Monday, September 9, 2013

राज कौर

हर कुण्डली में अक्सर कोई न कोई बात सीखने को मिलती है। पेश है ऐसी ही कुण्डली एक खूबसूरत लड़की की जो पढ़ी लिखी और सरकारी मुलाज़िम है मगर शादी में देरी हो गई।

           जन्म: 8.9.1978                         वर्षफल 35 साल


                
                                                             

            राज कौर जब मुझे पहली बार मिली तो उसकी उम्र 31साल थी। सवाल था शादी का। कुण्डली देखकर मैने उसको बताया कि बुध रूकावट डाल रहा है। उसका उपाय कर लिया जायेतो बात बन जायेगी पर बात आई गई हो गई।
            पिछले महीने राज फिर मुझे से मिली। सवाल वही था शादी का । पुरानी बातें ताज़ा हो गईं। उसने बताया कि कई उल्टे सीधे उपायों में रूपया पैसा और वक्त बर्बाद किया पर नतीजा कुछ न निकला बल्कि परेशानी ही हुई। उम्र भी 34-35 साल हो गई। अब बुध का उपाय कर लिया है। उसकी मां ने बताया कि उसे तो फिक्र में ठीक तरह नींद नही आती। थोड़े फर्क पर राज की दो छोटी बहने भी हैं। यानि राज की शादी एक मसला बन गई। खैर मैने तसल्ली देते हुए शुक्र का उपाय करने के लिए कहा।
            राज की कुण्डली पर नज़र डालें तो बुध खाना नं0 11 में है। 34 साला उम्र तक रूकावट जो अब दूर हो गई । बुध का उपाय भी कर लिया। अब रहा शुक्र जो खाना नं0 1 में चन्द्र के साथ मन्दा हो रहा है । चन्द्र शुक्र मुश्तर्का यानि दूध में दही, तो क्या बना ? दोनो खराब हो गए । दुरूस्ती के लिए इनका उपाय ज़रूरी । चन्द्र को 42 दिन शुक्र से जुदा किया जाये तो मंगल से मंगल गीतों की उम्मीद की जा सकती है और चन्द्र की बेल चल सकती है। समझदार के लिए इशारा ही काफी। यह उपाय असली लाल किताब के मुताबिक ही होगा।


Monday, August 12, 2013

सवाल

क्या मां कई सालों से बिमार है ?
हां ! उसकी दवा पर काफी खर्च होता है ।
क्या परिवार की रोज़ी रोटी सनीचर के किसी काम काज से चलती है ?
हां, जूतों का कारोबार है ।
क्या भाई है ?
हां, है ।
क्या अभी शादी नही हुई ?
हां, नही हुई ।

यह बातें नीचे दी गई कुण्डली से ताल्लुक रखती हैं।



समझदार के लिए इशारा ही काफी । कुण्डली में चन्द्र ग्रहण है जिसका मन्दा असर मां पर ज़ाहिर है। बाद में असर खुद पर होगा। बुध की नीयत ठीक नहीं। इसका असर खाना नं0 3,4,5,9 और 11 पर है। ऐसे में अच्छे की उम्मीद कम होगी। मंगल नेक नही है। कुण्डली वाले का बड़ा भाई शादीशुदा है। उसकी औरत रूठकर कई सालों से अपने मायके रहती है। खुद कुण्डली वाला नेक है मगर हालात नेक नही। जिसके लिए बुध का उपाय मददगार होगा। ग्रहण के उपाये से मां को आराम मिलेगा और खुद भी चैन पायेगा। मंगल को नेक करना होगा। फिर कहीं शादी की बात बनेगी।

Tuesday, July 9, 2013

मोदी

गुजरात के तीसरी बार बने मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी आजकल खबरों में हैं। हाल ही में पार्टी ने उनको चुनाव प्रचार कमेटी का सदर बनाया । जिसे लोगों ने उनको प्रधानमन्त्री का उम्मीदवार समझ लिया। लिहाज़ा पार्टी के कुछ नेता नाराज़ भी हुये। अडवानी जी ने तो अस्तीफा ही दे दिया पर बात न बनी क्योंकि अस्तीफा वापिस लेना पड़ा। तो क्या मोदी जी के सितारे बुलन्द हैं ? जिसके लिए उनकी जन्म कुण्डली का जायज़ा लेना होगा। उनकी कुण्डली इस तरह बताई जाती है।




समझदार के लिए इशारा ही काफी । कुण्डली के केन्द्र खाली । अपने लिये सब कुछ खुद ही करना पड़े। चन्द्र मंगल मुश्तर्का खाना नं0 2 और खाना नं0 8 खाली, दूध में शहद की तरह नेक असर। बृहस्पत खाना नं0 5 और उसके दोस्त ग्रह खाना नं0 2 और खाना नं0 12 में मदद पर । शुक्र शनि मुश्तर्का खाना नं0 11 और खाना नं0 3 खाली, मस्मुई केतु उच्च और बुध खामोश। सूर्य बुध केतु मुश्तर्का खाना नं0 12 और राहु खाना नं0 6, राजयोग मगर रकीबों की तरफ से मुखालफत होती रहे। कुण्डली में हल्का सा सूर्य ग्रहण है जिसका साया राज दरबार पर होगा।

चन्द्र की उम्र 24 साल से काम काज शुरू करे। मंगल की उम्र 28 साल से आगे बढ़े। राहु की उम्र 42 साल से अपने लिये खास मुकाम बना ले। 50 साला उम्र से बृहस्पत खड़ा हो जावे। इसी दौरान मोदी जी पहली बार सूबे के मुख्यमन्त्री बने।कुल मिलाकर राज दरबार या परिवार । राज दरबार तो है शायद परिवार नहीं ।

अगले साल लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं। अब सवाल यह है कि क्या मोदी जी मुल्क के वज़ीर-ए-आज़म बनेंगे ? उम्मीद तो है मगर बुध खाना नं0 12 का कोई भरोसा नही। अडवानी जी की कुण्डली में भी बुध खाना नं0 12 में है जिसने उनको प्रधानमन्त्री नहीं बनने दिया। इसलिए बुध का उपाय कर लेना ही बेहतर है। आमीन ।

Sunday, June 16, 2013

गीता

हर शख्स अपने मुस्तक्बिल के बारे अच्छा हीं तसव्वुर करता है। मगर कई बार हो कुछ और ही जाता है। कुछ ऐसा ही गीता के साथ हुआ। कुछ दिन पहले जब मुझे पता चला कि उसका अचानक इन्तकाल हो गया तो मन उदास सा हो गया। वह एक अच्छी और मेहनती लड़की थी। उसने भी अपने आने वाले कल के लिये सुहाने ख्वाब देखे थे। मगर उसके घर के हालात ठीक न थे। जिसकी वजह से उसे 14-15 साला उम्र से रोज़ी रोटी के लिये काम काज करना पड़ा। 17-18 साला उम्र में बिमार बाप का इन्तकाल हो गया जिससे उसकी जिम्मेदारी बढ़ गई। उसने इस साल मार्च में मुझे अपनी कुण्डली दिखाई। ग्रहों का जायजा लेते हुये मैंने कहा कि इस साल सेहत का खास ख्याल रखने की ज़रूरत है। उसकी कुण्डली इस तरह है।



समझदार के लिए इशारा ही काफी। चन्द्र खाना नं0 7 में और उसके घर खाना नं0 4 में शनि । खाना नं0 1 खाली। बृहस्पत मंगल मुश्तर्का खाना नं0 9 में और खाना नं0 3, 5 खाली। सूर्य शुक्र बुध राहु मुश्तर्का खाना नं0 6 पाताल में। उसपे सूर्य को ग्रहण। खाना नं0 6 में ग्रहों का मन्दा असर। आप और बाप का साथ लम्बा न चले। अगर चले तो बाप की सेहत खराब रहे। राहु खाना नं0 6 में साथी ग्रहों का फल खराब कर रहा है। ऐसी हालत में नतीजा अच्छा कैसे हो सकता है ?

कुण्डली के खाना नं0 6 के ग्रह इस साल वर्षफल में खाना नं0 8 मुकाम फानी में। शनि खाना नं0 3 राहे रवानगी यानि दुनिया  से चले जाने का रास्ता। ऐसे में मौत नहीं तो मौत का बहाना ज़रूर बने। नतीजा 31 मई 2013 को गीता की अचानक मौत हो गई। ज़िन्दगी बेवफा ही निकली।

Friday, May 3, 2013

जनरल मुशरर्फ


पाकिस्तानी फौज के साबिका जनरल परवेज़ मुशरर्फ आजकल अख़बारों की सुर्खियों में हैं। वह चार साल के बाद अपने वतन वापिस लौटे। पाकिस्तान में होने वाले चुनाव के लिए उन्होने चार जगह से कागज़ दाखिल किये मगर रद्द हो गये। बल्कि कुछ कानूनी केस उनके खिलाफ खड़े हो गये। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी का हुक्म जारी कर दिया। लिहाज़ा वह अपने ही फार्म हाऊस में कैद हो गये। सोचा था क्या, क्या हो गया ।

जनरल साहिब ने कूप करके सत्ता हासिल की थी। उन्होने आठ साल तक पाकिस्तान पर हकूमत की। उनका हुक्म चलता था और सलाम बजते थे। मगर अब कुछ भी नहीं। बस कैदी बनकर रह गये। आखिर ऐसा क्यों हुआ । यह जानने के लिए उनकी जन्म कुण्डली का जायज़ा लेना होगा। उनकी कुण्डली इस तरह बताई जाती है। समझदार के लिए इशारा ही काफी।




जन्म कुण्डली में तकरीबन सभी ग्रह अच्छी हालत में। मज़बूत राजयोग। लिहाज़ा फौज में आला ओहदे पर पहंुचे। फिर कूप करके तानाशाह बन गये। बाद में पाकिस्तान के सदर भी बने। बृहस्पत सूर्य खाना नं0 1, एक खास योग। राहु साथ बैठा है मगर दबा हुआ जो मौका मिलने पर छुपी शरारत कर सकता है। शुक्र बुध खाना नं0 2 मसनुई सूरज। मंगल खाना नं0 10 और शनि खाना नं0 12, लम्बी उम्र, जंगी ताकत और दलेरी का साथ। जब तक जिस्म पर फौजी वर्दी रही, सब ठीक रहा। सदर बनने के बाद वर्दी उतार दी। फिर हालात खराब होने लगे। शहनशाह के दरबार से आग का धूंआ बढ़ता ही गया। राहु का जंग सूरज के राज दरबार को खाने लगा और बृहस्पत का सोना भी पीतल बन गया। आखिर सत्ता छोड़नी पड़ी। फिर मुल्क से भी बाहर  हो गये।

इस साल वर्षफल में ज्यादातर ग्रह मन्दे। शनि खाना नं0 8 वारंट जारी करने वाला। बृहस्पत सूर्य राहु खाना नं0 10, राज दरबार में हर बात उलझी हुई नज़र आवे और किस्मत की चमक भी फीकी पड़ जावे। बुध खाना नं0 12 रात की नींद उजाड़ने वाला और सब उल्ट हो जावे। किस्सा कोताह ग्रहों ने मुजरिम बनाकर रख दिया। वह अपने ही मुल्क में कैद हो गये, जहां कभी राज किया करते थे। मारा ग्रहों ने जनरल मुशरर्फ तुझे, वर्ना वह रूतबा वह हकूमत किधर गई।

Saturday, April 6, 2013

संजय दत्त


खलनायक या मुन्ना भार्इ कुछ भी हो,संजय दत्त सन 1993 के मुम्बर्इ बम धमाको से बच न सका। उससे गैर कानूनी हथियार बरामद हुये थे। संजय के बाप मरहूम सुनील दत्त ने बेटे को बचाने की बहुत कोशिश की थी मगर नाकाम रहे। 13-14 साल मुकददमा चला और पांच साल की कैद हो गर्इ । जिसमें से 18 महीने की कैद संजय पहले ही काट चुका है। इस तरह अब 42 महीने की सज़ा बाकी है। एक तरफ बालीवुड तो दूसरी तरफ जेलखाना। आखिर ऐसा क्यों हुआ ? यह जानने के लिए संजय की कुण्डली का जायज़ा लेना होगा।

दत्त परिवार पर लिखी गर्इ एक किताब के मुताबिक संजय का जन्म 29 जुलार्इ 1959 को शाम के 2 बजकर 45 मिन्ट पर मुम्बर्इ में हुआ था। जिसके मुताबिक उसकी जन्म कुण्डली इस तरह बनी । समझ दार के लिए इशारा ही काफी।





जन्म कुण्डली में अच्छे ग्रह मसलन बृहस्पत, चन्द्र वगैरह और मन्दे ग्रह मसलन बुध, राहु वगैरह का जि़न्दगी पर मिला जुला असर हुआ। बुध खाना नं0 9 में सूरज के साथ, लसूड़े की गिटक की तरह किस्मत का हाल। अच्छे ग्रहों की वजह से अच्छे परिवार में जन्म हुआ । मां बाप अपने दौर के मशहूर फिल्मी अदाकार थे। मगर मन्दे ग्रहों की वजह से मां बाप का साथ लम्बा न चला। मां की मौत बिमारी से हुर्इ। बाप भी बेटे की वजह से परेशान हुआ। संजय भी नशीली गोलियां और गैर कानूनी हथियारों का शिकार हुआ। सरकारी नौकरी तो नही थी मगर सरकारी रोटी जेल में ज़रूर खानी पड़ी। दर असल परेशानी राहु की उम्र 21-22 साल से शुरू हो गर्इ थी। जब बुध की उम्र 34-35 साल आर्इ तो बात पुलिस, अदालत और जेल तक जा पहुंची। वर्षफल साल 35 में जन्म कुण्डली के खाना नं0 9 का बुध खाना नं0 9 में और खाना नं0 11 का राहु खाना नं0 11 में । नतीजा सन 1994 में संजय को जेल में जाना पड़ा।

खाना नं0 5 और 10 के ग्रहों की टक्कर । शादी कर्इ बार हुर्इ। पहली औरत बिमारी से गुज़र गर्इ। दूसरी से तलाक हुआ और अब तीसरी है। दवार्इयों से ताल्लुक बना। पहले मां दवा खाती थी। फिर खुद दवा खाने लगा। बाद में पत्नी ने दवा खार्इ। खाना नं0 2 का शनि खाना न0 10 के शुक्र को मदद दे रहा है। अच्छे ग्रहों की वजह से फिल्मों में कामयाबी मिली। एक तरफ मन्दा हुआ तो दूसरी तरफ अच्छा भी हुआ।

जन्म कुण्डली में केतु खाना नं0 5 और सूरज बुध खाना नं0 9 में है। इस साल वर्षफल में केतु खाना नं0 4 और सूरज बुध खाना नं0 10 में । लिहाज़ा अदालत ने कैद की सज़ा सुना दी। मगर मंगल खाना नं0 12 से दुनियावी और बृहस्पत खाना नं0 8 से खुदार्इ मदद दे रहा है। जिनसे राहत की उम्मीद की जा सकती है।

Sunday, March 24, 2013

ग्रह खेल

पिछले एक मज़मून दो देवियां में मिलती जुलती कुण्डलियों का जि़क्र था। उनकी जि़न्दगी के हालात भी मिलते जुलते थे। ऐसी ही एक और मिसाल मिलती जुलती कुण्डलियों की पेश है, जिनकी जि़न्दगी के हालात भी मिलते जुलते हैं। ऐसी मिसालें ज्योतिष की सच्चार्इ को दोहराती हैं। इतना ही नही, जो लोग ज्योतिष को नही मानते, उनको भी सोचने के लिए मजबूर कर देती हैं।

जि़न्दगी में हर शख्स अपने बारे में अच्छा सोचता है और अच्छा ही चाहता है। मगर कर्इ बार हो कुछ और ही जाता है। यह किस्मत नही तो और क्या है ? दूसरे लफ्ज़ों में जि़न्दगी ग्रहों का खेल ही है। यह ज़ाहिर है इन कुण्डलियों से। समझ दार के लिए इशारा ही काफी।





कुण्डली नं0 1 वाली औरत पंजाब से और कुण्डली नं0 2 वाली उत्तर प्रदेश से है। दोनों कुण्डलियों में सूरज खानां नं0 1, चन्द्र खानां नं0 6 और शुक्र खाना नं0 12 में हैं। इसके अलावा पहली कुण्डली में चन्द्र के घर मंगल बद और दूसरी कुण्डली में पापी केतु है। पहली कुण्डली में राजा सूरज का टकराव अपने वज़ीर शनि से है तो दूसरी कुण्डली में वज़ीर ही नही है। चन्द्र का असर भी शुक्र पर मंदा ही होगा। आदमी की कुण्डली में शुक्र उसकी औरत और औरत की कुण्डली में शुक्र उसका आदमी है। किस्सा कोताह ग्रह फल का मिलता जुलता असर दोनों औरतों की जि़न्दगी पर साफ नज़र आता है।

दोनों पढ़ी लिखी, खूबसूरत और नेक हैं। दोनों की शादी लगभग एक ही उम्र में हुर्इ। दोनों के पति नौकरी करते थे। दोनों के औलाद (बेटा)  भी पैदा हुर्इ। फिर दोनो लगभग एक ही उम्र में बेवा हो गर्इं। पति की मौत के बाद दोनों नौकरी करने लगी। इस तरह अब दोनो अपना गुज़र कर रही हैं। पता नही ग्रह अपनी नज़र क्यों बदल लेते हैं ? दर असल  जि़न्दगी ग्रह खेल है, कल भी ग्र्रह खेल था, आज भी ग्रह खेल है।