु खाना नं. 7 हुआ वगैरह वगैरह । इस तरह बनार्इ गर्इ कुण्डली से जि़न्दगी का हाल देखने की बात की गर्इ है। पर हथेली से जन्म कुण्डली बनाना कोर्इ आसान काम नही है।

किस्सा कोताह हस्त रेखा में ग्रहों का जि़क्र और ग्रहों में हस्त रेखा की बात आती है। इससे साफ ज़ाहिर है कि लाल किताब का हस्त रेखा से गहरा ताल्लुक है। दूसरे लफज़ों में हस्त रेखा ही लाल किताब की बुनियाद है। पैदायश का वक्त मालूम न होने की सूरत में हथेली से जन्म कुण्डली बनाकर जि़न्दगी का हाल देखा जा सकता है। अगर ज़रू रत पड़े तो मन्दे ग्रह का उपाय भी किया जा सकता है।

Tuesday, October 2, 2012

डाक्टर साहिब


डाक्टर मनमोहन सिंह वज़ीरे आज़म आजकल ज़रा मुशिकल में हैं। कर्इ तो घोटाले हो गये। कोयले का मुददा तो कोलगेट बन गया। जिससे उनके अक्स को धक्का लगा है। सरकार चलाने के लिए दूसरी पार्टियों का आसरा लेना पड़ता है क्योंकि उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस का पार्लियमैंट में बहुमत नहीं है। फिर सबका ख्याल भी रखना पड़ता है। हाल ही में एक पार्टी नाराज़ होकर उनका साथ छोड़ गर्इ। अब क्या करें.......एक को मनाऊं तो दूजा रूठ जाता है। ऐसे में क्या होगा.....यह जानने के लिए डाक्टर साहिब की कुण्डली चाहिए। नैट पर जो उनकी कुण्डली मिली, वह कहां तक सही है, यह कहना मुशिकल है।





खैर इस कुण्डली के मुताबिक 26 सितम्बर को उनका साल बदल गया है। इस साल के वर्षफल में कर्इ ग्रह मंदे हो गये । वह ग्रह भी  जिसका कोयले से ताल्लुक है। फिर बुध भी कुछ न कुछ मन्दा करके रहेगा। लाल किताब के मुताबिक, बुध घर तीजे जब हुआ जली अनोखी आंच, नौ उजड़े ग्यारह मरे गरके चार और पांच । किस्सा कोताह यह साल डाक्टर साहिब के लिए ठीक नही है। कुछ भी मन्दा हो सकता है अगर यह कुण्डली सही है।

Monday, September 3, 2012

फिज़ा



मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये, बड़ी चोट खार्इ जवानी पे रोये। सन 2008 की बात है जब अनुराधा ने 37 साला उम्र में फिज़ा यानि मुस्लमान बन के सूबे के वज़ीर चन्द्र उर्फ चांद से निकाह किया था। मगर 2 महीने के अन्दर ही चांद बादलो में गुम हो गया। चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात। तब से फिज़ा परेशान थी। आखीर अगस्त 2012 में उसकी परेशानी खत्म हो गर्इ। फिज़ा की कुण्डली इस तरह बतार्इ जाती है।



शुक्र खाना नं0 7 और खाना नं0 1 खाली, शुक्र का पतंग मगर कटा हुआ। बुध खाना नं0 9 मनहूस, कम उम्र , चमगादड़ के मेहमान आए यहां हम लटके वहां तुम लटको और चन्द्र का साथ यानि पानी में रेत, इश्क का गलबा। सनीचर खाना नं0 6 का मंदा असर खाना नं0 2 और 12 पर। फिर सूरज ग्रहण खाना नं0 8 में । ऐसे में क्या उम्मीद हो सकती है ..... समझदार के लिए इशारा ही काफी।

वर्षफल में उम्र के मालिक चन्द्र को भी ग्रहण लग गया। पापी ग्रह मन्दे और शुक्र भी मन्दा। दूसरे लफज़ों में बृहस्पत को छोड़कर सब ग्रह मन्दे हो गये। लिहाज़ा नतीजा भी मन्दा निकला और फिज़ा की मौत हो गर्इ। न सोचा न समझा न देखा न भाला, तेरी आरज़ू ने हमें मार डाला ।

Saturday, August 4, 2012

राजेश खन्ना


पिछले साल एक मज़मून "हीरो" फिल्म अदाकार राजेश खन्ना जी के बारे  लिखा था। यह उसका दूसरा हिस्सा है।

अपने ज़माने के सुपर स्टार राजेश खन्ना जी का 18 जुलाई 2012 को इन्तकाल हो गया। उन्होने 163 फिल्मों में काम किया। सन् 1969-1973 के दौरान उनकी 15 फिल्मे लगातार हिट रही। लिहाज़ा वह बालीवुड के सुपरस्टार कहलाये। एक रिकार्ड जो शायद आज भी कायम है।

"तुम पुकार लो तुम्हारा इन्तज़ार है ........ कहीं दूर जब दिन ढल जाये..........ज़िन्दगी का सफर है यह कैसा सफर"...........

किसका इन्तज़ार रहा, दिन कैसे ढले और ज़िन्दगी का सफर कैसे कटा। कई सवाल है जवाब कोई नही। उनकी ज़िन्दगी के 69 साल पूरे हो चुके थे और 70वां साल चल रहा था।





कुण्डली में चन्द्र ग्रहण । वर्षफल में चन्द्र पर पापी ग्रहों का ज़हरीला असर। यानि उम्र का मालिक चन्द्र पूरी तरह बर्बाद। बुध मन्दा खाना नं0 3 दुनिया से कूच के वक्त राहे रवानगी। जब आखिरी वक्त आया तो राजेश खन्ना जी ने कहा, "टाईम हो गया है..... पैकअप।"

"मौत आनी है आयेगी इक दिन,
जान जानी है जायेगी इक दिन,
ऐसी बातों से क्या घबराना।"