Friday, February 5, 2010

शादी खाना आबादी

''आकाश ज़मीन दो पत्थर 7वें, रिज़क अक्ल की चक्की हो;
दोनो घुमावे कीली लोहे की, घर आठवें जो होती हो ।''

फरमान न0 8 के मुताबिक गृहस्थ की चक्की कुण्डली के खाना नं0 7 में चलती है और चक्की घुमाने वाली लोहे कीली खाना नं0 8 में होती है। नीचे वाला पत्थर शुक्र (रिज़क) और ऊपर घूमने वाला पत्थर बुध (अक्ल) होता है। इस घर सनीचर उच्च, सूरज नीच, बुध और शुक्र पक्की हालत के ग्रह होते हैं ।
दो गृहस्थियों को जुदा जुदा रखते हुए एक कड़ी से जोड़ने वाली चीज़ आम दुनियादारों की नज़र में शादी और ग्रह चाल में मंगल की ताकत का नाम रखा गया है। यही मंगल के खून की कड़ी, लड़की और औरत में फर्क की कड़ी है। इसी वजह से शादी में मंगल गाये जाते हैं । अगर मंगल नेक हो तो शादी खाना आबादी लेकिन अगर मंगल बद हो तो शादी की खुशी के बजाये स्त्री /लक्ष्मी का सुख सागर एक दुख: का भंवर होगा। मंगल बद का वीराना होगा जिसमें सूरज की रोशनी तक की चमक न होगी। दिन की बजाये सनीचर की स्याह रात का साथ होगा। मर्द की कुण्डली में शुक्र से मुराद उसकी बीवी और औरत की कुण्डली में शुक्र से मुराद उसका शौहर होगा।
योग शादी:- फरमान नं0 17 के मुताबिक
'' पहले दूसरे 10 ता 12 , बुध शुक्र जब बैठा हो;
शनि मदद देवे 1 या 10 से, साल शादी का होता हो ।
बुध शुक्र घर 7वें बैठे , शत्रु तीन न ग्यारह हो ;
कुण्डली जन्म घर वापिस आते, वक्त शादी आ होता हो ।
बुध नाली से जब दो मिलते, शनि मदद भी देता हो;
रद्दी कोई न दो जो इकट्ठे, योग शादी को होता हो ।
बुध शुक्र जब नष्ट या मन्दे, साथ ग्रह नर स्त्री हो ;
शनि राजा या मदद दे उनको, योग पूरा आ शादी हो।
शुक्र अकेला या मिल बैठे, कुण्डली जन्म में चौथे जो ;
सात दूजे न शत्रु होते, लेख शादी का उदय हो ।
घर 7वां 2 गुरू शुक्र का, खाली टेवे जब होता हो;
गुरू शुक्र भी 2 , 7 आया, साल शादी का बनता हो ।
घर पक्का जिस ग्रह का होवे, बुध शुक्र जहां बैठा हो;
अपनी जगह दे बुध शुक्र को, सात पावे या दूसरा हो।
बुध शुक्र भी 2, 7 आवे, मदद शनि न बेशक हो ;
नष्ट निकम्मा न वह होवे, वक्त शादी को होता हो ।
औरत टेवे में गुरू जो चौथे, योग जल्द हो जाता हो ;
रवि मंगल का साथ गुरू से, ससुर औरत न रहता हो ।''

दोस्ती दुश्मनी ग्रह दृष्टि वगैरह सब को नज़र में रखते हुये वर्षफल में खानावारी हालतके हिसाब से जिस साल शुक्र/बुध को सनीचर की दोस्ती या सनीचर के आम दौरे के वक्त (सनीचर नं01) होवे तो शादी होने का वक्त और योग होगा। आमतौर पर शादी का योग शुक्र से गिनेगें। लेकिन जब बुध इन असूलों पर शादी का योग बनावे तो भी शादी का योग होगा सिवाये बुध नं0 12 के । अगर कुण्डली में शुक्र बुध बर्बाद या मन्दे हों और स्त्री ग्रह शुक्र चन्द्र के साथ नर ग्रह बृहस्पति या सूरज या मंगल मददगार साथी या मुश्तर्का (इकट्ठे) हों तो जिस साल सनीचर की मदद या उसके आम दौरे ताल्लुक हो जाये तो भी शादी होने का वक्त होगा।
मसलन् जिस साल शुक्र या बुध तख्त का मालिक या खाना नं0 2, 10 से 12 (सिवाये बुध नं0 12) में या अपने पक्के घर खाना नं0 7 में हो जावे लेकिन उस वक्त खाना नं0 3 , 11 में शुक्र के दुश्मन ग्रह (सूरज, चन्द्र, राहु) न हो या वह अपने जन्म कुण्डली के बैठा होने वाले घर में ही आ जावे । शुक्र जब खाना नं0 4 में हो चाहे अकेला या किसी के साथ तो खाना नं0 2, 7 में शुक्र का दुश्मन सूरज, चन्द्र या राहु न आया हो वर्ना शादी का काई योग न होगा। दिए हुये शादी के सालों (22, 24, 29, 32, 39, 47, 51, 60) में जिस साल सूरज चन्द्र या राहु खाना नं0 2 , 7 में न हों तो शादी होगी। ऐसी हालत में अगर बृहस्पति नं0 7 में आ जावे तो औरत औलाद के काबिल न होगी। दिए हुये सालों में शादी का योग ज़रूर है मगर शादी मुबारक न होगी। शुक्र नं0 4 की ऐसी हालत में शादी मुतल्वी (स्थगित) हो सकतीहै।
मन्दे योग का विचार

जो ग्रह शुक्र को बर्बाद करे या खुद ऐसा मन्दा हो कि शादी के फल को गैर मुबारक साबित करे मसलन चन्द्र नं0 1 के वक्त 24 या 27वें साल और राहु नं0 7 के वक्त 21वें साल शादी मुबारक न होगी। सूरज जब शुक्र के लिए ज़हरीला हो तो सूरज की उम्र 22वें साल , सूरज का दिन में वक्त पूरी दोपहर के पहले का अर्सा, सूरज का दिन इतवार या वैसे ही शादी के रस्मो रिवाज करने के लिए दिन का वक्त मुबारक न होगा।
अगर शुक्र रद्दी न हो तो शादी के लिए कोई वहम ने लेंगे। मगर अकेला सनीचर नं0 6 इस शर्त से बाहर होगा खासकर जब शुक्र भी उस वक्त नं0 2 या 12 में हो यानि उम्र का 18-19वां साल शादी के लिए गैर मुबारक ही होगा।
शादी का शुभ वक्त वर्षफल के हिसाब से :


लेकिन अगर बुध नं0 9 , 10, 12, में हो तो शादी और शादी का फल (औलाद, दुनियावी आराम) के ताल्लुक में योग मन्दा होगा खासकर जब उस वक्त राहु या केतु में से कोई खाना नं0 1,7 में बैठ जावे।


3 शुक्र बुध अपने जन्म कुण्डली वाले घर या नं0 1, 7 में आ जावें मगर शुक्र जन्म कुण्डली के खाना नं01 से 6 का न हो और उस वक्त नं0 3, 11 में सूरज चन्द्र राहु न हों ।

4 जब नं0 2, 7 खाली हो तो बुध शुक्र ही खुद 2, 7 में आने पर, बुध शुक्र बैठे घर का मालिक ग्रह नं0 2, 7 में और बुध शुक्र ऐसी जगह चला जावे जैसे शुक्र बुध नं0 3 हों, मंगल नं0 9 में तो 17वें साल, शुक्र बुध नं0 9, मंगल नं0 7 होने पर शादी का योग होगा।

5 औरत की कुण्डली में बृहस्पति नं0 4 तो जल्द शादी हो जावेगी और सूरज मंगल का साथ गुरू से हो तो उसका ससुर न होगा।

6 राहु खाना नं0 1 या 7 या किसी तरह शुक्र से मिल रहा हो तो 21 साला उम्र की शादी बेमानी (व्यर्थ) होगी । यही हालत सूरज शुक्र के मिलने पर 22 से 25 साला उम्र की शादी पर होगी। जिसके लिए उपाय ज़रूरी ।

7 जो लड़की अपने जद्दी घर घाट से उत्तार के शहर में (लड़के के जद्दी खानदान के रिहायश की जगह) ब्याही जावे तो अमूमन दुखिया होगी जब लड़की के पिता की कुण्डली में बुध नं0 6 में हो ।

8 जिस बाप की जन्म कुण्डली में चन्द्र खाना नं0 11 में हो और वह अपनी लड़की की शादी का कन्यादान तड़के (सुबह सवेरे केतू के वक्त) करे तो बाप और बेटी दोनों में से शायद ही कोई सुखिया रहेगा। यही हालत उस शौहर के साथ होगी जिस की जन्म कुण्डली में चन्द्र खाना नं0 11 में हो और वह अपनी शादी का दान लड़की के वालदैन (माता पिता) से तड़के लेवे ।

9 सनीचर खाना नं0 7 वाले की शादी अगर 22 साला उम्र तक न हो तो उसकी नज़र बेबुनियाद (अन्धापन ) होगी।

10 बृहस्पति खाना नं0 1 और नं07 खाली हो तो छोटी उम्र की शादी मुबारक होगी।

एक औरत होगी:

'' शनि शुक्र हो मदद पर बैठे, नर ग्रह शत्रु साथ न हो;
बुध शुक्र दो ऊंच या अच्छे, शनि सूरज को देखता हो।
बुध पहलें या 6वें बैठा , असर शुक्र न मन्दा हो ;
शुक्र गृहस्थी पूरा होगा, एक शादी ही करता हो ।
बुध दबाया हो ख्वाह मन्दा, शुक्र टेवे ख्वाह उम्दा हो;
बाद 28 फल शादी होता, औलाद नरीना मन्दा हो।''
खसम कहानी:-(पति खाने वाली)

'' शत्रु शुक्र बुध हर दो देखे, मिलती बैठक ख्वाह एलहदा हो;
सूरज केतु आ बुध पर चमके, खसम खानी वह औरत हो ।''
औरत और चाहिये:-
'' मन्दा शुक्र या दुश्मन साथी, रवि शनि को देखता हो;
बुध बैठा 5, 8वें पापी, साथ शुक्र 2 चौथा हो ।
नीच गुरू हो 10वें मिट्टी, रवि भी 5वें बैठा हो;
औरत पर औरत मरती, साथ शनि ख्वाह मिलता हो। ''
जब शुक्र बुध नष्ट हो तो शादी का योग देखने के लिए शुक्र की जगह चन्द्र और बुध के एवज़ में नर ग्रह लेंगें जो जन्म कुण्डली में उम्दा हों । शुक्र के दायें या बायें पापी ग्रह हों या शुक्र बैठा होने वाले घर से चौथे, 8वें मंगल सूरज सनीचर में से कोई एक या इकट्ठे हों तो औरत जलकर मरे या शुक्र का फल जल जावे । ऐसी हालत में औरत की बजाये गाय का तबादला या गऊदान मददगार होगा। जन्म कुण्डली में शुक्र कायम या अपने दोस्तो यानि बुध सनीचर केतु के साथ साथी या दृष्टि में हों, उनसे मदद लेवें तो औरत एक ही कायम।
दुश्मन ग्रहों से अगर शुक्र रद्दी तो तायदाद (गिनती) औरत ज्यादा । सूरज बुध राहु मुश्तरका शादियां एक से ज्यादा मगर फिर भी गृहस्थ का सुख मन्दा । बुध खाना नं0 8 में तायदाद औरत ज्यादा मगर सब औरतें ज़िन्दा होवें । जितनी दफा बर्षफल में सूरज और सनीचर का बाहमी (आपस में) टकराव आ जावे उतनी तायदाद तक शादियां होंगी खासकर सूरज नं0 6 और सनीचर नं0 12 हो तो औरत पर औरत मरती जावे या मां बच्चों का ताल्लुक न देखे या सुख देखने से पहले ही मरती जावे यानि बुध नं0 8 या शुक्र नं0 4 मगर 2 , 7 खाली, औरतें (बीवियां) एक से ज्यादा मगर सब ज़िन्दा।
बुध शुक्र दोनो ही नेक हालत के और मंगल नेक का साथ हो तो शादी औलाद का फल नेक व उम्दा होगा।
चन्द मिसालें:
कुछ जानी मानी कुण्डलियां बतौर मिसाल पेश हैं । समझदार के लिए इशारा ही काफी होगा।




1 अटल बिहारी वाजपेयी जी की कुण्डली में खाना नं0 7 खाली जिसका मालिक शुक्र खाना नं0 2 में चन्द्र के साथ मन्दा । बुध खाना नं0 3 में रद्दी और मंगल खाना नं0 6 मन्दा । लिहाज़ा शादी न हुई ।

2 लता मंगेशकर जी की कुण्डली में खाना नं0 7 खाली जिसका मालिक शुक्र खाना नं0 4 में मन्दा । मंगल खाना नं0 6 में और शनि खाना नं0 8 में मन्दा । लिहाज़ा शादी न हुई।

3 इन्दिरा गांधी जी की कुण्डली में खाना नं0 7 में चन्द्र जिस पर शनि का मन्दा साया। शुक्र राहु के साथ खाना नं0 6 में मन्दा। मंगल की वजह से शादी तो हुई मगर पति का साथ लम्बा न चला ।

4 ऐ0पी0जे0 अबदुल कलाम जी की कुण्डली में खाना नं0 7 खाली जिसका मालिक शुक्र खाना नं0 11 में कमज़ोर । शनि खाना नं0 1 और बुध खाना नं0 10 में मन्दा । लिहाज़ा शादी न हुई ।

5 सोनिया गांधी जी की कुण्डली मे खाना नं0 7 खाली जिसका मालिक शुक्र खाना नं0 4 में मन्दा । मंगल खाना नं0 6 में मन्दा । शादी तो हुई मगर पति का साथ लम्बा न चला।

6 आशा भौंसले जी की कुण्डली में खाना नं0 7 में मंगल। शुक्र खाना नं0 6 में बृ0 के साथ मन्दा । दोबारा शादी करने पर भी पति का साथ लम्बा न चला।
शादी का होना, न होना या होकर खराब हो जाना किसी के बस की बात नही। यह सब तो ग्रहों का खेल है । मगर लाल किताब के उपायों से ग्रहचाल को दुरूस्त करके फायदा लिया जा सकता है।

2 comments:

Kunwar Vishal said...

Thakur Sahib,
very good.but if given examples are with refernce of particular explanation of farmaan then it will be appreciateable.
With Regards
Kunwar Vishal

Vijay Goel said...

Very informative article.

Vijay Goel
Jaipur

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