Monday, August 4, 2014

इन्साफ

’’घर  12  न ग्रह  जो  बोले, घर 2 में  वह बोलता है;
    फल घर 12-2 का इकट्ठा, साधु समाधि होता है।’’

इसी असूल के होसला पर इन्सान 12 राशियों के 12 साल गुज़ारता है कि आखीर कभी न कभी 12 साल के बाद ही मालिक सुन ही लेगा और यह सच है कि 12 साल के बाद सब की अमूमन सुनी जाती है और फिर वही बृहस्पत का ज़माना बदलने को खाना नम्बर 1 का सूरज निकल आता है। कुण्डली का खाना नम्बर 12 इन्साफ, आरामगाह, बृहस्पत राहू की मुश्तर्का बैठक है। यह सहन है नम्बर 6 का और 6 का मुन्सिफ होगा केतु। ज़र्द नीला मगर जुदा जुदा, बृहस्पत की दो जहां की ताकत का फैसला राहु से होगा।
कुण्डली के तमाम ग्रहों की अपील खाना नम्बर 12 पर होगी। यानि खाना नम्बर 12 का फैसला सबसे आखिरी फैसला होगा। अगर खाना नम्बर 12 के लिए खुद अपनी अपील की ज़रूरत हो तो खाना नम्बर 2 पर होगी या खाना नम्बर 12 के जाति ताल्लुक खाना नम्बर 2 का फैसला सबसे आखिरी फैसला होगा। नम्बर 12 के लिए नम्बर 1 के ग्रह की उम्र गुज़रने के बाद नम्बर 2 अपील का काम देगा। जिसका आखिरी मुन्सिफ केतु होगा। अगर नम्बर 1 खाली हो या नम्बर 1 के ग्रह की उम्र के बाद नम्बर 1 खाली हो जावे तो सब से आखिरी मुन्सिफ चन्द्र होगा। लेकिन नम्बर 1 की उम्र के अन्दर अन्दर आखिरी हाकिम हमेशा नम्बर 1 का ग्रह ही होगा।
नम्बर 12 के ग्रह का मुताल्लिका रिश्तेदार कुण्डली वाले के आराम पैदा करने के ताल्लुक में खुदाई ताकत का मालिक होगा। जिसके बाद उस ग्रह की मुताल्लिका अशिया कायम करने से सुख सागर होगा। मसलन् बृहस्पत  नम्बर 12 हो तो बाप बाबा जि़न्दा होने के वक्त तक कुण्डली वाले की रात हमेशा आराम से गुज़रेगी। उनकी वफ़ात के बाद बृहस्पत की अशिया बावक्त रात कायम रखना आराम देगा।
नम्बर 8 मन्दा और नम्बर 2 खाली हो या जब नम्बर 12 और नम्बर 8 दोनों ही घरों में  ऐसे ग्रह हों जो इकट्ठे हो जाने पर मन्दे हो जावंे तो मन्दिर से दूरी बेहतर वर्ना खाना नम्बर 8-12 की मन्दी टक्कर होगी। मसलन् बुध नम्बर 8 सनीचर नम्बर 12 तो लड़की की बीनाई बर्बाद जब मन्दिर में जावे। कुण्डली का खाना नम्बर 12 जि़न्दगी में आराम की हालत बतलायेगा। अगर इस खाने में कोई मन्दा ग्रह बैठ जावे तो दिन भर काम, रात को बेआराम और बिना वजह बदनाम वाला हाल होगा। मिसाल के तौर पर राहुल गांधी की कुण्डली जो इस तरह बताई जाती है। समझदार के लिए इशारा ही काफी

जन्मः 19-6-1970


वर्षफलः 44 साल


खाना नम्बर 12 में बुध और खाना नम्बर 2 में शुक्र है।  बुध का ज़हरीला असर चन्द्र पर। मां वक्त से पहले बेवा हो गई। अब उनकी सेहत भी ठीक नही रहती। राहु किस्मत के घर मन्दा। जिसका मालिक बृहस्पत भी चुप है। इसीलिए आज तक कोई नतीजा नही निकला। अगर 44वें साल के वर्षफल का जायज़ा लिया जाये तो कुछ अच्छा नज़र नही आता। राहु ने ग्रहण लगा दिया और बाकी कमी शनि ने पूरी कर दी। लिहाज़ा हाल ही में हुये लोकसभा इन्तखाब में इनके जेरे कियादत पार्टी को बुरी तरह शिकस्त मिली।
कुछ साल पहले इस कुण्डली पर बात हुई थी। दो सवाल थे जिनका जवाब आज तक नही आया। अब उम्र 44 साल हो गई है। न परिवार ही बना और न सरकार ही बना पाये। उम्मीदों पर पानी फिर गया। बल्कि सब उल्ट हो गया। किस्मत के फेर से रात की नींद  उजाड़ने वाला बुध खाना नम्बर 12 जिसका उपाय कर लेना ही बेहतर होगा। वर्ना
’’गई शब न आधी, वह क्यों रो रहा है;
लिखा सब फरिश्ता, उल्ट हो रहा है।’’

1 comment:

lalkitab said...

बुध का उपाय भी लिखते तो बेहतर होता

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