Friday, November 19, 2010

मंगल

मंगल नेक, शस्त्रधारी, सुर्ख रंग, नेक होने पर जिस्म में खून रूह की तरह जंगल में मंगल किया और बदी से हिरण की तरह भागा। मंगल बद हुआ तो कोई बदी न छोड़ी और हर एक को तलवार के घाट उतारा मगर मुआफ हरगिज़ न किया। शुतर बेमुहार कीनासाज़, रेगिस्तान का जहाज़ जिसे रेत से मुहब्बत है और पानी की परवाह नही।


अगर जन्म कुण्डली में सूरज बुध इकट्ठे हो तो मंगल नेक, अगर सूरज सनीचर इकट्ठे तो मंगल बद होगा। खाना पीना, भाई बन्दो की सेवा जंग व जदल, जिस्मानी दुख: बिमारी 28 सालां उम्र का ज़माना। तमाम जिस्म की दरमियानी जगह नाभि मंगल की राजधानी और सूरज की सीधी किरणों की जगह मानी गई है। इसलिये कुण्डली की नाभि खाना नं0 4 के ग्रह, मंगल की नेक और बुरी हालत का पता बतायेंगे यानि जैसे नं0 4 मे बैठे होने वाले का असर होगा वही हालत मंगल के खून की होगी। न सिर्फ दान इसका ज़रूरी पहलू और कुल दुनिया के भलाई के काम और भण्डारे खोलने की हिम्मत इसकी नेकी का पता बतायेंगे बल्कि कुल खानदान की लावल्दी दूर करेगा। अकेला बैठा हुआ मंगल मानिंद जंगल का शेर बहादुर होगा। मंगल नेक अपने असर की निशानी हमेशा उस ग्रह की चीज़ों के ज़रिए देगा जोकि कुण्डली में उम्दा हों और उस ग्रह का अपना वक्त असर देने का हो । मंगल बद मन्दे ग्रहों की चीज़ों, इसके मन्दा असर देने के वक्त बुरे असर की हवा का आना पहले बतला देगा। हर हालत में मंगल के असर में यकसां लगातार दरिमयाना रफतार न होगी। ख्वाह मंगल नेक शेर बहादुर के हमला की ताकत का हो। ख्वाह मंगल बद डरपोक हिरण की तरह कोसों ही दूर भागता हो।


बदी का तुख्म, खून का बदला खून से लेना हरदम ज़रूरी जब घी (शुक्र) और शहद (मंगल नेक) बराबर के हों तो ज़हर (मंगल बद) हाेंगा यानि सबसे पहले शुक्र और बाद में सूरज का फल यके बाद दीगरे मन्दा होगा। लेकिन अगर सूरज या चन्द्र की मदद मिल जावे तो मंगल बद न होगा। कोई दो पापी (सनीचर राहु, सनीचर केतु) या कोई दो बाहम दुश्मन (बुध केतु, सूरज शुक्र) मंगल के साथी होवें तो मंगल बद न होगा। जब अपनी मार पे आयेगा, एक का बुरा न करेगा बल्कि अगर हो सके तो कुल खानदान का बेड़ा गर्क करेगा। जब बुध मन्दा हो, मंगल बद ओर भी मन्दा होगा और खूनी शेर बहादुर की बजाये बकरियों में रहने वाला पालतू शेर की तरह अपनी असलियत से बेखबर होगा।


खाना नं0 4 और 8 का मंगल आमतौर पर बद ही होता है। उपाय के लिए हर रोज़ सुबह पानी से दांत सफा करना मददगार होगा। चन्द्र का उपाय या बढ़ के दरखत को दूध में मीठा डालकर गीली की हुई मिट्टी का तिलक पेट की खराबियों को दूर करेगा। आग के वाक्यात पर छत पर खाण्ड की बोरियां, शहद से मिट्टी का बर्तन भरकर बाहर शमशान में (लावल्दी के वक्त या औरत, औलाद की बरबादी), मृगशाला (लम्बी बिमारियों से छुटकारा), चांदी चकौर की मदद या जनूबी दरवाज़ा लोहे से कील देवें । काले, कान,े लावल्द, डेक के दरखत से दूरी पकड़ें। सूरज, चन्द्र, बृहस्पति की अशिया कायम करें। चिड़े चिड़ियों को मीठा देना और हाथी दांत पास रखना मुबारक होगा।


खुलासातन कुण्डली में अगर मंगल नेक तो कुशल मंगल और बद तो मंगल दंगल। मिसाल के तौर पर वरूण गांधी की कुण्डली।



जन्म: 13-3-1980

मंगल बद खाना नं0 4, जो पानी में भी आग लगा दे। जिसने दुनिया की कोई बदी न छोड़ी। बेमुहार ऊँठ की तरह गर्दिश का सैलानी। अपने ही परिवार की औरतों पर भारी। मां जवानी में बेवा हो गई। खुद मियां फज़ीहत औरों को नसीहत। वाह रे ! मंगल बद।

Monday, November 1, 2010

बृहस्पति

अगर बृहस्पति के ज़रद रंग ज़माने के शेर ने इन्सानी गुरू के चरणों में सोने (नींद) से दुनिया को सोना (धात) बख्शा तो केसर ने दुनिया को खुशी की मौत सिखाई । बृहस्पति..... श्री ब्रह्म जी महाराज, दोनो जहां और त्रिलोकी के मालिक ।


इन्सान की मुट्ठी के अन्दर के खाली खलाव में बंद या आकाश में फैले रहने, हर दो जहां में जा आ सकने और तमाम ब्रह्माण्ड व इन्सान के अन्दर बाहर चक्र लगाने वाली हवा को ग्रह मण्डल में बृहस्पति के नाम से याद किया गया है। जो बन्द हालत में कुदरत से साथ लाई हुई किस्मत का भेद और खुल जाने पर अपने जन्म से पहले भेजे हुये खज़ाने का राज और बंद और खुली हर दो हालत की दरमियानी हद इन्सान शरीफ. के शुरू (जन्म लेने) व आखीर (वफ़ात पाने) का बहाना होगी । यह ग्रह तमाम ग्रहों का गुरू और ज़ाहिरा गैबी, दोनों जहां का मालिक माना गया है। इसलिये एक ही घर मे बैठे हुये बृहस्पति का असर बेशक मानिन्द राजा या फकीर, सोना या पीतल, सोने की बनी हुई लंका तक दान कर देने वाला प्राणी या सारे ज़माने का चोर साधु जिसका धर्म ईमान न हो, हर दो हालत में से ख्वाह किसी भी ढंग का हो मगर उसका बुरा असर शुरू होने की निशानी हमेशा सनीचर के मन्दे असर के ज़रिए होगी और नेक असर खुद बृहस्पति के ग्रह के मतल्ल्का अशिया, कारोबार या रिश्तेदार मतल्लका बृहस्पति के ज़रिए ज़ाहिर होगा।

नर ग्रहों (सूरज,मंगल) के साथ या दृष्टि वगैरह से मिलने पर मामूली तांबा भी सोने का काम देगा। स्त्री ग्रह (शुक्र या चन्द्र) के साथ या दृष्टि के ताल्लुक से मिट्टी से भरा हुआ पानी भी उत्ताम दूध का काम देगा। बृहस्पति के बगैर तमाम ग्रहों में मिलने जुलने की या दृष्टि की ताकत पैदा न होगी। पापी ग्रह (राहु, केतु, शनीचर) मन्दे होने पर बृहस्पति सोने की जगह पीतल, मिट्टी, हवा की जगह ज़हरीली गैस का मन्दा असर देगा। बृहस्पति और राहु दोनों खाना नं0 12 (आसमान) में इकट्ठे ही माने गये हैं।

बृहस्पति दोनों जहां (गैबी व ज़ाहिरा) का मालिक है जिसमें आने और जाने के लिए नीले रंग में राहु का आसमानी दरवाज़ा है। इसलिए जैसा यह दरवाज़ा होगा वैसा ही हवा के आने जाने का हाल होगा। अगर राहु टेडा चलने वाला हाथी , सांस को रोकने वाला कड़वा धुआं या ज़मीन को पताल से भूंचाल बनकर हिलाता रहे तो बृहस्पति भला नही हो सकता। लेकिन अगर राहु उत्ताम और मददगार दरवाज़ा हो तो बृहस्पति कभी बुरा न होगा।

हर तरफ से अकेला बृहस्पति ख्वाह वह दृष्टि वगैरह से कितना भी मन्दा होवे पर टेवे वाले पर कभी मन्दा असर न देगा। बरबाद हो चुका बृहस्पति आम असर के लिए खाली बुध गिना जायेगा। जिसका फैसला बुध के जाति सुभाव के असूल पर होगा। दुश्मन ग्रहों (बुध, शुक्र, राहु या सनीचर बहैसियत पापी ग्रह यानि जब सनीचर को राहु या केतु किसी तरह भी बरूये दृष्टि या साथ वगैरह से आ मिलते हों ) के वक्त मन्दा हो जाने की हालत में बृहस्पति अमूमन बुध का असर देगा और बृहस्पति का मन्दा असर काबिले उपाय होगा । जिसके लिये साथी दुश्मन ग्रह का उपाय मदद देगा।

ग्रह मण्डल में सब ग्रहों में छेड़छाड़ करने कराने वाले दुनियावी पाप (सिर्फ दो ग्रह राहु केतु का दूसरा नाम) को चलाने वाला बृहस्पति है। गोया राहु केतु के पाप करने की शरारत से पहले बृहस्पति खुद अपनी अशिया या कारोबार या रिश्तेदार मतल्लका बृहस्पति के ज़रिए खबर दे देगा। जिसके लिए ख्याल रहे कि


''असर जलता दो जहां का, ग्रहण शत्रु साथी जो ।
चोर बना 6 ता 11, मंगल टेवे ज़हरी जो ॥''
मिसाल के तौर पर मुरार जी देसाई जी की कुण्डली ।


                                                                     जन्म: 29-2-1896


वह नेहरू जी और इन्दिरा जी की बज़ारत में वज़ीर रहे। पर इन्दिरा जी ने उनको निकाल बाहर फैंका। कुण्डली में केन्द्र खाली, सुरज और चन्द्र ग्रहण । पापी ग्रह सनीचर, राहु, केतु भी मन्दे। मगर पापी ग्रहों का भी बृहस्पति खाना नं0 2 को सलाम , जिसने आखिर देसाई जी को वज़ीर-ए-आज़म की कुर्सी पर बिठा दिया। सलाम ! गुरू तुझे सलाम!

Monday, August 30, 2010

किस्मत

''घर चलकर जो आवे दूजे, ग्रह किस्मत बन जाता है।

खाली पड़ा घर 10 जब टेवे, सोया हुआ कहलाता है। ''

किस्मत लक्ष्मी के नाम से मशहूर है जो बृहस्पति का दूसरा नाम है। 12 साल तक बच्चे और 70 साल के बाद किस्मत का एतबार नही। किस्मत एक ऐसी चीज़ है जो दुनियावी कारोबार में न हाथ की मदद ढूंढे और न ही उसमें आंख को काम करना पड़े। हर काम का नतीजा खुद-ब-खुद नेक हो जावे। धन्ना भगत, बृहस्पति नं0 2 की गायें राम चरावे। मगर सुदामा भगत, बृहस्पति नं0 9 अपने सखा कृष्ण के लिये तोहफा लेकर जावे।


खाना नं0 2 व खाना नं0 6 का फैसला खाना नं0 8 को साथ लेकर होगा। कुण्डली के बाद के घरों के ग्रहों के जागने के दिन से किस्मत का जागना, मुराद होगी। बन्द मुठ्ठी के अन्दर के खानाें (1,7,4,10) के ग्रह ख्वाह भले हों ख्वाह बुरे कुण्डली वाले की किस्मत के बुनियादी पत्थर होंगे। किस्मत के ग्रह का जागने का वक्त किस्मत के असर का वक्त होगा। किस्मत के ग्रह कई एक हों  सब बाहम पूरे मददगार होंगे। सब से अच्छी किस्मत, बृहस्पति का किस्मत का ग्रह होता है। ''बृहस्पति नं0 2 कायम और खाना नं0 9 में दुश्मन (बुध, शुक्र, राहु) न हों और न ही नं0 9 मन्दा हो रहा हो।''


किस्मत का ग्रह


सबसे उत्ताम दर्जा पर वह ग्रह होगा जो राशि का ऊँच फल देने का मुकर्रर है, जो हर तरफ से कायम, साफ और दुरूस्त हो और उसमें किसी तरह से किसी साथी ग्रह का बुरा असर न मिला हुआ होवे। उसके बाद पक्के घर का ग्रह, घर का मालिक दोस्त ग्रहों का बना हुआ दोस्त ग्रह किस्मत का मालिक ग्रह होगा।


किस्मत के ग्रह की तलाश


सबसे पहले 12 राशियों के उच्च फल देने वाले ग्रहों की तलाश करें। फिर 9 ग्रहों से जो उम्दा हो वो लें और बाद में बन्द मुठ्ठी के खानों (1,7,4,10) के ग्रहों से जो उम्दा हा,े लें । उच्च फल देने वालों में से जो सबसे तसल्ली बख्श और उच्च हो, लें । घर के मालिक ग्रहों से सबसे ज्यादा ताकतवर वाले को लें। अगर मुठ्ठी के चारों खाने खाली हों तो खाना नं0 9 के ग्रहों लेंगे। वह भी खाली हो तो, खाना नं0 3 के ग्रहों को लें। अगर वह भी खाली हो तो खाना नं0 11 के ग्रहों को लेंगे। अगर वह भी खाली हों तो खाना नं0 6 देखेंगे। अगर वह भी खाली हों तो खाना नं0 12 में तलाश करेंगे। अगर वह भी खाली हो तो खाना नं0 8 में बैठकर देखेंगे कि आया किस्मत का ग्रह, जिसमें ऊपर की तमाम शर्तें न हों, नष्ट ही तो नही हो गया ? यह तलाश जन्म और चन्द्र कुण्डली दोनों से होगी। किस्मत का ग्रह बातरतीब बृहस्पति के बाद सूरज के बाद चन्द्र के बाद शुक्र के बाद मंगल के बाद बुध के बाद सनीचर के बाद राहु के बाद केतु का असर देता है।







                             कुण्डली नं0 1 जन्म 28.12.1937      कुण्डली नं0 2 जन्म 28.9.1982
मिसाल के तौर पर कुण्डली नं0 1 रतन टाटा जी की है और कुण्डली नं0 2 रणबीर कपूर की है। दोनो ही कुण्डिलयों में किस्मत का ग्रह बृहस्पति और साथ में सूरज है। रतन टाटा जी ने अपने परिवार के कारोबार को बहुत आगे बढ़ाया है। ऐसी ही उम्मीद फिल्मी दुनियां में, रणबीर कपूर से की जा सकती है। समझदार के लिए इशारा ही काफी है।

Monday, July 19, 2010

सूरज

आकाश में रौशनी, ज़मीन के अन्दर गर्मी, राजा फकीर में सच्चाई, ज़माने में परर्विश और उन्नति की ताकत को सूरज के नाम से पुकारा गया है। जिसकी मौजूदगी का नाम दिन और गैरहाज़िरी का वक्त अंधेरी रात का दौर दौरा होगा। इन्सानी वजूद में रूह की हरकत और अपने जिस्म से दूसरे की मदद की हिम्मत इसका करिश्मा है। चलते चले जाना मगर अपना आखीर न बताना बल्कि पीछे हटे या रास्ता बदले बगैर फिर उसी जगह ही आकर हर रोज़ सुबह शाम करते जाना, इसका एक अजूबा है।


उत्तम सूरज वाला कुल दुनिया को रौशन करता और हर एक दौलत बख्शता है। लम्बी उम्र का मालिक होगा। तबीयत में अन्दर बाहर दोनों ही तरफ से सच्चा होगा। मन्दे वक्त पर बुरा असर रात के ख्वाब की तरह निहायत छुपे ढंग पर ज़ाहिर करेगा। किसी का सवाली न होगा बल्कि अगर हो सके तो किसी का सवाल पूरा कर देगा। खैरात न देवे तो बेशक मगर उल्टा फकीर की झोली से माल हरगिज़ न निकालेगा। खुद चोट खायेगा और बढ़ेगा मगर किसी को चोट न मारेगा । गो मौत को किसी ने भला नही गिना मगर सूरज उत्तम के वक्त मौत भी भली होगी ।


राज दरबार से खुद अपने हाथों धन-दौलत कमाने का और बालिग होने का 22 साला उम्र का अहद जवानी का जोश हर तरफ नई रौशनी देगा। सूरज की रौशनी और धूप में गर्मी का दर्जा हरारत राहु केतु की हालत से पता चलेगा। उत्तम सूरज के वक्त चन्द,्र शुक्र और बुध का फल अमूमन भला ही होगा। केतु खाना नं0 1 या मंगल नं0 6 में हो तो सूरज का असर नेक बल्कि ऊँच हालत का होगा ख्वाह सूरज किसी भी घर में और कैसा भी बैठा हो। जन्म कुण्डली के खाना नं0 1, 5, 11 में सूरज होने के वक्त टेवा बालिग ग्रहों का होगा जो बच्चे के माता के पेट में आने के वक्त ही से अपना असर शुरू कर देगा।


मन्दे असर का उपाय


अगर सूरज का खुद अपना ही असर दूसरे ग्रहों पर बुरा हो रहा हो तो सूरज के दोस्त ग्रह चन्द्र, मंगल, बृहस्पति को नेक कर लेना मददगार होगा। खाना नं0 6,7 में बैठा होने के वक्त आम मन्दी हालत में बुध का किसी उपाय से नेक कर लेना मददगार होगा। जब कोई ग्रह सूरज से नष्ट या बर्बाद हो रहा हो तो खुद सूरज का उपाय करें। जब सूरज का खुद अपना असर नष्ट या बर्बाद हो रहा हो तो दुश्मन ग्रह को, जो उसके असर को बर्बाद कर रहा हो, नेक करें।


जन्म 14-11-1889



मिसाल के तौर पर मरहूम जवाहर लाल नेहरू जी की कुण्डली में सूरज अपने घर अपने खाना नं0 5 में । शुक्र बुध मुश्तरका भी मसनुई सूरज । लिहाज़ा सूरज काफी ताकतवर । राहु केतु की वजह से सूरज का असर होने में ज़रा देर हुई। नेहरू जी सन् 1947 में आज़ाद मुलक के पहले वज़ीर-ए-आज़म बने और मरते दम सन् 1964 तक इसी ओहदे पर बने रहे। इस दौरान कोई भी दूसरा नेता उनका सामना न कर सका। यह उत्तम सूरज की एक बढ़िया मिसाल है।


Tuesday, June 22, 2010

शुक्र की दो रंगी मिट्टी

खाना नं01
काग रेखा या मच्छ रेखा, यक तरफा ख्याल का मालिक, तख्त का मालिक, रज़िया बेगम रानी मगर एक हब्शी गुलाम पर मर मिटी।


खाना नं02
उम्दा ग्रहस्थ हर तरफ से सिवाये बच्चे बनाने के, अपनी ही खूबसूरती और तबीयत के आप मालिक, खुद परस्ती, स्कूल मिस्टरैस, हर एक की दिलदादा औरत मगर वह खुद किसी को पसंद न करे।

खाना नं03
मर्द की हिम्मत-हैसियत,गाय की जगह बैल का काम देवे, ऐसी कशिश कि ऐसे टेवे वाले पर कोई न कोई औरत फरेफता (मोहित) हो ही जाया करती है।

खाना नं0 4
एक जगह दो औरत या दो मर्द मगर मर्द औरत दोनों ही ऐसी दो गाय या दो बैल कि बच्चा दोनो ही से न बने ।


खाना नं0 5
बच्चों भरा परिवार या ऐसे बच्चों का पैदा करने वाला जो उसे बाप न कहे या न कह सके।

खाना नं0 6
न औरत न मर्द, लक्ष्मी भी ऐसी जिसकी कोई कीमत न देवे या खुसरा मर्द या बांझ औरत ।


शुक्र खाना नं0 1 से 6 तक उठती जवानी में ऐश व इश्क की लहरों से मिटट्ी की पूजना में अन्धा होगा।

खाना नं0 7
सिर्फ साथी का असर, जो और जैसे तुम वह और वैसे ही हम ।


खाना नं0 8
जलती मिटट्ी और हर सुख में नाशुकरा, उत्तम तो भवसागर से पार कर दे।

खाना नं0 9
खुद शुक्र की अपनी बिमारी के ज़रिए धन हानि मगर घर में ऐश व आराम के सामान या धन की कमी न होगी।


खाना नं0 10
खुद सनीचर मगर औरत तो ऐसी जो मर्द को निकाल कर ले जावे, अगर मर्द तो ऐसा कि वह किसी न किसी दूसरी औरत जात को अपनी मन्जूरे नज़र रखा ही करता है।

खाना नं0 11
लट्टू की तरह घूम जाने वाली हालत मगर बचपन की मोह माया की भोली भाली तबीयत की मूरत और रिज़क के चश्मा का निकास।


खाना नं0 12
भवसागर से पार करने वाली गाय, औरत,लक्ष्मी जिसकी खुद अपनी सेहत के ताल्लुक में या सारी ही उम्र रोते निकल गई ।

शुक्र खाना नं0 7 से 12 तक बुढ़ापे में नसीहतें करे।

हेमा मालिनी




यह कुण्डली बालीवुड सुन्दरी हेमा मालिनी जी की है। शुक्र खाना नं0 2, अपनी ही खूबसूरती और तबीयत की आप मालिक, हर एक की दिलदादा औरत मगर वह खुद किसी को पसन्द न करे। अपने वक्त की ड्रीम गर्ल यानि सपनों की रानी जो आज भी लाखों दिलों की धड़कन है।

Tuesday, June 8, 2010

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी जी मुल्क की एक महान शख्सियत थे जिनको आदर से बापू भी कहा जाता था। आज़ादी के बाद उनको बाबा-ए-कौम भी माना गया। यकीनन उनकी जन्म कुण्डली भी खास होनी चाहिए जो इस तरह हैं ।





कुण्डली में 9 में से 7 ग्रह केन्द्र के चारों खानों में । एक मज़बूत कुण्डली किसी गैर मामूली हस्ती की। बृहस्पति खाना न0 7, पिछले जन्म का साधु जो तपस्या के लिए जंगल में नही गया पर अपनी 45 साला उम्र तक कुछ खास नही। मंगल बुध शुक्र खाना नं0 1, पानी मे तैरने वाला पत्थर, राजा की हैसियत का मालिक और शुक्र, शुक्र का पतंग। खाना 10 में चन्द्र ग्रहण, धन दौलत से दूर। सूर्य खाना नं0 12, पराई आग में जल मरने वाला। शनि खाना नं0 2 से सन्यास और केतु खाना नं0 4 से सबर।


गांधी जी ने अपनी 45 साला उम्र के बाद ही अन्दोलन शुरू किये और मुल्क की सियासत को एक नई विचारधारा दी। बृहस्पति की वजह से घर परिवार की बजाय आश्रम में रहने लगे और धर्मी हो गये। शुक्र की वजह से अक्सर औरतों से घिरे रहते थे, जैसे सरला देवी, मीरा बेन, सुशीला नैयर, आभा, मनी गांधी वगैरह - वगैरह । कहा जाता है कि सरला देवी पर तो गांधी जी कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गये थे और उनको भी गांधी जी में गहरी दिलचस्पी हो गई थी। दरअसल इस महान आदमी की ज़िन्दगी के कई पहलू थे जैसा कि कुण्डली में नज़र आता है।


जब गांधी जी की मौत हुई तो उनको 79वां साल चल रहा था। वर्षफल में चन्द्र ग्रहण के इलावा सूरज ग्रहण भी लग गया और राहु के हाथी ने मंगल के महावत को ज़मीन पर पटक दिया। लिहाज़ा पिस्तौल की गोली (राहु) का निशान बन गये। मरते वक्त बापू ने कहा राम ! राम ! राम ।

Tuesday, June 1, 2010

वरूण गांधी

यह कुण्डली गांधी परिवार के दूसरे नौजवान वरूण गांधी की है। उम्र 30 साल हो चुकी है । पहला सवाल, क्या शादी होगी ? दूसरा सवाल, सियासत में क्या मुकाम होगा? दोनों सवालों का जवाब कुण्डली क ग्रहों से मिलेगा।



जन्म: 13-3-1980
खाना नं0 1 और 7 खाली , कुण्डली में न राजा न वज़ीर । किस्मत की बुनियाद का मैदान खाना नं0 10 में सूरज ग्रहण और खाना नं0 2 खाली । बृहस्पति मंगल राहु खाना नं0 4, अब बृहस्पति का सोना भी पीतल। मंगल बद जो पानी में भी आग लगा दे, जिसने कोई बदी न छोड़ी, अपने ही परिवार की औरतों पर मंदा और शनि खाना नं0 5 की बुरी नज़र चन्द्र खाना नं0 9 पर । माता जवानी में बेवा हो गई फिर बेवा दादी मारी गई। बाद में ताई भी बेवा हो गई ।
जहां तक पहला सवाल है, शादी के लिए मंगल बद का उपाय ज़रूरी । जहां तक दूसरा सवाल है, सियासत में तरक्की के लिए ग्रहण का उपाय करना होगा। वर्ना नतीजे कुछ खास न होंगे।